भास्कर पहले शुद्ध शाकाहारी था लेकिन अपनी गर्लफ्रेंड को पाने के लिए उसने माँसाहार शुरू किया। ईसाई होने के कारण पहले वो चर्च जाता था लेकिन फिर वो दिन भर में 5 बार नमाज़ पढ़ने लगा। उसने नमाज पढ़ते हुए और इस्लामी आयतें पढ़ते हुए कई वीडियो बनाए और लड़की के परिवार वालों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें भेजे।
राहुल गाँधी की नर्वसता उस दिन साफ़ देखी गई कि, जब राहुल गाँधी दिल्ली की इकलौती अपनी जनसभा में बोल बैठे, "6 महीने बाद मोदी को देश के युवा डंडा मारेंगे।" दिल्ली में कॉन्ग्रेस की इकलौती जनसभा में दिया राहुल गाँधी का यह बयान पार्टी के गले की फाँस बन गया, जिसे लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं को सफाई तक देनी पड़ी।
दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर सिंह बग्गा को पार्टी ने हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा था। उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए अलग से मैनिफेस्टो जारी किया था, कई वादे किए थे। हालाँकि, तेजिंदर सिंह बग्गा जीत नहीं पाए। हारने के बावजूद अब वो अपना वादा व्यक्तिगत रूप से निभाएँगे।
अब फिर से पत्रकार अरविन्द केजरीवाल को पीएम मोदी के टक्कर का चेहरा बना कर पेश करेंगे। उनका महिमामंडन किया जाएगा, बावजूद इसके कि क्षेत्र और जनसंख्या के हिसाब से देखें तो दिल्ली की उनकी जीत का ये अर्थ कतई नहीं निकलता कि यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी AAP पाँव पसार ही लेगी।
दिल्ली साकेत कोर्ट ने इस मामले के 'किंगपिन' और दोषी करार दिए गए ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह प्रकरण मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की रिपोर्ट के बाद सामने आया था।
क्षमता से ज्यादा भरी हुई लकड़ी की नाव में रोहिंग्या समुदाय के लोग बांग्लादेश के तटवर्ती इलाके कॉक्स बाजार से मलेशिया की ओर जा रहे थे, तभी नाव बंगाल की खाड़ी में डूब गई। तटरक्षक बल, नौसेना के गोताखोरों और अन्य बचाव दल ने अभी तक 14 महिलाओं, एक बच्चे और एक आदमी के शव को बरामद किया।
महरौली जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) विधानसभा इलाके में आता है और राजनीतिक गलियारों के मुताबिक यहाँ लेफ्ट पार्टियों का बोलबाला रहा है। इसके बावजूद इस बार यहाँ के आँकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। यहाँ लेफ्ट पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।
वामपंथी अब सिर्फ़ JNU तक ही सीमित रह गए हैं। दिल्ली में उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं बचा। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में उनका आधार खिसक चुका है। एक केरल में वो किसी तरह टिके हुए हैं।
आज मतगणना के दिन शाहीन बाग में सन्नाटा है, जहाँ सुबह से ही प्रदर्शनकारी जुटने लगते थे, वहीं मंगलवार को शाहीन बाग पूरी तरह खाली नज़र आया, दोपहर के समय में मात्र इक्का-दुक्का लोग दिखाई दिए। क्या शाहीन बाग दिल्ली विधान सभा चुनाव स्टंट का एक हिस्सा था? अब जब उन्हें कोई हटा नहीं रहा है तो वे खुद ही शाहीन बाग छोड़ के क्यों चले गए हैं?