जिन झोपड़ियों में आग लगी, और जिनका इससे नुकसान हुआ, वो हिंदू समुदाय के थे। झोपड़ियों में आग लगने से कम से कम तीन बच्चे जिंदा जल गए। जबकि एक महिला बुरी तरह से झुलस गई।
कोरोना के मद्देनजर क्वारंटाइन किए गए लोगों के फोन नंबर एसएचओ को मुहैया कराया गया था। जिनका इस्तेमाल क्वारंटाइन किए गए लोगों की मूवमेंट जानने के लिए किया गया।
40 डॉक्टरों के अलावा अस्पताल के 30 अन्य कर्मचारी भी है जिन्हें इस मरीज के कारण क्वारंटाइन किया गया। इनमें नर्स, अभिभावक और सफाईकर्मचारी शामिल हैं। इनके सैंपल भी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- "समानो मंत्र: समिति: समानी। समानम् मनः सह चित्तम् एषाम्।" इसका अर्थ है कि हमारे विचार, हमारे संकल्प और हमारे हृदय एकजुट होने चाहिए। उन्होंने '9 बजे 9 मिनट' के तहत रविवार की रात लोगों द्वारा दिए और कैंडल जलाने की बात करते हुए इसे सफल बताया।
ये मुस्लिम भीड़ कभी स्वास्थ्यकर्मियों पर थूककर तो कभी उनके साथ मारपीट करके अपने जाहिलपने का लगातार उदहारण पेश कर रही हैं। हालत ये हो गई है कि ये लोग जिन्हें प्रशासन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने की कोशिशों में जुटा है, वे लोग उनके लिए सिरदर्दी का सबब बन गए हैं। इनके बेहूदे रवैये से इस समय न केवल अस्पताल प्रशासन बल्कि पुलिस प्रशासन भी त्रस्त है।
बालाजी मंदिर में प्रधानमंत्री के आह्वान पर रूकमानंद सैनी, मनोज सैनी, जीनकूदेवी, कैलाश, सुशीलकुमार तथा भागूराम द्वारा दीपक जलाए जा रहे थे। तभी अचानक सद्दाम, शाहरुख, जावेद, अरशद, एजाज, जाबिर ने आकर उनसे दीपक जलाने से मना किया। इस पर विवाद शुरू हो गया। जिसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया।
साकिब तंजील नाम के एक युवक ने जहीर खान की फोटो पर कमेंट करते हुए लिखा, “तुम मरकज के साथ क्यों नहीं खड़े होते हो?” साद खान जैसे कई अन्य यूजर्स ने साकिब तंजील के कमेंट का समर्थन किया। वहीं असद पठान ने कहा, “अंधभक्तों की तरह तुम भी दिया जला रहे हो।”
ये सभी लोग दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में छुपे हुए थे। लॉकडाउन के दौरान भारत में फँसे अन्य मलेशियाई नागरिकों को स्वदेश पहुँचाने के लिए मलेशियाई उच्चायोग द्वारा विशेष विमान की व्यवस्था की गई थी। इन 8 जमातियों ने इस विशेष उड़ान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की।
आँध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में स्थित रयावरम गाँव से एक पादरी हिरासत में लिया गया। पादरी पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के बीच 100 से अधिक लोगों को एक जगह इकट्ठा कर प्रार्थना करवाई। ये कार्यक्रम इसाइयों के पवित्र सप्ताह शुरू होने से पहले आयोजित किया गया।
मेडिकल टीम के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने दौड़ा दिया। गिरते-पड़ते किसी तरह टीम वहाँ से जान बचाकर भागी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उनके पास भागने के अवाला कोई और विकल्प नहीं था। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया।