सुप्रीम कोर्ट ने आज नुपूर शर्मा को निश्चित तौर पर ईशनिंदा करने वाला घोषित कर दिया है। ये वही न्यायालय है जिन्होंने कभी गर्व से कहा था कि असहमति ही लोकतंत्र का सुरक्षा कवच है।
भारत के अंदर और बाहर पर्याप्त शत्रु हैं जो भारत को कभी भी सिविल वार की और धकेलने का प्रयास कर सकते हैं। वहाँ केवल सेना काम नहीं आएगी। उस समय ये अग्निवीर बड़ी ताकत साबित होंगे।
इस प्रकार के उग्र-हिंसक प्रदर्शन भी आतंक का ही एक रूप हैं जो समाज और शासन-प्रशासन पर अनुचित दबाव डालकर अपनी बात मनवाने का प्रयत्न करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे दबाव स्वीकार नहीं किए जा सकते, किए भी नहीं जाने चाहिए।