सामाजिक मुद्दे

‘शिवलिंगम’ बन जाता है ‘महमूद गजनवी’, ‘वणक्कम’ हो जाता है ‘अस्सलामु अलैकुम’: धर्मांतरण मतलब राष्ट्रांतरण, प्रताप-शिवाजी नायक की जगह हो जाते हैं दुश्मन

RSS के 5वें सरसंघचालक KS सुदर्शन लिखते हैं, "यह देश मुस्लिमों की श्रद्धा का पात्र तब तक नहीं बन सकता जब तक यह दारुल-इस्लाम नहीं बन जाता।"

सड़कों पर ही नहीं, मंदिर-गुरुद्वारे में भी नमाज पढ़ना है इस्लामी गिरोह का सपना: गणेश उत्सव से राना अयूब को लगी मिर्ची, हिंदू ही...

राना अयूब को शायद दुख है कि आखिर जब मुस्लिम समुदाय खुद ही गणेश पंडाल में नमाज पढ़ आता है तो हिंदुओं को क्या जरूरत ईदगाह में गणेश मूर्ति लगवाने की।

मजहब के हिसाब से नहीं ढलता बदन, फिर पीरियड आते ही निकाह कबूल कैसे: दूध पीती बच्ची से ‘कामुक हरकत (लिंग प्रवेश नहीं) जायज’...

शादी की उम्र कितनी होगी, ये कानून ने हमारे लिए तय किया है। लेकिन मुस्लिमों में ऐसा नहीं है। उनमें, लड़की के सयाने होते ही निकाह जायज माना जाता है।

तुम्हारी मर्जी चाहे जैसे करो/जिसके साथ करो, पर अपनी सोलोगामी के लिए सेक्स में ही मत समेटो स्त्री-पुरुष का संबंध: केवल रस्म नहीं है...

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में एक केस की सुनवाई के दौरान कहा हिंदू धर्म में विवाहित महिला के सुहाग और सिंदूर की अहमियत होती है। समाज उनको उसी नजरिए से देखता है।

जरा याद उन्हें भी कर लो… जो नहीं रहे, क्योंकि वे हिंदू थे: उस सूची के 75 नाम, जिसका नहीं दिख रहा कोई पूर्ण...

हम न इन हिंदुओं को भूले थे, न भूलेंगे। आपको भी बार-बार, तब तक इनकी याद दिलाते रहेंगे, जब तक आप इस खतरे में घिरे हैं।

हिंदू-सिखों को मरते छोड़ भाग गए थे कॉन्ग्रेसी नेता, सैकड़ों RSS कार्यकर्ताओं के बलिदान से बची हजारों जिंदगी: इतिहास की इन किताबों से जानें...

भारत बँटवारे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने बहादुरी का परिचय देते हुए सैकड़ों हिंदू-सिख परिवारों की रक्षा की।

33 साल पहले निकला था सलमान रुश्दी की मौत का फरमान, अब हुआ जानलेवा हमलाः मोहम्मद जुबैर के कारण इसी खतरे में नूपुर शर्मा...

सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद नुपूर शर्मा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। लगातार ऐसे संदिग्ध मिल रहे हैं जिनका मकसद नुपूर की हत्या का है।

सितारे गर्त में… क्योंकि दूध का जला भारत अब दही भी फूँक-फूँक कर खा रहा: राजनीति हो या फिल्म आपका ‘चुनाव’ ही इनकी निर्लज्जता...

राजनीति हो या खेल। साहित्य हो या मनोरंजन। प्रशासन हो या न्यायपालिका। शिक्षा हो या खेती-किसानी... कोई क्षेत्र निर्लज्ज विशेषज्ञता से वंचित नहीं है।

स्वतंत्रता के 75वें साल में भी वही मजहबी खतरे, किस ‘अवतार’ की प्रतीक्षा में हैं हिंदू: आखिर कब तक सरकार से सवाल को ही...

यह आवश्यक नहीं कि हिंदू किसी खास संगठन, दल के साथ खड़े हों। जरूरी है कि हिंदू के साथ हिंदू खड़े हों।

नाचो-गाओ, देह दिखाओ… सब मजहब को कबूल; लेकिन मंदिर जाना-फरमानी नाज का ‘हर-हर शंभू’ गाना गैर मजहबी: एक इस्लाम के दो पैमाने क्यों

फरमानी नाज की एक भजन वीडियो रिलीज होने के बाद कट्टरपंथी उन्हें मजहब का ज्ञान देने में लगे हैं जबकि फरमानी का कहना है कि कलाकार का कोई धर्म नहीं होता।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें