इस प्रकार के उग्र-हिंसक प्रदर्शन भी आतंक का ही एक रूप हैं जो समाज और शासन-प्रशासन पर अनुचित दबाव डालकर अपनी बात मनवाने का प्रयत्न करते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे दबाव स्वीकार नहीं किए जा सकते, किए भी नहीं जाने चाहिए।
यदि लड़की हिन्दू हो तो मुसलमान ‘प्रेम के मसीहा’ बन जाते हैं, लेकिन लड़की यदि उनके कौम की निकले तो समूची मुस्लिम-आबादी उस हिन्दू लड़के को अपना दुश्मन मान जिहाद का रास्ता इख़्तियार कर लेती है।
जब हिंदूफोबिक कॉमेडी के कारण देश भर में मुनव्वर फारूकी का विरोध हो रहा था तो एकता कपूर लॉकअप लेकर आईं और सीक्रेट्स के नाम पर ऐसा माहौल बनाने का प्रयास हो रहा कि ये कॉमेडियन तो 'बेचारा' है।