सामाजिक मुद्दे

बिहारियों पर केंद्र कब ध्यान देगा? क्या बिहारी भी उठा ले पत्थर?

हम बिहार में रहते हैं जहाँ की आबादी 13 करोड़ के लगभग है। हमें कश्मीर दिखता है जहाँ की आबादी यहाँ का मुश्किल से दसवाँ हिस्सा होगी। मुझे ये दिखता है कि वहाँ कितना ध्यान दिया जा रहा है और यहाँ कितन कम ध्यान दिया जाता है।

जब कश्मीरी बैंड की लड़कियों को रेप की धमकी मिलती रही, CM अब्दुल्ला पलट कर कठमुल्लों की गोद में बैठ गए

कश्मीर में जब तक 370 था तबतक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु के बाद ही हो, ऐसा कोई कानून नहीं चलता था। बाल विवाह भी होता था इसलिए करीब दस साल पहले दसवीं में पढ़ने वाली ये बच्चियाँ आज कहाँ होंगी ये तो पता नहीं।

सबरीमाला मंदिर में चोरी-छिपे घुसने वाली महिला की बेटी का जबरन धर्म परिवर्तन, पति ने ही…

जबरन सबरीमाला मंदिर में घुसने की असफल कोशिश करने वाली बिन्दु थनकम कल्याणी ने आरोप लगाया कि उसके पति ने अपनी ही बेटी को अगवा करके उसका धर्म परिवर्तन करा डाला। इसके बाद बेटी का स्कूल भी बदलवा कर मुस्लिम स्कूल में भर्ती करवा दिया।

रवीश जी, पत्रकार तो आप घटिया बन गए हैं, इंसानियत तो बचा लीजिए!

अनुभवी आदमी शब्दों को अपने हिसाब से लिख सकता है कि वो एक स्तर पर श्रद्धांजलि लगे, एक स्तर पर राजनैतिक समझ की परिचायक, और गहरे जाने पर वैयक्तिक घृणा से सना हुआ दस्तावेज। रवीश अनुभवी हैं, इसमें दोराय नहीं।

भाजपा विधायक जी, शर्म नहीं आई ‘गोरी लड़कियों’ के बारे में बेहूदगी से बोलते हुए

हम आजम खान जैसे नेताओं के सेक्सिस्ट कमेंट पर हैरान नहीं होते क्योंकि जिस पार्टी के वो नेता हैं उसके संस्थापक ही रेप जैसी घटनाओं को जस्टिफाई करते हैं, लेकिन भाजपा से जुड़े लोग भी जब ऐसी ही भाषा में बात करने लगे और वह भी 370 के संदर्भ में तो यह केवल महिलाओं को लेकर उनकी ओछी सोच ही नहीं है, बल्कि उनको भी नीचा दिखाता है जिन्होंने एक विधान-एक निशान के लिए अपनी जिंदगी खपा दी।

गौतस्करों ने 19 हिन्दुओं की हत्या की, लेकिन गोपाल की हत्या उसे तबरेज़ या अखलाक नहीं बना पाती

सौ करोड़ की आबादी, NDA के 45% वोट शेयर में आखिर किसके वोटर कार्ड हैं? फिर सवाल कौन पूछेगा इन हुक्मरानों से? आलम यह है कि तीन चौथाई बहुमत वाले योगी जी के राज्य में, हिन्दुओं को अपने घरों पर लिखना पड़ रहा है कि यह मकान बिकाऊ है!

निर्भया, कठुआ, उन्नाव… बाकी 2 लाख रेप विक्टिम को कब मिलेगा ’45 दिन’ वाला न्याय

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बाल दुष्कर्म के मामलों की जानकारी देते हुए बताया गया था कि इस प्रकार के मामलों के निपटाने की दर महज नौ फीसदी ही है। और यह हालात पोक्सो कानून लागू होने के सात साल बाद की है।

हिन्दुओं की लिंचिंग से हिन्दुओं को ही फर्क नहीं पड़ता तो 49 सेलिब्रिटीज़ से सवाल क्यों?

तुम्हारी लड़ाई वो 49 लोग क्यों लड़ेंगे जिनका अजेंडा ही तुम्हारी सरकार को कमजोर करना है। उनके पास लिखने और बोलने का सामर्थ्य है, क्या तुम्हारे पास वो सामर्थ्य नहीं? अगर है तो वो दिखता क्यों नहीं?

Zomato वालो, हलाल के समय ‘Food has no Religion’ कहाँ गया?

Zomato के तथाकथित मूल्य कितने खोखले हैं, इसकी नज़ीर यह है कि जब एक 'शांतिप्रिय' ने गैर-हलाल खाने के लिए शिकायत की, तो Zomato उसके चरणों में गिर गया। उस समय उसके 'मूल्य' हवा हो गए।

SCROLL से सीखिए हिमा दास की काबिलियत पर तर्कों के साथ शक करना

विनय की गणित के मुताबिक भले ही इतनी जीतों के बावजूद भी हिमा योग्य नहीं हैं, लेकिन हमें फिर भी उम्मीद है कि टोक्यो ओलंपिक में मेडल आएगा। इसका ये मतलब नहीं है कि हम उनके 5 मेडल की चमक में अंधे होकर उनसे आस लगा रहे हैं।

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