सामाजिक मुद्दे

ओवैसी जैसे लोग शरीर पर विष्ठा लेप लेंगे अगर मोदी कह दे कि फ्लश करना चाहिए

ओवैसी ब्रीड के तमाम नेता हमेशा भीम-मीम से लेकर तमाम अदरक-लहसुन करते रहते हैं। और सबके केन्द्र में यही बात होती है कि देखो हिन्दू तुमको काटने की तैयारी में है, तुम्हारे बकरीद का बकरा छीन लेगा, तुम्हें अब बच्चे पैदा नहीं करने देगा, तुम्हारे बच्चों को नपुंसक बना देगा।

जल-संकट, प्लास्टिक जैसी कई समस्याएँ हल हो गईं होतीं, अगर हम अपना देसी ज्ञान सहेज पाते

इस तकनीक से दो से तीन दिन तक पौधों को पानी मिलता रहता है। इस्तेमाल करने के बाद फेंक दी जाने वाली बोतलों का इस तरह से दोबारा इस्तेमाल भी होता है।

‘मेरा लेखन तभी सार्थक है, जब कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही करने के लिए प्रेरित हो सके’

मेरे लेखन का उद्देश्य यही है कि कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही करने के लिए प्रेरित हो सके तो मैं अपना लेखन सार्थक मानूँगी। मेरी आगामी दो किताबें भी इसी उद्देश्य के साथ आ रही हैं। जिनमें से एक उपेक्षित स्त्रियों को केंद्र में रखकर लिखा गया कहानी संग्रह है और दूसरी किसानों से जुड़ी, खेती से जुड़ी, असल समस्याओं और किसानों के जीवन के भीतर की कहानी पर आधारित है।

रक्षाबंधन का इतिहास: फ़र्ज़ी नारीवादियों के कुतर्कों के नाम (लम्पट वामपंथी भी पढ़ें)

हर परंपरा में उच्च स्थान बाँधने वाले को दिया जाता है कि उसका दिया गया सूत्र (धागा) बँधवाने वाले की रक्षा करेगा क्योंकि इसमें उसने अपनी अराधना, आत्मीयता, स्नेह आदि की शक्ति संचित कर दी है। फिर यहाँ स्त्री हीन कैसे है ये समझ से परे है।

शोभा डे और बिकाऊ मीडिया: जब गुलाम नबी ने खड़ी की थी किराए की कलमों (गद्दार, देशद्रोही पत्रकार) की फौज

81 पैराग्राफ के कबूलनामे में गुलाम नबी ने अपने कई अपराध कबूल किए थे। मुक़दमे के दौरान अदालत में सिद्ध हुआ था कि अपराधी (गुलाम नबी) न सिर्फ वक्ताओं की लिस्ट ISI से लेता था, बल्कि वो क्या बोलेंगे, ये भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था, आईएसआई ही तय करती थी।

बिहारियों पर केंद्र कब ध्यान देगा? क्या बिहारी भी उठा ले पत्थर?

हम बिहार में रहते हैं जहाँ की आबादी 13 करोड़ के लगभग है। हमें कश्मीर दिखता है जहाँ की आबादी यहाँ का मुश्किल से दसवाँ हिस्सा होगी। मुझे ये दिखता है कि वहाँ कितना ध्यान दिया जा रहा है और यहाँ कितन कम ध्यान दिया जाता है।

जब कश्मीरी बैंड की लड़कियों को रेप की धमकी मिलती रही, CM अब्दुल्ला पलट कर कठमुल्लों की गोद में बैठ गए

कश्मीर में जब तक 370 था तबतक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु के बाद ही हो, ऐसा कोई कानून नहीं चलता था। बाल विवाह भी होता था इसलिए करीब दस साल पहले दसवीं में पढ़ने वाली ये बच्चियाँ आज कहाँ होंगी ये तो पता नहीं।

सबरीमाला मंदिर में चोरी-छिपे घुसने वाली महिला की बेटी का जबरन धर्म परिवर्तन, पति ने ही…

जबरन सबरीमाला मंदिर में घुसने की असफल कोशिश करने वाली बिन्दु थनकम कल्याणी ने आरोप लगाया कि उसके पति ने अपनी ही बेटी को अगवा करके उसका धर्म परिवर्तन करा डाला। इसके बाद बेटी का स्कूल भी बदलवा कर मुस्लिम स्कूल में भर्ती करवा दिया।

रवीश जी, पत्रकार तो आप घटिया बन गए हैं, इंसानियत तो बचा लीजिए!

अनुभवी आदमी शब्दों को अपने हिसाब से लिख सकता है कि वो एक स्तर पर श्रद्धांजलि लगे, एक स्तर पर राजनैतिक समझ की परिचायक, और गहरे जाने पर वैयक्तिक घृणा से सना हुआ दस्तावेज। रवीश अनुभवी हैं, इसमें दोराय नहीं।

भाजपा विधायक जी, शर्म नहीं आई ‘गोरी लड़कियों’ के बारे में बेहूदगी से बोलते हुए

हम आजम खान जैसे नेताओं के सेक्सिस्ट कमेंट पर हैरान नहीं होते क्योंकि जिस पार्टी के वो नेता हैं उसके संस्थापक ही रेप जैसी घटनाओं को जस्टिफाई करते हैं, लेकिन भाजपा से जुड़े लोग भी जब ऐसी ही भाषा में बात करने लगे और वह भी 370 के संदर्भ में तो यह केवल महिलाओं को लेकर उनकी ओछी सोच ही नहीं है, बल्कि उनको भी नीचा दिखाता है जिन्होंने एक विधान-एक निशान के लिए अपनी जिंदगी खपा दी।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें