वयोवृद्ध मार्क्सवादी नेता रमेश प्रजापति सीएए से नाराज़ थे। जब उन्होंने खुद को आग लगाई तब उनके पास CAA और NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को लेकर कुछ कागजात थे। उनके परिवार ने इस मामले में पुलिस से जाँच की माँग की है।
"ये विरोध CAA का विरोध नहीं है, ये नरेन्द्र मोदी जी का विरोध है। हमने बार-बार बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी की नागरिकता नहीं छिनता। इस देश का हर मुस्लिम नागरिक इज्जत के साथ इस देश में रहता है और रहेगा।"
चारों विद्रोही गुटों का नेतृत्व राजन दईमारी, गोविंदा बसुमतारी, धीरेन बोडो और बी सओरिगरा करते रहे हैं। इनके अलावा एक अन्य बोडो संगठन एबीएसयू के अध्यक्ष प्रमोद बोडो और बोडोलैंड टेरीटोरियल कॉउन्सिल के अध्यक्ष हाग्रामा मोहिलारी ने भी इस करार पर साइन किया।
"जिस वक्त पानी आता है उस वक्त आप अपनी मोटर चलाएँगे, तो आपको पानी साफ मिलेगा। लेकिन जिस वक्त पानी नहीं आता है, उस वक्त आप मोटर चलाएँगे, तो वो आस-पास की गंदगी को खींचेगा और वो गंदगी पानी के साथ बाहर आएगी।"
“पश्चिम बंगाल सरकार हमेशा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करती है, न कि भारतीय प्रधानमंत्री का। यह ताजा उदाहरण है। हम KMC मेयर के इस्तीफे और एक निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जाँच की माँग करते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री को भी इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए।”
पीएफआई ने दंगों से पहले 27 बैंक अक़ॉउंट ख़ोले थे। 9 बैंक अकॉउंट रेहाब फाउंडेशन के नाम पर खोले गए थे, जिसका संबंध भी पीएफआई से है। जबकि 37 अन्य अकॉउंट भी इसी संगठन ने 17 अलग-अलग लोगों के नाम और संगठनों के नाम पर खोले थे।
"शरजील के ख़िलाफ़ असम और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, वो निंदाजनक है। शरजील सिर्फ़ नागरिकता संशोधन कानून का मौख़िक आलोचक है और AMU में जो उसने असम के बारे में बयान दिया, उसे संघ के लोग और भाजपा प्रवक्ता गलत तरह से पेश कर रहे हैं।"
पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रत्येक थाने के आगे भारत माता की पूजा करने की भाजपा की योजना में गतिरोध उत्पन्न किया। भाजपा का कहना है कि उन्होंने तय किया था कि 26 जनवरी के दिन वो पार्टी की ओर से शहर के सभी पुलिस थानों के आगे भारत माता की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना करेंगे। इस संबंध में सभी थानों को चिट्ठी भेजकर...
यह देखना हास्यास्पद है कि जब इस CAA-NRC विरोध प्रदर्शन को शुरू करने वाला शाहीन बाग ही शरजील इमाम से पीछा छुड़ाना चाह रहा है, तब यहाँ जेएनयू में अपनी पहचान तलाश रहा BAPSA शरजील के मुस्लिम होने और सताए जाने की बात करते हुए इसमें ब्राह्मणवाद निकाल लाया है।
"हिन्दू माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं क्योंकि मुस्लिम अपने बच्चों को जिहादी बना रहे हैं। दंगाई मुस्लिम भीड़ ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा लगाते हुए न सिर्फ़ ईंट-पत्थर फेंके बल्कि गोली चलाई और पेट्रोल बम भी दागे। मुस्लिम महिलाएँ मिर्ची पाउडर फेंक रही थीं।"