भारत में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसे देखते हुए अब सरकार ने Android यूजर्स को निशाना बनाने वाले एक बड़े फ्रॉड नेटवर्क पर कड़ा शिकंजा कसा है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने ‘Wingo’ नाम की संदिग्ध Android ऐप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
यह ऐप लोगों को जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर फँसाता था और फिर उनके मोबाइल फोन का गलत इस्तेमाल करते हुए उनकी जानकारी के बिना फर्जी SMS भेजने जैसी गतिविधियों में शामिल था। सरकार ने इसके सर्वर, टेलीग्राम चैनलों और यूट्यूब प्रचार को ब्लॉक कर इस पूरे नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है।
Wingo ऐप पर सरकार की डिजिटल स्ट्राइक और बड़ा बैन
Wingo ऐप के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद गृह मंत्रालय के साइबर विंग ने जाँच शुरू की। जाँच में यह सामने आया कि यह ऐप एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा है। इसके बाद सरकार ने इसके कमांड एंड कंट्रोल सर्वर को पूरी तरह जियो-ब्लॉक कर दिया, जिससे इसका संचालन बंद हो सके।
साथ ही Wingo से जुड़े चार बड़े टेलीग्राम चैनलों को भी ब्लॉक कर दिया गया, जिनसे करीब 1.53 लाख यूजर्स जुड़े हुए थे। इसके अलावा, यूट्यूब पर मौजूद 53 से ज्यादा वीडियो भी हटाए गए जो इस ऐप का प्रचार कर रहे थे या इसे डाउनलोड करने का तरीका बता रहे थे।
सरकार ने Android यूजर्स के लिए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि वे अनजान और गैर-आधिकारिक ऐप्स से सतर्क रहें।
क्या था Wingo ऐप और कैसे फैलाया जा रहा था ‘क्विक मनी’ का जाल?
जाँच में सामने आया कि Wingo ऐप लोगों को आसान कमाई और जल्दी रिटर्न का झाँसा देकर फँसाता था। यूजर्स को कहा जाता था कि वे छोटे-छोटे टास्क पूरे करें या निवेश करें और बदले में मोटा मुनाफा कमाएँ। शुरुआत में मामूली पैसे देकर भरोसा बनाया जाता था ताकि लोग इसे असली कमाई का जरिया समझ लें।
इसके बाद यूजर्स से पैसे जमा करवाए जाते थे और फिर अचानक ऐप बंद हो जाता था या यूजर अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता था। यह स्कीम रेफरल बेस्ड पोंजी मॉडल की तरह काम कर रही थी, जिसमें लोगों को दूसरों को जोड़ने के लिए भी प्रेरित किया जाता था।
यूजर्स के फोन से चोरी-छिपे भेजे जा रहे थे फर्जी SMS और डेटा चोरी का खतरा
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि Wingo ऐप यूजर की जानकारी के बिना उसके मोबाइल नंबर से रोजाना 80 से 100 संदिग्ध SMS भेज रहा था। इन संदेशों का इस्तेमाल स्कैम मैसेज, फिशिंग लिंक और अन्य साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, यह ऐप ‘Telecom Mule as a Service’ प्लेटफॉर्म की तरह काम कर रहा था, जिसमें आम नागरिकों के मोबाइल नंबर और डिजिटल पहचान का गलत इस्तेमाल करके असली अपराधी कानून की पकड़ से बच रहे थे। इसके लिए ऐप कॉन्टैक्ट्स, गैलरी, लोकेशन और SMS जैसी संवेदनशील परमिशन माँगता था, जिससे निजी डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ गया था।
Telegram-YouTube के जरिए स्कैम का प्रचार और 1.53 लाख यूजर्स का नेटवर्क
सरकारी एजेंसियों ने पाया कि यह फ्रॉड नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए बड़े स्तर पर फैलाया जा रहा था। टेलीग्राम पर बने चार बड़े चैनलों के माध्यम से इस ऐप को प्रमोट किया जा रहा था और दावा किया जा रहा था कि इससे जुड़े यूजर्स की संख्या एक लाख से ज्यादा है।
इन चैनलों के जरिए लोगों को ऐप डाउनलोड करने के निर्देश दिए जाते थे, जल्दी कमाई के दावे किए जाते थे और रेफरल के जरिए दूसरों को जोड़ने का लालच दिया जाता था। इसके अलावा यूट्यूब पर 53 से ज्यादा वीडियो मौजूद थे जो इस ऐप का प्रचार कर रहे थे। सरकार ने इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई करते हुए चैनल ब्लॉक और वीडियो हटाने के निर्देश दिए।
Android स्कैम क्या है और पहले भी क्यों लग चुके हैं ऐसे ऐप्स पर बैन?
Android स्कैम दरअसल वह धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी यूजर्स को नकली ऐप डाउनलोड करवाकर उनके फोन का कंट्रोल हासिल कर लेते हैं। ये ऐप्स अक्सर गारंटीड मुनाफा, डेली प्रॉफिट या जल्दी पैसा कमाने का दावा करते हैं।
एक बार इंस्टॉल होने के बाद ये ऐप्स फोन की परमिशन लेकर डेटा चोरी, फर्जी ट्रांजैक्शन और साइबर अपराधों को अंजाम देते हैं। भारत में इससे पहले भी कई फर्जी लोन ऐप्स, निवेश स्कीम ऐप्स और रेफरल बेस्ड फ्रॉड प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हो चुकी है। Wingo ऐप भी उसी तरह का एक नया और बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
यूजर्स को सरकार की सख्त सलाह
सरकार ने साफ कहा है कि यूजर्स केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें और अनावश्यक परमिशन देने से बचें। ऐसी ऐप्स से दूर रहें जो गारंटीड या डेली प्रॉफिट का दावा करती हैं। किसी भी अनजान UPI ID या QR कोड पर पैसे भेजने से बचें और कभी भी OTP या बैंक डिटेल्स शेयर न करें।
अगर किसी को शक हो कि वह ठगी का शिकार हुआ है तो तुरंत संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल करें, साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। सरकार की इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ डिजिटल स्तर पर सख्ती लगातार जारी रहेगी।


