आज हम समय के उसी मोड़ पर खड़े हैं जहाँ इस्लामी आक्रांताओं ने एक बार फिर रूप बदल लिया है, और गायों का झुंड हमारी तरफ छोड़ दिया है क्योंकि वो जानते हैं कि वाजपेयी जी की भाजपा इन गायों को प्रणाम कर के, उनके सींगों में झुनझुने बाँधने में व्यस्त हो जाती।
दोनों प्रमुख द्रविड़ नेताओं की मृत्यु, लालू के जेल में होने, मुलायम को बेटे द्वारा किनारे किए जाने, शरद पवार के चुनाव लड़ने से इनकार करने, नायडू-पटनायक के अपने गढ़ बचाने में व्यस्त रहने और कॉन्ग्रेस की मज़बूरी के कारण केसीआर एक बड़े विपक्षी सूत्रधार बन कर उभरना चाह रहे हैं।
कम्युनिस्ट वे होते हैं, जो समाज की बराबरी के लिए काम करते हैं, दुनिया में सबके हको-हुकूक का झंडा बुलंद करते हैं, धर्मनिरपेक्ष समाज की स्थापना करते हैं, वगैरा-वगैरा। यह नैरेटिव नहीं 'जहर' है जो गढ़ा गया है, षड्यंत्र के तहत स्थापित किया गया है।
लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण में बशीरघाट में मतदान होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि बशीरघाट में 50 फ़ीसदी से अधिक लोग मुस्लिम हैं, पिछले साल वहाँ 2 बार साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएँ हो चुकी हैं।
अभिनेता कमल हासन के लिए भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं था, क्योंकि एक ख़ास समाज ने उनकी फ़िल्म की रिलीज रोक दी थी। राजनेता कमल हासन सामने मुस्लिमों को देखते ही गोडसे को आतंकी बताते हैं। उन्होंने कभी गोडसे का किरदार अदा किया था, लेकिन तब फ़िल्म की रिलीज नहीं रोकी गई।
NDTV के हठी पत्रकार को जब अपने इस सवाल का जवाब नहीं मिला तो वो राहुल गाँधी की गाड़ी के पास जा पहुँचा और राहुल गाँधी से शिकायती अंदाज़ में पूछा, “आपने जवाब नहीं दिया, समोसा कैसा था?” लेकिन, इस बार पत्रकार महोदय को जवाब मिल जाता है, और राहुल बताते हैं कि हाँ उन्हें समोसा अच्छा लगा।
रवीश कुमार को राहुल गाँधी के साथ, जेठ की दुपहरिया में खुले आसमान के नीचे इंटरव्यू करते हुए देखा तो ख्याल आ गया कि यह बंदा इश्क में फलाना-ढिमकाना हो जाना लिखता है, लेकिन असल जिन्दगी में बेइन्तिहाँ नफरत और कुंठा ढोता है।
2014 से पहले के कई वीडियो का उपयोग करके, जब पीएम मोदी सत्ता में नहीं थे, कामरा जैसे 'नफरती चिंटू' ने देश में मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार और झूठ के प्रसार का ही काम किया है।
पूरा लेख रेटरिक यानी गाल बजाने जैसा है जिसमें वही पाँच साल पुरानी बातें हैं जिन्हें लिख कर भारत का छद्म-बुद्धिजीवी गिरोह भी बोर हो चुका है: मोदी नफरत फैलाता है, समाज को बाँट रहा है, सरकार पूर्णतः विफल रही है... ब्ला, ब्ला ब्ला...