"जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में जो पुरानी व्यवस्था थी उसने वंशवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। महिलाओं, बच्चों व दलितों के साथ भेदभाव हो रहा था। अनुच्छेद 370 पर हमारे निर्णय का विरोध करने वालों से मेरा सवाल यह है कि अगर ये इतना ही महत्वपूर्ण था तो इसे स्थायी क्यों नहीं बनाया गया?"
सत्य पाल मलिक ने आरोप लगाया कि अपने साथ प्रतिनिधिमंडल लाकर राहुल गाँधी मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने इससे घाटी में उपद्रव फैलने और आम लोगों के लिए दिक्कतें खड़ी होने की आशंका भी जताई।
जब सरकार जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य बनाने की कोशिश कर रही है, तो यह 'एक्टिविस्ट' घाटी की एक नकारात्मक छवि बनाने में लगे हुए हैं। इसीलिए प्रेस क्लब ने उन्हें उन रिपोर्टों की रिलीज़ के लिए ज़मीन देने से मना कर दिया, जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती।
"ये सरकार नगा अलगाववादियों से बात कर रही है, जिन्होंने सरेंडर नहीं किया है। जब एक बड़े नगा नेता का निधन हुआ, तो तिरंगे के साथ वहाँ उनका अपना झंडा था, सरकार के लोग वहाँ गए, क्या तब उन्हें 2 झंडे याद नहीं आई?"
मायावती ने पूरी बसपा की ओर से आखिर में प्रदेश की भाजपा सरकार से गुहार लगाई है कि वो इस मामले के संबंध में सपा और कॉन्ग्रेस नेताओं के ख़िलाफ़ सख्त कदम उठाएँ और आदिवासियों को उनकी जमीनें वापस दिलवाएँ।
अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले अय्यर ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के विभाजन को कॉन्ग्रेस की रणनीतिक भूल करार दिया था। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का राजनीतिक करियर ख़त्म होने के लिए भी इसी निर्णय को दोषी ठहराया था।