सामाजिक मुद्दे

सरस्वती पूजा पर ‘हिजाब’ की बात क्यों राहुल गाँधी? बसंत पंचमी पर किसान की तस्वीर, लेकिन हिंदू देवी गायब

बसंत पंचमी पर राहुल गाँधी ने सरस्वती पूजा की शुभकामनाएँ दीं, लेकिन उनकी तस्वीर लगाने से परहेज किया और तस्वीर किसान की लगा दी।

लावण्या, हीरालाल और दिनेश यादव: ये सिर्फ 3 नाम और 3 खबर नहीं… हिंदुओं के लिए 3 चैलेंज हैं

4 दिन में 3 खबरें - हीरालाल, लावण्या और दिनेश यादव। तीनों खबर अलग-अलग विषय पर... और तीनों हिंदुओं के लिए है चैलेंज।

‘सायना नेहवाल’ की जगह होती ‘साइमा’ तो टूट पड़ते लिबरल: सोशल साइट्स से लेकर किताब तक… हर जगह हिंदू महिलाओं को गाली

हिंदू महिलाओं को टारगेट करने के लिए विभिन्न चैनल, पेज और आपत्तिजनक तस्वीरें मौजूद हैं। दुखद बात ये है कि इन्हें देख कर नजरअंदाज करने की रवायत अब आम हो गई है।

नव-सृजन से हो नव-वर्ष का अभिनंदन! अँधेरे के बजाय सूर्य की पहली किरण से हो स्वागत

नव वर्ष के स्वागत के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे हर मन में सात्विक नव ऊर्जा का संचार हो। आखिर नव-सृजन से ही तो होना चाहिए नव-वर्ष का अभिनंदन!

JEE, NEET की तरह होगी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक व स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा: विद्यार्थियों को झंझट से मिलेगी मुक्ति

आरपी तिवारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में य़ूजीसी से प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा लागू करने की माँग की है।

एक मुहम्मदवाद के इतने खतरे, और ‘पैगंबर’ गढ़कर क्या करेंगे: कालीचरण महाराज की ‘गाली’ से गायब नहीं हो जाते गाँधी पर सवाल

क्या यह विचित्र नहीं है कि इस देश में हिंदू अराध्यों को गाली दी जा सकती है, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात हो सकती है... पर गाँधी पर सवाल नहीं किया जा सकता।

सरकार को शापित करने वाली महिला नेता भी नहीं कर पाती अपने नेताओं का मुखर विरोध: पढ़ें क्यों स्त्री अपमान हो गया है सामान्य

संस्कृति आज भी उसी मार्ग का गमन करती दिख रही है जिस मार्ग से वह हर युग से चलती रही है – स्त्री अपमान का मार्ग।

काशी कब चल रहे हो? महसूस कीजिए शताब्दियों की उपेक्षा, अनदेखी और लूट के बाद पैदा हुई इस नवीनता, उत्साह और आशा को

काशी एक शहर मात्र नहीं है। यह हमारी सभ्यता की जीवंतता और चिरंतनता का जीता-जागता प्रमाण है। गंगा अगर इसके प्राण हैं तो भोलेनाथ इसका हृदय।

‘रेप के मजे लो, आवारगी करेंगी’: माननीयो भले आपकी सोच कमर के नीचे हो, लड़कियों की जिंदगी केवल कमर के नीचे नहीं

आप राजनीति के जिस खाने में नजर दौड़ाएँगे ऐसे लोग आपको बेशर्म ठहाके लगाते मिल जाएँगे, जिनके लिए महिला होना भोग की वस्तु जैसा होना है।

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