समंदर में तैरते लग्जरी क्रूज लंबे समय से लोगों के लिए शाही छुट्टियों का प्रतीक रहे हैं। आलीशान कमरे, फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएँ, दुनियाभर के व्यंजन, कसीनो, थिएटर और कई देशों की यात्रा का अनुभव इन्हें खास बनाता है। अब यही लग्जरी क्रूज जहाज एक नई चिंता की वजह बन रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई क्रूज जहाजों पर संक्रामक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं जिसके चलते इन्हें संक्रमण फैलने के बड़े केंद्रों के रूप में देखा जाने लगा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान डायमंड प्रिंसेस की भयावह तस्वीरों ने दुनिया को पहली बार दिखाया था कि अगर किसी वायरस ने जहाज में एंट्री कर ली, तो हजारों लोगों के बीच उसे रोकना कितना मुश्किल हो जाता है। अब एक बार फिर दुनिया की नजरें क्रूज शिप पर फैले नोरोवायरस और हंतावायरस के मामलों पर टिक गई हैं। कुछ दिनों पहले ‘MV होंडियस‘ नाम के एक आलीशान जहाज पर हंतावायरस के मामले सामने आए थे।
अब कैरिबियन प्रिंसेस जहाज पर 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर नोरोवायरस से बीमार पड़ गए। उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द जैसी शिकायतों ने पूरे जहाज को प्रभावित कर दिया। इससे पहले भी कई क्रूज जहाजों पर इसी वायरस ने सैकड़ों लोगों को संक्रमित किया है।
सवाल यह है कि आखिर नोरोवायरस इतना खतरनाक क्यों माना जाता है? और क्यों दुनिया की सबसे महँगी और हाईटेक क्रूज इंडस्ट्री भी इसे पूरी तरह रोक नहीं पा रही?
क्या है नोरोवायरस और क्यों माना जाता है इतना खतरनाक?
नोरोवायरस एक बेहद संक्रामक वायरस है जो पेट और आंतों को संक्रमित करता है। इसे आम भाषा में ‘स्टमक फ्लू’ या ‘वॉमिटिंग वायरस’ भी कहा जाता है, हालाँकि यह फ्लू वायरस नहीं होता। यह वायरस इंसान के पाचन तंत्र पर हमला करता है और कुछ ही घंटों में व्यक्ति को गंभीर रूप से बीमार बना सकता है।
संक्रमित व्यक्ति को अचानक उल्टी, पानी जैसे दस्त, पेट में ऐंठन, मतली, बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसी समस्याएँ शुरू हो जाती हैं। कई मामलों में शरीर में पानी की भारी कमी यानी डिहाइड्रेशन भी हो जाता है, जो बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
नोरोवायरस की सबसे बड़ी खतरनाक बात इसकी संक्रमण फैलाने की क्षमता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक किसी व्यक्ति को बीमार करने के लिए वायरस के बहुत कम कण ही काफी होते हैं। यानी अगर किसी संक्रमित व्यक्ति ने किसी सतह को छू लिया और दूसरे व्यक्ति ने वही सतह छूकर खाना खा लिया तो संक्रमण फैल सकता है।
वायरस का केंद्र कैसे बन रहे क्रूज शिप?
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स क्रूज शिप को ‘सेमी-एनक्लोज्ड इकोसिस्टम’ कहते हैं। मतलब हजारों लोग लंबे समय तक एक सीमित जगह में एक साथ रहते हैं। आधुनिक मेगा क्रूज जहाजों पर 6 हजार से ज्यादा यात्री और करीब 2 हजार क्रू मेंबर मौजूद होते हैं। यह तैरते हुए छोटे शहर जैसा होता है लेकिन फर्क इतना है कि यहाँ सोशल डिस्टेंसिंग लगभग नामुमकिन होती है।
यात्री एक ही लिफ्ट, डाइनिंग हॉल, थिएटर, स्विमिंग पूल, कसीनो और रेलिंग का इस्तेमाल करते हैं। बार-बार छुई जाने वाली सतहें वायरस फैलाने का सबसे बड़ा जरिया बन जाती हैं। नोरोवायरस कई दिनों तक सतहों पर जिंदा रह सकता है। ऐसे में अगर एक भी संक्रमित व्यक्ति जहाज पर मौजूद हो, तो कुछ ही घंटों में वायरस सैकड़ों लोगों तक पहुँच सकता है।
क्रूज जहाजों का डाइनिंग सिस्टम भी संक्रमण फैलाने में बड़ी भूमिका निभाता है। बुफे सिस्टम में एक ही सर्विंग स्पून और ड्रिंक स्टेशन का इस्तेमाल सैकड़ों लोग करते हैं। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति खाने के आसपास पहुँच जाए, तो वायरस तेजी से फैल सकता है। यही वजह है कि क्रूज शिप पर फैलने वाले ज्यादातर संक्रमण खाने और साझा सतहों से जुड़े होते हैं।
नोरोवायरस कैसे फैलता है और इसे रोकना इतना मुश्किल क्यों?
