Wednesday, October 21, 2020
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BHU SVDV मामले में छात्रों की जीत, धरना समाप्त: डॉ फिरोज के इस्तीफे के साथ ही मीडिया गिरोह की खुली पोल

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में गैर हिन्दू (मुस्लिम शिक्षक) की नियुक्ति पर चल रहे विवाद के बीच डॉ. फिरोज खान ने SVDV से इस्तीफा दे दिया है। आधिकारिक रूप से BHU प्रशासन द्वारा डॉ. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि करते ही छात्रों ने इसे धर्म, सत्य और मालवीय मूल्यों की जीत बताया है।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म संकाय से डॉ. फिरोज खान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। जिसकी पुष्टि प्रशासन ने कर दी है। इस प्रकार धर्म, कर्मकाण्ड और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए पिछले 34 दिन से जारी छात्रों का आंदोलन समाप्त हो गया है। हालाँकि, प्रशासन ने कल ही यह संकेत दे दिया था कि BHU के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में गैर हिन्दू (मुस्लिम शिक्षक) की नियुक्ति पर चल रहे विवाद का अंत अब डॉ. फिरोज खान के हाथ में है। उनका चयन आयुर्वेद और कला संकाय के संस्कृत विभाग में हो गया है तो जल्द ही वह निर्णय लेंगे कि उन्हें कहाँ ज्वाइन करना है। इसी कड़ी में कल देर रात उन्होंने SVDV से इस्तीफा दे दिया।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने अपने सूत्रों के हवाले से पहले ही इस फैसले की सूचना दे दी थी कि सोमवार देर रात डॉ. फिरोज खान ने अपना इस्तीफा प्रशासन को सौंप दिया है और अब वे कला संकाय के संस्कृत विभाग में आज ज्वाइन करेंगे। छात्रों के इस जीत के साथ उन मीडिया गिरोहों की भी पोल खुल गई जो हर मुद्दे को हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा बना कर रोटियाँ सेकना शुरू कर देते हैं। संभवतः अब उन्हें स्पष्ट हो गया होगा कि BHU में विवाद संस्कृत भाषा को लेकर था ही नहीं मुद्दा धर्म विज्ञान से जुड़ा था और आज SVDV से इस्तीफे के साथ ही उसी BHU के कला संकाय के संस्कृत विभाग में डॉ. फिरोज खान पढ़ाएँगे जिसका यही छात्र तहे-दिल से स्वागत करेंगे।


BHU की ओर से जारी किया गया आधिकारिक पत्र

आधिकारिक रूप से BHU प्रशासन द्वारा डॉ. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि करते ही छात्र इसे अपनी जीत के रूप में नहीं बल्कि इसे धर्म और सत्य की जीत बताया है। गौरतलब है कि डॉ. फिरोज ने 29 नवंबर को आयुर्वेद और और 4 दिसंबर को कला संकाय के संस्कृत विभाग में इंटरव्यू दिया था और उनका चयन कला संकाय संस्कृत विभाग के साथ ही आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में भी हो चुका है।

कल BHU प्रशासन की तरफ से चीफ प्रॉक्टर ओपी राय छात्रों से मिलने गए थे और उन्हें फिरोज खान के चयन और उन्हें कहाँ ज्वाइन करना है ये निर्णय लेने की स्वतंत्रता के बारे में छात्रों को बताया। अब यह माना जा रहा है कि लगभग 34 दिन से चल रहे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के बीच धर्म विज्ञान संकाय में फिरोज खान के पढ़ाने को लेकर बना संशय दूर हो गया है। ऑपइंडिया शुरू से ही इस पूरे प्रकरण पर प्रामाणिक रिपोर्ट करता आ रहा है और हमने पहले ही उनके किसी अन्‍य विभाग से जुड़ने की संभावना जाहिर कर दी थी।

चीफ प्रॉक्टर ओपी राय ने छात्रों को बताया कि बीएचयू कार्यकारिणी परिषद की बैठक के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़ा नियुक्ति पत्र जल्द ही डा. फिरोज खान को दे दिया जाएगा। चूँकि, उनका चयन तीन विभागों में है तो वह अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार कोई भी विभाग चुन सकते हैं। छात्रों ने इस पर हंगामा भी किया यदि वो खुद निर्णय लेंगे तो प्रशासन ने क्या किया? जिसका चीफ प्रॉक्टर ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया लेकिन उनकी बातों से उनकी मंशा जाहिर हो गई थी कि प्रशासन चाहता है कि फिरोज खान कहीं और ज्वाइन कर लें जिससे इस मामले का अंत हो।

दूसरी तरफ कल ही छात्रों ने प्रशासन को छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न करने और माँगे नहीं माने जाने पर आमरण अनशन का संकल्प व्यक्त किया था। जिस पर प्रशासन ने छात्रों से धैर्य बनाए रखने की अपील की थी।छात्रों के विरोध को देखते हुए आज 10 दिसंबर से होने वाली परीक्षा भी टाल दी गई थी। और प्रशासन ने जल्द समाधान के आश्वासन के साथ ही गेंद फिरोज खान के पाले में डाल दिया था। इसके बाद से ही उम्मीद जताई जा रही थी कि 9 दिसंबर को उन्हें नियुक्ति पत्र मिल जाएगा और वह तीनों विकल्प में से अपनी पसंद के स्थान को चुन सकते हैं।

हालाँकि, कल 9 दिसंबर को फिरोज खान को नियुक्ति पत्र मिला या नहीं इसकी भी प्रशासन ने आधिकारिक सूचना अभी नहीं दी है लेकिन ऑपइंडिया सूत्रों का कहना है कि कल BHU कोर्ट की बैठक थी और संभवतः वहीं इस प्रकरण के इस तरह से समाधान की रूपरेखा बनी। क्योंकि प्रशासन ने बेशक फिरोज खान को चयनित किसी भी विभाग में ज्वाइन करने के लिए एक महीने का समय दिया था लेकिन जब तक इस प्रकरण का निराकरण नहीं होता छात्र कक्षा और परीक्षा के बहिष्कार पर हर-संभव अटल रहने का संकल्प जाहिर कर चुके थे। ऐसे में धरना लम्बा चलने से प्रशासन की और किरकिरी तय थी।

ऑपइंडिया सूत्रों के मुताबिक डा. फिरोज आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में नहीं जाना चाहते थे। ऐसे में उनके पास विचार करने के लिए सिर्फ दो ही विकल्प बचे थे। पहला एसवीडीवी, जहाँ छात्र उनके विरोध में एक माह से अधिक समय से आंदोलन, धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। दूसरा बीएचयू में ही कला संकाय का संस्कृत विभाग जहाँ उनके चयन की जानकारी प्रशासन द्वारा प्रामाणिक रूप से नहीं बल्कि बातचीत में छात्रों को दिया गया था।

इस प्रकार, BHU में अब डा. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि और उनके संस्कृत विभाग को ज्वाइन करने की खबर के बाद इस संपूर्ण प्रकरण का पटाक्षेप हो गया है। छात्रों ने इसे लेकर ख़ुशी जाहिर की है। आधिकारिक रूप से BHU प्रशासन द्वारा डॉ. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि करते ही छात्रों ने इसे धर्म, सत्य और मालवीय मूल्यों की जीत बताया है।

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