सामाजिक मुद्दे

मजहब के हिसाब से नहीं ढलता बदन, फिर पीरियड आते ही निकाह कबूल कैसे: दूध पीती बच्ची से ‘कामुक हरकत (लिंग प्रवेश नहीं) जायज’...

शादी की उम्र कितनी होगी, ये कानून ने हमारे लिए तय किया है। लेकिन मुस्लिमों में ऐसा नहीं है। उनमें, लड़की के सयाने होते ही निकाह जायज माना जाता है।

तुम्हारी मर्जी चाहे जैसे करो/जिसके साथ करो, पर अपनी सोलोगामी के लिए सेक्स में ही मत समेटो स्त्री-पुरुष का संबंध: केवल रस्म नहीं है...

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में एक केस की सुनवाई के दौरान कहा हिंदू धर्म में विवाहित महिला के सुहाग और सिंदूर की अहमियत होती है। समाज उनको उसी नजरिए से देखता है।

जरा याद उन्हें भी कर लो… जो नहीं रहे, क्योंकि वे हिंदू थे: उस सूची के 75 नाम, जिसका नहीं दिख रहा कोई पूर्ण...

हम न इन हिंदुओं को भूले थे, न भूलेंगे। आपको भी बार-बार, तब तक इनकी याद दिलाते रहेंगे, जब तक आप इस खतरे में घिरे हैं।

हिंदू-सिखों को मरते छोड़ भाग गए थे कॉन्ग्रेसी नेता, सैकड़ों RSS कार्यकर्ताओं के बलिदान से बची हजारों जिंदगी: इतिहास की इन किताबों से जानें...

भारत बँटवारे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने बहादुरी का परिचय देते हुए सैकड़ों हिंदू-सिख परिवारों की रक्षा की।

33 साल पहले निकला था सलमान रुश्दी की मौत का फरमान, अब हुआ जानलेवा हमलाः मोहम्मद जुबैर के कारण इसी खतरे में नूपुर शर्मा...

सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद नुपूर शर्मा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। लगातार ऐसे संदिग्ध मिल रहे हैं जिनका मकसद नुपूर की हत्या का है।

सितारे गर्त में… क्योंकि दूध का जला भारत अब दही भी फूँक-फूँक कर खा रहा: राजनीति हो या फिल्म आपका ‘चुनाव’ ही इनकी निर्लज्जता...

राजनीति हो या खेल। साहित्य हो या मनोरंजन। प्रशासन हो या न्यायपालिका। शिक्षा हो या खेती-किसानी... कोई क्षेत्र निर्लज्ज विशेषज्ञता से वंचित नहीं है।

स्वतंत्रता के 75वें साल में भी वही मजहबी खतरे, किस ‘अवतार’ की प्रतीक्षा में हैं हिंदू: आखिर कब तक सरकार से सवाल को ही...

यह आवश्यक नहीं कि हिंदू किसी खास संगठन, दल के साथ खड़े हों। जरूरी है कि हिंदू के साथ हिंदू खड़े हों।

नाचो-गाओ, देह दिखाओ… सब मजहब को कबूल; लेकिन मंदिर जाना-फरमानी नाज का ‘हर-हर शंभू’ गाना गैर मजहबी: एक इस्लाम के दो पैमाने क्यों

फरमानी नाज की एक भजन वीडियो रिलीज होने के बाद कट्टरपंथी उन्हें मजहब का ज्ञान देने में लगे हैं जबकि फरमानी का कहना है कि कलाकार का कोई धर्म नहीं होता।

दरगाहों से हिंदुओं ने मोड़ा मुँह तो गैर इस्लामी हुआ ‘सिर तन से जुदा’, उस PFI की कुर्बानी भी कबूल जो भारत को मुस्लिम...

जिस आर्थिक बहिष्कार की बात होती है, वह हिंदू आज भी नहीं कर पाए हैं। लेकिन हिंदुओं के छिटपुट प्रयासों और दगाहो-मजारों पर सन्नाटे ने इनकी छटपटाहट बढ़ा दी है।

प्रवीण नेट्टारू की हत्या से लेकर प्रोफेसर का हाथ काटने तक: PFI और शरिया कोर्ट, इस्लामीकरण के विरोधी हिंदुओं के कत्लेआम का फरमान

कर्नाटक में BJYM नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या में PFI की भूमिका सामने आ रही है। इसकी शरिया कोर्ट के आदेश पर ही प्रोफेसर का हाथ काटा गया था।

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