"हिंदुओं को पूजा करने का मौलिक अधिकार मुस्लिमों के संपत्ति के अधिकार से ऊपर है। जब भी दोनों के बीच कोई विवाद होता है, तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा मौलित अधिकारों के पक्ष में फैसला सुनाता है। मुझे विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय नवंबर में हमारे पक्ष में अपना फैसला सुनाएगा।"
देश में NRC ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है। असम में पिछले दिनों राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की लिस्ट जारी कर दी गई है। इस लिस्ट में 19 लाख से अधिक लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं है।
सिंधिया की रैली की बात बात करें तो सारा हंगामा तब शुरू हुआ जब एक के बाद एक कार्यकर्ताओं ने मंच पर चढ़ना शुरू कर दिया। उस समय सिंधिया मंच पर ही मौजूद थे। होड़ लगा कर सिंधिया से मिलने मंच पर पहुँच रहे कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ उछालनी शुरू कर दी।
नोटिस के बाद 50% से अधिक पूर्व सांसदों ने सरकारी आवास खाली कर दिया था। बावजूद इसके 82 ऐसे पूर्व सांसद हैं , जो सरकारी आवास खाली करने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। नियमानुसार, दोबारा चुन कर न आए सांसदों को लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर सरकारी आवास खाली करना होता है।
ताज़ा खुलासे से पता चलता है कि प्रशांत किशोर की कम्पनी ममता बनर्जी की तृणमूल के लिए सोशल मीडिया में एक बड़ा इकोसिस्टम खड़ा कर रही है, जिसमें कई डिजिटल पोर्टल्स और 'इन्फ्लुएंसर्स' शामिल हैं। यह सब रुपयों के दम पर किया जा रहा है।
"मैं पाकिस्तान गया हूँ। वहाँ के लोगों में मेहमाननवाजी कूट-कूट कर भरी है।पाकिस्तान के बारे में गलत चित्र पेश किया जा रहा है कि वहाँ लोग खुश नहीं हैं। यहाँ (भारत) सरकार राजनीतिक लाभ लेने के लिए पाकिस्तान के बारे में झूठी खबरें फैला रही है।”
“मेरे पीछे कई दिनों से गुंडा तत्व लगे हुए हैं। कई बार मुझे धमकाते हैं, तो कई बार मेरी गाड़ी के आगे-पीछे गाड़ी लगाकर धमकाते हैं। कई बार तो मेरी गाड़ी के आगे-पीछे गाड़ी लगाकर डराने का प्रयास करते हैं। इन गुंडा तत्वों को टीकाराम जूली का संरक्षण प्राप्त है।”
बैंकों के विलय और विदेशी निवेशकों को राहत के बाद अब सरकार ने एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए क़दम उठाए हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि महंगाई दर नियंत्रण में है। RBI को खुदरा महंगाई दर 2% से 6% के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया गया है।
स्वामी की ‘legacy’ के आकलन में पार्टी, विचारधारा और निष्ठा को एक ही चीज़ मानकर देखने पर वे शायद ‘मौकापरस्त’, नज़र आएँगे। लेकिन किसी नेता को आंकने के पैमाने के तौर पर उसके कर्म उसके शब्दों से अधिक सटीक होते हैं और स्वामी को इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
राज ठाकरे की चुनावी राजनीति से दिलचस्पी इस कदर कम हो गई है उन्होंने पार्टी के नेताओं को सलाह दी है कि देश की इकॉनामी ठीक न होने के कारण विधानसभा चुनाव से उन सबको दूर रहना चाहिए। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में जो तर्क दिए हैं वो उनके ही पार्टी के नेताओं के गले के नीचे नहीं उतर रही।