इस बार सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुई है। कथिततौर पर यह विक्रमादित्य सहाय की ही है, जिसमें वो खाप पंचायत के खिलाफ बोलता सुनाई पड़ रहा है। दावा है कि स्प्रिंग 2026 क्लास में Consent मुद्दे पर पढ़ाते हुए वह छात्रों से कहता है- “तुम जानते हो तुम्हारे कॉलेज का चांसलर और सांसद जिंदल खाप पंचायतों को आधिकारिक रूप से सपोर्ट करता है।” यहाँ ये पढ़ाते हुए वह जोर देता है- “वही खाप पंचायतें जो ऑनर किलिंग कराती हैं।”
Professor at the Law School, O.P. Jindal Global University, Sonipat claims that Member of Parliament and Chancellor of the University Sh. Naveen Jindal supports honor killings and Khaap Panchayats in Haryana, says "that's why I am teaching you f***ing consent pic.twitter.com/JRVNKzPTFm
— Satakshi kanyal (@satakshi_kanyal) May 6, 2026
यह आडियो अब वायरल है। सामने आ रहा है कि खाप पंचायत इससे भड़की हुई हैं और साथ में वो छात्र भी जिन्हें समझ आ चुका है कि कैसे ये टीचर क्लासरूम में शिक्षा के नाम पर बच्चों के दिमाग में जहर भर रहा था।
सहाय से जुड़ी विवादित ऑडियो वायरल होने के बाद जब हमने इसे बैकग्राउंड को खंगाला तो पता चला कि ये यह केवल अकेला मामला नहीं है जिसके कारण विक्रमादित्य सहाय की ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर सवाल खड़े हुए।
इससे पहले उसके कई ऐसे बयान सामने आए हैं जिसे देखते हुए लोग पूछ रहे हैं कि आखिर भारत विरोधी-हिंदू विरोधी मानसिकता वाले शख्स किस बिनाह पर शिक्षा संस्थानों में पढ़ाने के लिए चुन लिए जाते हैं?
कौन है विक्रमादित्य सहाय?
‘सेंटर फॉर जस्टिस लॉ एंड सोसायटी’ पर साझा की गई विक्रमादित्य सहाय की प्रोफाइल के अनुसार, वह इस समय जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत है। इससे पहले उसने दिल्ली की अंबेडकर यूनिवर्सिटी में जहाँ साहित्य, विकास अध्ययन और जेंडर स्टडीज़ जैसे विषयों पर पढ़ाया है।
इसके अलावा बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी रिसर्च’ में में सीनियर रिसर्च एसोसिएट के तौर पर काम किया है। वहीं मुंबई के TISS में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर एक प्रोजेक्ट में कंसल्टेंट भी रहा है। शिक्षा को लेकर उसकी प्रोफाइल में जानकारी है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में पोस्टग्रेजुएट है।
अकादमिक प्रोफाइल जहाँ बताती है कि विक्रमादित्य सहाय की रुचि समाज, कानून, और जेंडर से जुड़े मुद्दों को समझने में है। वहीं अगर सोशल मीडिया फुटप्रिंट्स देखेंगे तो आपको समझ आएगा कि कैसे ट्रांसजेंड एक्टिविज्म के नाम पर विक्रमादित्य सहाय अलग ही नैरेटिव और प्रोपगेंडे को बढ़ाने में जुटा हुआ है।
प्रोफेसर की डिजिटल पहचान और इंस्टा ID पर अधनंगी तस्वीरों की भरमार
उसकी इंटाग्राम आईडी- Vqueer नाम से है। आईडी में 400+ पोस्ट डाले गए हैं। अकॉउंट खंगालने पर पता चलता है कि कैसे उसने ट्रांसजेंडर आइडेंटिटी और उनकी आजादी के नाम पर अश्लील तस्वीरों की झड़ी लगा रखी है। किसी तस्वीर में अर्धनग्न अवस्था में लेटा है तो किसी में उसने बिकनी तक शरीर पर नहीं पहनी है। यहाँ तक प्रोफाइल फोटो में भी जिंदल ग्लोबल स्कूल के प्रोफेसर ने बिकनी पहनी फोटो को लगा रखा है।
नैतिकता के आधार पर शायद ऐसी हरकत अगर कोई सामान्य टीचर करता तो शायद उससे सवाल पूछे जाते, उनकी हरकतों के लिए उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जाता, लेकिन यहाँ विक्रमादित्य सहाय की सारी अश्लीलता ‘ट्रांसजेंडर एक्टिविज्म’ के नाम पर गिनकर माफ की जा रही हैं।

