सामाजिक मुद्दे

मुस्लिम महिला सबसे गोरी, ब्राह्मण सबसे काले: Cadbury वालो, धंधा करो ज्ञान मत बाँटो

कॉर्पोरेट को समझना होगा कि उसके एजेन्डाबाज और राजनीतिक रूप से वामपंथी झुकाव वाले प्रोफेशनल किसी मुद्दे का समाधान करने की कोशिश नहीं कर रहे। यही कारण है कि मूल व्यवसाय से ज्यादा ऐसी फ़िज़ूल की गतिविधियों में ऊर्जा खपाना धंधे पर भारी पड़ रहा है।

‘मुल्लों से आज हर कोई डरता है’: रेप के अड्डे बने मदरसे, मुँह खोलने पर 19 साल की नुसरत को जलाकर मारा डाला

यौन शोषण के ज्यादातर मामले मौलवियों के खौफ में दबा दिए जाते हैं। जो मामले सामने आते हैं उनमें भी पीड़िताओं के साथ नुसरत जैसी घटना अंजाम दी जाती है। आखिर क्यों कभी धर्म तो कभी तुष्टिकरण के नाम पर आरोपी मौलवियों के कुकर्म धुल जाते हैं?

अरुंधति रॉय: धूर्त, कपटी और प्रपंची वामपंथन

हर यूनिवर्सिटी या सार्वजनिक मंच पर ये विशुद्ध झूठ बोलते हैं, फिर इनका गिरोह सक्रिय हो जाता है और ऐसे दिखाता है कि ब्रो, अरुंधति रॉय ने बोला है ब्रो… ब्रो… समझ रहे हो ब्रो? अरुंधति फ्रीकिंग रॉय ब्रो! ये ब्रो-ब्रो इतना ज्यादा होने लगता है कि वो ब्रोहाहा कॉलेज के 22-25 साल के युवा विद्यार्थियों के लिए तथ्य का रूप ले लेता है।

महादलितों की मॉब लिंचिंग: TOI की भ्रामक हेडलाइन के पीछे छिपा मीडिया कुचक्र का घिनौना सच

TOI से हमारा सवाल- 'अगर महादलितों की मॉब लिंचिंग हुई है तो SC-ST एक्ट क्यों नहीं लगा?' जवाब यह है कि सभी हत्यारोपित महादलित ही हैं। देखिए किस तरह से ख़बरों को पेश कर फेक नैरेटिव को हवा दी जाती है। मीडिया के नए रूप को आप भी अच्छी तरह समझ लें।

मैक्डॉनल्ड्स आज सिर्फ हलाल मांस बेच रहा है क्योंकि हिन्दुओं की आस्था… वो क्या होती है?

हिन्दुओं को इससे फर्क नहीं पड़ता कि वो कौन-सा मांस खा रहे हैं। जिन्हें फर्क पड़ा, तो उन्हें 'बिगट', 'कम्यूनल', 'असहिष्णु' और पता नहीं क्या-क्या कह दिया गया। क्योंकि बहुसंख्यकों का न तो कोई धर्म है, न उनकी भावना आहत होती है।

पीरियड आते ही मुस्लिम लड़कियों की शादी जायज: कब बदलेगा कट्टरपंथियों का कानून

सांप्रदायिकता की लकीर खींचने के लिए अंग्रेज मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एप्लिकेशन एक्ट लेकर आए। आजादी के बाद कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण नीति की वजह से बाल विवाह के कानून बदले, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को छुआ भी नहीं गया।

फर्जी नारीवाद में मत फँसो लड़कियो, वरना प्रेम में सहमति से बना शारीरिक संबंध भी फर्जी बलात्कार ही लगेगा

फर्जी नारीवाद को दो पल के लिए कोने में रखकर एक बार इस पर गौर कीजिए कि हम कथित तौर पर महिला सुरक्षा और महिला अधिकारों के नाम पर क्या गंदगी फैला रहे हैं। हम अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग कौन सी दिशा में कर रहे हैं? पूछिए एक बार खुद से क्या वाकई प्रेम में अलग होने के बाद आपसी संबंध बलात्कार हो जाते हैं?

‘मुस्लिमो, दलितों के इस विरोध-प्रदर्शन से सीखो’ – रामभक्त रविदास के नाम पर हिंसा फैलाने वालो, उन्हें पढ़ो तो सही

संत रविदास मंदिर पर राजनीति कर रहा चंद्रशेखर वही व्यक्ति है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर की जगह बुद्ध मंदिर की माँग की थी। "अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी" लिखने वाले संत रविदास अगर आज ज़िंदा होते तो उनके नाम पर राजनीति करने वाले और दलितों को 'राम अमंदिर आंदोलन' से दूर रहने की सलाह देने वाले चंद्रशेखर को अपना भक्त तो नहीं ही मानते।

विवेकानंद का ‘सर्व-धर्म-समभाव’ इस्लाम के लिए एक मौका था, कट्टरपंथियों को सोचना होगा क्यों गँवा दिया

समुदाय विशेष को यह सोचने की ज़रूरत है कि विवेकानंद के 'सर्व-धर्म-समभाव' वाले पन्ने पर क्यों विभाजन की खूनी दास्ताँ लिखी, क्यों मुस्लिम-बहुल कश्मीर को हिन्दू-बहुल भारत का साथ मंज़ूर नहीं और क्यों कश्मीरी पंडितों के साथ वो किया, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।

मैं अनुराग ‘समय’ कश्यप हूँ, मुझे हक़ीक़त से क्या, मेरी जिंदगी का एक्के मकसद है – प्रपंच और प्रलाप चलता रहे

प्रगतिशील लिबरल वर्ग का वास्तविक डर संवाद के साधनों का दोतरफा हो जाना है। अब यह संभव नहीं है कि आप टीवी स्क्रीन के पीछे बैठकर इकतरफा अपने कुतर्कों का ज्ञान बाँचें और श्रोता, दर्शक, पाठक आपसे सहमत होने के लिए मजबूर हो। यह समय त्वरित संचार और प्रतिक्रिया का है। जो प्लेटफॉर्म जितना ज्यादा प्रतिक्रिया करता है ये प्रगतिशील वहाँ से अवश्य पलायन करेंगे।

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