सामाजिक मुद्दे

नमाज पढ़ते मुस्लिम और सुरक्षा में सिखों का घेरा: हाईजैक ‘किसान आंदोलन’ और शाहीन बाग मॉडल

'किसान आंदोलन' में नमाज पढ़ते मुस्लिम और उनकी 'सुरक्षा' में खड़े सिख समुदाय के लोगों की तस्वीर व वीडियो को राना अयूब जैसों ने वायरल किया।

तीस हजार बाबरी बाकी है, और हम उसे ले कर रहेंगे

हर राष्ट्र में कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से होता है और अल्पसंख्यकों को उसी दायरे के अनुकूल बनना पड़ता है। यहाँ हमेशा उल्टा होता आया है क्योंकि सर्वसमावेशन और सहिष्णुता की बात सिर्फ हिन्दुओं की ही जिम्मेदारी बन गई है।

नारीवादियो तेरा कुछ नहीं जाता, पर सितारा परवीन जैसों के लिए बेड़ी बन जाती है जायरा वसीम और सना खान की ‘घर वापसी’

नारीवाद का झंडा बुलंद करने वालों को सना, जायरा वसीम, हलीमा के फैसलों में पितृसत्ता क्यों नहीं दिखती?

‘बाबरी मस्जिद… भगवान का घर तोड़ना पाप’ – शब्दों से खेल रही स्वरा भास्कर की हिंदी कमजोर या है पाखंड?

स्वरा जैसों का प्रयास आज भी वही है कि राम मंदिर बनने के बाद सेकुलर हिंदू उसमें जाए और मंदिर में बैठकर अल्लाह से माफी माँगे।

कानपुर लव जिहाद SIT रिपोर्ट: आखिर वामपंथियों को 14 साल की बच्चियों का समुदाय विशेष वालों द्वारा गैंगरेप क्यों नॉर्मल लगता है?

बात यह है कि हर मामले में खास मजहब का लड़का ही क्यों होता है? ईसाई या सिक्ख लड़के आखिर किसी हिन्दू लड़की को अपना नाम हिन्दू वाला बता कर प्रेम करते क्यों नहीं पाए जाते?

‘लव जिहाद’ की जगह ‘ग्रूमिंग जिहाद’ – आखिर क्यों ऑपइंडिया ने लिया इसे इस्तेमाल करने का फैसला

जिहाद में कोई ‘लव’ नहीं है। ‘लव जिहाद’ शब्द के इस्तेमाल से यह जिहाद की गंभीरता को दिखाने में विफल रहता है, जबकि असली समस्या...

हिंदू संस्कृति का मजाक उड़ाती है Netflix की वेब सीरीज: समय है इसके बहिष्कार का… और वो समय अभी ही है

पिछले कई सालों से इस्लामिक संगठनों द्वारा किए गए हमलों को सफेदजामा पहनाने की कोशिश की जा रही है और नेटफ्लिक्स इस प्रोपेगेंडा में...

डियर रेख्ता, हम अगर किसी त्योहार को ‘खून की नदी बहाने का त्योहार’ लिख दें तो सुलग जाएगी

रेख्ता ने एक पोस्टर के जरिए दिवाली और इससे जुड़े कुछ प्रचलित शब्दों को उर्दू शब्दकोश देने की कोशिश की और इसी बहाने इसमें मजहबी अजेंडा को साध लिया।

पटाखों पर रोक लेकिन कुर्बानी से ‘प्यार’ और क्रिसमस पर सब OK… नफरत सिर्फ हिंदुओं के त्योहारों से क्यों?

सवाल यह है कि प्रदूषण को लेकर सरकारें साल भर क्यों सोती रहती हैं? पॉल्यूशन का सॉल्यूशन चंद दिनों के बैन से निकलेगा या यह सिर्फ राजनीति?

कुरान और गीता में हिंसा एक नहीं है: ‘अधर्मी से युद्ध’ और ‘विधर्मी को काटने’ में हिंदू-मुसलमान का अंतर है

जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुमसे या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें