केंद्र ने ₹2,000 करोड़ के एक "वन-टाइम सेटेलमेंट" पैकेज की घोषणा की थी। उसे भी यह शरणार्थी इसलिए नहीं ले पाए क्योंकि उनके पास डोमिसाइल सर्टिफ़िकेट नहीं था। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 1.5 लाख परिवार, यानी 10 लाख शरणार्थी आज भी शिविरों में रहने के लिए मजबूर हैं।
समय के फेर देखिए। जब सुनील दत्त को अनसुना कर संजय निरुपम को कॉन्ग्रेस में लाया गया तब सोनिया गॉंधी पार्टी की अध्यक्ष हुआ करती थीं। सुनील दत्त के जाने के 14 साल बाद जब वही निरुपम पार्टी को आँखें दिखा रहे हैं तो सोनिया ही पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं!
खुर्शीद ने सोनिया के अंतरिम अध्यक्ष बनने पर नाखुशी जताते हुए कहा था कि पार्टी को करारी हार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल के इस्तीफे के कारण पार्टी जनादेश का विश्लेषण नहीं कर पाई। इससे पार्टी में एक शून्य पैदा हो गया।
सरकार कॉन्ग्रेस के साथ कोई सहयोग नहीं कर रही है, जबकि पार्टी ने चुनाव के समय और राज्य के हालात को लेकर शंकाओं के बावजूद सरकार के साथ सहयोग की इच्छा प्रकट की थी।
"पवित्र ब्लैक मडोना की प्रतिमा का दर्शन करने और उसे छूने के लिए कई लोग लाइन में लगे थे। मुझे भी उसी लाइन में लग कर काफ़ी ख़ुशी हुई। मैंने अपनी बारी का इंतजार किया और फिर ब्लैक मडोना का दर्शन किया।"
गहलोत ने विवादित बयान देते हुए कहा कि गुजरात में आज़ादी के बाद से ही शराब पर प्रतिबन्ध है लेकिन शराब की सबसे ज्यादा खपत गुजरात में ही होती है। उन्होंने गुजरात के बारे में आगे दावा किया कि राज्य में घर-घर में शराब पी जाती है।
"राफेल एयरक्राफ्ट पर 'ॐ' लिख कर और शस्त्र-पूजा कर के राजनाथ सिंह इसे धर्म के साथ जोड़ रहे हैं। यह औरों की तरह सिर्फ एक हथियार है, जिसे आप ख़रीद रहे हैं। दशहरा के त्योहार और राफेल का भला क्या मेल है?"
उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रह चुके खुर्शीद ने कहा कि कॉन्ग्रेस एकजुट होकर हार का विश्लेषण नहीं कर सकी क्योंकि उनका नेता ही उन्हें छोड़ कर चला गया। खुर्शीद ने सोनिया गाँधी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर भी नाराज़गी जताई।
"प्रधानमंत्री सांमजस्यपूर्ण भारत की तलाश में हैं। जो संसद में दिए उनके बयान से पुख्ता होता है, लेकिन क्या राज्य और उसके कानून को इसका अनुसरण नहीं करना चाहिए? प्रधानमंत्री की आकांक्षाओं का खंडन करते हुए 49 साथियों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।"
बीते वर्ष अमृतसर के जोड़ा फाटक पर दशहरा महोत्सव चल रहा था। वहाँ लोग रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार ट्रेन वहाँ से गुजरी और कई लोग काल के गाल में समा गए। इस हादसे ने 59 लोगों की ज़िंदगियाँ लील लीं। कई कॉन्ग्रेस नेता इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार हैं लेकिन...