नोरोवायरस मुख्य रूप से संक्रमित भोजन, पानी, सतहों और व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क के जरिए फैलता है। यह वायरस इतना जिद्दी होता है कि सामान्य सफाई से भी कई बार पूरी तरह खत्म नहीं होता। कई कीटाणुनाशक उत्पाद भी इस पर उतना असर नहीं दिखाते जितना दूसरे वायरस पर दिखता है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संक्रमित व्यक्ति लक्षण दिखने से पहले ही वायरस फैलाना शुरू कर देता है। यानी कोई यात्री खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करते हुए जहाज पर चढ़ सकता है और अगले 24 घंटे में सैकड़ों लोगों के संपर्क में आ सकता है। यही वजह है कि बोर्डिंग के समय की हेल्थ स्क्रीनिंग अक्सर बेअसर साबित होती है।
क्रू मेंबर्स का रोल भी बेहद अहम होता है। जहाज के कर्मचारी छोटे और भीड़भाड़ वाले कमरों में रहते हैं और दिनभर यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। कोई कर्मचारी बीमार होने के बावजूद काम करता रहे, तो वह सुपर-स्प्रेडर बन सकता है। कई बार नौकरी खोने या आइसोलेशन के डर से कर्मचारी तुरंत बीमारी रिपोर्ट नहीं करते, जिससे संक्रमण और तेजी से फैलता है।
क्रूज इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द क्यों बन चुका है नोरोवायरस?
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC के मुताबिक, हर साल हजारों लोग क्रूज जहाजों पर नोरोवायरस से संक्रमित होते हैं। पिछले साल 18 अलग-अलग क्रूज आउटब्रेक में 2200 से ज्यादा लोग बीमार पड़े थे। इस साल भी कई बड़े जहाज इसकी चपेट में आ चुके हैं। हाल ही में कैरिबियन प्रिंसेस जहाज पर 102 यात्री और 13 क्रू मेंबर संक्रमित पाए गए।
इससे पहले स्टार प्रिंसेस जहाज पर भी करीब 200 लोग बीमार पड़े थे। हर बार कंपनियाँ जहाज को सैनिटाइज करने और सफाई बढ़ाने का दावा करती हैं, लेकिन इसके बावजूद वायरस लौट आता है। इसके पीछे एक बड़ा कारण ‘टर्नओवर टाइम’ है। एक क्रूज खत्म होने और दूसरे के शुरू होने के बीच सिर्फ कुछ घंटों का अंतर होता है।
इतने कम समय में हजारों यात्रियों को उतारना, पूरे जहाज की डीप क्लीनिंग करना मुश्किल है। कहीं थोड़ी भी लापरवाही रह जाए, तो वायरस अगले सफर में फिर सक्रिय हो सकता है।
कोविड-19 के बाद क्या बदला और फिर भी खतरा क्यों बना हुआ है?
कोविड महामारी ने क्रूज इंडस्ट्री को पूरी तरह हिला दिया था। डायमंड प्रिंसेस जहाज पर 700 से ज्यादा लोगों का संक्रमित होना दुनिया के लिए चेतावनी बन गया। इसके बाद एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम, मेडिकल प्रोटोकॉल और सैनिटाइजेशन प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव किए गए।
अब कई जहाजों में HEPA फिल्टर लगाए गए हैं, मेडिकल टीम को मजबूत किया गया है और सफाई के नियम सख्त किए गए हैं। CDC का वेसल सेनिटेशन प्रोग्राम (Vessel Sanitation Program) जहाजों का नियमित निरीक्षण भी करता है। लेकिन इसके बावजूद वायरस का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
एक कारण यह भी है कि जहाज की मूल बनावट को बदलना आसान नहीं है। हजारों लोगों के लिए बने बंद गलियारे, साझा वेंटिलेशन और कॉमन एरिया अब भी संक्रमण फैलाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करते हैं। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि क्रूज शिप पर संक्रमण का खतरा पूरी तरह खत्म करना लगभग असंभव है।
यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अब यात्रियों को सिर्फ क्रूज कंपनियों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। खुद की सावधानी सबसे बड़ा बचाव है। सफर के दौरान बार-बार हाथ धोना, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना और बिना हाथ साफ किए खाना खाने से बचना बेहद जरूरी है। जहाज पर किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल टीम को जानकारी देनी चाहिए।
बुफे सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले साझा बर्तनों को छूने के बाद हाथ साफ करना भी जरूरी है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को क्रूज यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। अंटार्कटिका जैसे दूरदराज इलाकों की यात्रा करने वालों के लिए खतरा और भी ज्यादा होता है, क्योंकि वहाँ आसपास बड़े अस्पताल मौजूद नहीं होते।
क्या भविष्य में और बढ़ेगा खतरा?
क्रूज टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है। खासकर अंटार्कटिका और दूरदराज के इलाकों की यात्राओं का ट्रेंड पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ा है। लाखों लोग हर साल इन जहाजों पर सफर कर रहे हैं। लेकिन जितनी तेजी से यह इंडस्ट्री बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में सिर्फ नोरोवायरस ही नहीं बल्कि खसरा, लीजियोनेयर्स रोग, ई कोलाई और दूसरे संक्रामक रोग भी क्रूज इंडस्ट्री के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। ऐसे में कंपनियों को सिर्फ लग्जरी और मनोरंजन पर नहीं, बल्कि हेल्थ सिक्योरिटी और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी भारी निवेश करना होगा।


