पारा शिक्षक अपनी नौकरी स्थायी करने और वेतन में इजाफे की माँग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। शिक्षकों की माँग प्रशासन को इतना नागवार गुज़री कि कल्याणी रेलवे स्टेशन के पास भूख हड़ताल कर रहे शिक्षकों पर रात में लाठियाँ बरसाई गई।
महबूबा मुफ्ती को चश्मे शाही में रखा गया है। उनके बारे में पता चला है कि वो अपना समय किताबें पढ़कर काट रही हैं। इसके अलावा प्रशासन की ओर से उन्हें पास के मुगल गार्डन में टहलने की अनुमति मिली हुई है।
अनंत सिंह केवल अपने आपराधिक इतिहास के लिए ही चर्चित नहीं रहे हैं। उनके शौक भी अजीबोगरीब हैं। अजगर पालने की सनक को लेकर वे विवादों में रह चुके हैं। एक बार उन्होंने पटना के अपने घर में एक पत्रकार को भी बंधक बना लिया था।
जेएनयू का नाम बदलने का सुझाव पहली बार नहीं आया है। इससे पहले 2016 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि जेएनयू ऐसे लोगों का अड्डा बनती जा रही है जो देश के खिलाफ साजिश में शामिल है। उन्होंने इसका नाम बदल कर सुभाष चन्द्र बोस यूनिवर्सिटी रखने की मॉंग की थी।
प्रणब रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय को बीते दिनों मनी लॉन्ड्रिंग और ED की जाँच के कारण विदेश जाने से रोका गया था। उनके ही समर्थन में यस्मीन किदवईं ने गृह मंत्री अमित शाह को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी। रॉय दंपती मुंबई से नैरोबी के लिए उड़ान भरने वाले थे।
वामपंथी एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने सोशल मीडिया में वायरल हुए अपने लीक ईमेल में भी कपिल काक, जस्टिस शाह के बारे में बात की है। लीक मेल में जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिला विशेष दर्जा हटने के विरोध की रणनीति का ब्यौरा मौजूद है।
नरेंद्र मोदी ने 2 दिन की भूटान यात्रा पाह हैं। उन्होंने भारत की पनबिजली कंपनी के सहयोग से मध्य भूटान के ट्रोंगसा डोंग्खग जिले के मंगदेछु नदी पर 720 हजार मेगावाट की क्षमता वाली बिजली परियोजना का उद्घाटन भी किया।
अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक कोई भी आम आदमी निजी हैसियत से ICJ में केस दायर नहीं कर सकता है।
नागराज की गिनती देश के सबसे अमीर विधायकों में होती रही है। इतनी महँगी कार खरीदने वाले भी वे कर्नाटक के पहले नेता नहीं हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस से बगावत और कुमारस्वामी सरकार को डूबोने के बाद नागराज का इतनी महँगी कार खरीदना चर्चा का विषय बन गया है।
‘‘गाँधी परिवार से बाहर किसी व्यक्ति का पार्टी का नेतृत्व करना वास्तव में मुश्किल होगा। राजनीति में भी ‘ब्रांड इक्विटी’ होती है। अगर आप अभी भाजपा को देखेंगे तो क्या मोदी और शाह के बिना वह सुचारू रूप से चल सकती है? जवाब है नहीं। इसी तरह...”