राजनैतिक मुद्दे

दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजने के लिए कॉन्ग्रेस ने दी दलित की ‘बलि’: MP में चुनाव के बीच याद आया वडोदरा

जो आंबेडकर, जगजीवन राम, सीताराम केसरी के साथ हुआ वही 2014 में नरेंद्र रावत के साथ हुआ था। अब फूल सिंह बरैया के साथ हुआ है। समय बदला पर कॉन्ग्रेस का दलितों के साथ व्यवहार नहीं।

इंदिरा गाँधी अपदस्थ: आज ही के दिन जस्टिस सिन्हा ने ‘फासीवादियों’ के दबाव के बावजूद सुनाया था ऐतिहासिक फैसला

इस कदम ने इंदिरा गाँधी को और भी अधिक निरंकुश बना दिया था। फिर पत्रकारों की गिरफ्तारी से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के खून से लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय लिखा गया।

दिल्ली में बाहरी का इलाज नहीं होगा: काश कि ये पोस्ट रवीश लिखते… नहीं लिखा तो हमने लिख दिया

दूसरे राज्यों से मजदूर चाहिए, लेकिन उन्हीं राज्यों से बीमार आएँगे तो इलाज नहीं! केजरीवाल के वैमनस्यता का यह विषाणु कोरोना से ज्यादा घातक है।

गुजरात कॉन्ग्रेस: बगिया लुट गई, माली बेखबर, राज्यसभा चुनाव के साथ ही टलने वाला नहीं है यह संकट

मोरबी से कॉन्ग्रेस विधायक बृजेश मेरजा ने इस्तीफा दे दिया है। गुजरात में राज्यसभा चुनाव से पहले यह आठवें विधायक का इस्तीफा है। लेकिन, कॉन्ग्रेस के लिए तो यह केवल संकटों की शुरुआत है।

लेबर पार्टी और ईसाई संस्थाओं के टट्टुओं का समूह है ‘स्टॉप फंडिंग हेट’: भारत-विरोधी जेरेमी कोर्बिन से है सम्बन्ध

'स्टॉप फंडिंग हेट' एक ऐसी संस्था है,जो चाहती है कि मीडिया वही करे, जिसकी वह 'अनुमति' दे। ये वामपंथियों का एक समूह है, जो भारत में दखल दे रहा है।

…जब कॉन्ग्रेस के बड़े नेता ने सेल्युलर जेल से वीर सावरकर का नाम हटाने का दिया आदेश और पड़े ‘जूते’

बात 2004 की है। अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल पहुँचे उस कॉन्ग्रेसी नेता को ज्योति पुंज पर वीर सावरकर का नाम देखकर इतनी चिढ़ हुई कि...

सावरकर की 10 साल बाद याचिका Vs नेहरू का बॉन्ड भरकर 2 हफ्ते में जेल से रिहाई: किसने कितना सहा?

नेहरू ने कभी भी नाभा में प्रवेश ना करने का बॉन्ड भरा, अपनी सज़ा माफ कराई। उनके पिता उन्हें छुड़ाने के लिए वायसराय तक सिफारिश लेकर...

लद्दाख में घास नहीं जमती, कश्मीर मुस्लिम बहुल: नेहरू कृपा से आज फिर खड़े हैं अक्साई चीन पर सैनिक

चीनी प्रीमियर चाऊ एन लाई जब भारत पहुँचे तो सड़क पर जनता हाथों में पोस्टर लिए निकली। इन पर लिखा था- "चीन से सावधान" "कठोर रहना नेहरू" "चीनी घुसपैठियों के सामने समर्पण नहीं।"

प्रजासुखे सुखं राज्ञः… तबलीगी और मजदूरों की समस्या के बीच आपदा में राजा का धर्म क्या

सभी ग्रंथों की उक्तियों का एक ही निचोड़ है कि राजा को जनता का उसी तरह ध्यान रखना चाहिए जिस तरह एक पिता अपने पुत्र की देखभाल करता है।

चुनाव से पहले फिर ‘विशेष राज्य’ के दर्जे का शिगूफा, आखिर इस राजनीतिक जुमले से कब बाहर निकलेगा बिहार

बिहार के नेता और राजनीतिक दल कब तक विशेष राज्य का दर्जा माँगते रहेंगे, जबकि वे जानते हैं कि यह मिलना नहीं है और इसके बिना भी विकास संभव है।

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