चिंताजनक बात यह है कि विक्रमादित्य के डिजिटल फुटप्रिंट को अगर निजी जीवन कहकर एक बार को नकार भी दिया जाए तो भी ये देखना जरूर चाहिए कि कैसे ये अपनी अधनंगी तस्वीरों के साथ लिखे गए कैप्शन में अपने भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा दे रहा है। इंस्टा पोस्ट के कैप्शन में इसने कश्मीर (में अलगाववाद), बस्तर ( में नक्सलवाद), फिलीस्तीन (में हमास के आतंकवाद) को प्रमोट किया हुआ है।

वहीं क्लासरूम की बात दोबारा करें तो सामने आई ऑडियो से पता चलता है कि कैसे इसे हिंदुओं के आस्था वाली जगहों से घृणा आती है, राम मंदिर पर सवाल का जवाब देने से परहेज करता है, मगर जब मजहबी विचार का प्रचार करना होता है तो खुलकर क्लास में ‘इंशाल्लाह’ बोलता है।
विक्रमादित्य सहाय के पुराने बयान
गौरतलब हो कि विक्रमादित्य सहाय का वर्तमान विवाद कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह उनके पुराने विवादित दृष्टिकोण का ही विस्तार नजर आता है।
आपको याद है क्या 2021 में NCERT द्वारा जेंडर और ट्रांसजेंडर विषय पर शिक्षकों के लिए जारी किया गया विवादित मैनुएल। 115 पेज के मैनुअल में सवाल ये खड़े किए गए थे कि आखिर स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग टॉयलेट क्यों होते हैं?
तर्क था कि इस प्रैक्टिस के चलते लिंग भेदभाव बढ़ता है। मैनुअल सामने आने के बाद विवाद बढ़ा तो इससे बनाने वालों के बारे में जाँच हुई। सामने आया कि ऐसी हरकत करने वाली टीम में विक्रमादित्य सहाय भी हिस्सा था। उस समय भी इसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर कई सवाल उठे थे और इसकी हरकतों को लेकर ध्यान दिलाया गया था।
NCERT साइट से हटा ‘लड़का-लड़की का टॉयलेट अलग क्यों’ वाला मैनुएल, अब जानिए इस ‘ज्ञान’ के पीछे कौन#NCERT https://t.co/kJWrkk9Zb3
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) November 2, 2021
इसी तरह, इसकी एक पुरानी ऑडियो अगर सुनेंगे तो उससे साफ होगा कि कैसे अपने आपको बुद्धिजीवी मानकर बैठा विक्रमादित्य सहाय अपनी ट्रांस आईडी का फायदा उठाकर कैमरे तक पर कहता है कि भारत का होना या हिंदू होना कोई बड़ी बात नहीं है जिसे दोहराया जाए।
वीडियो में समझाता है है- आपको हिंदू कहने में, अपने आपको भारतीय कहने में या फिर अपने आपको आदमी कहने में कोई गर्व करने वाली बात नहीं होनी चाहिए। उसके मुताबिक अगर आप खुद को आदमी कहते हो तो महिलाओं पर अत्याचार करोगे, हिंदू कहते हो तो दलितों पर अत्याचार करोगे या फिर मुस्लिमों और ईसाइयों पर, अगर खुद को भारतीय कहते हो आप उस हर भूमि पर अपना राज चलाओगे जिसे आपने कब्जा किया होगा।
Vikramaditya Sahai suggested in 2017 that there is nothing nice about being a Hindu or an Indian. She also said that India occupies territories.
— Sensei Kraken Zero (@YearOfTheKraken) December 9, 2025
Now, the Jindal Global Law School (JGLS) has hired this person as the Clinical Assistant Professor of Law and CJLS.
As per my… pic.twitter.com/ArlrnQCE1U
ट्रांस आइडेंटी का फायदा और अर्बन नक्सल विचारधारा
आमतौर पर ऐसे चेहरे ‘ट्रांसजेंडर राइट्स’ और ‘समानता’ के नाम पर जगह बनाते हैं, फिर उसका इस्तेमाल अर्बन नक्सल विचारधारा को फैलाने के लिए करने लगते हैं। विक्रमादित्य सहाय भी यही कर रहे हैं। एक्टिविस्ट का मुखौटा पहनकर भारत और हिंदू घृणा को फैलाने का काम कर रहे हैं।
इस मामले के चर्चा में आने के बाद आज हमारे लिए सबसे चिंताजनक बात यह होनी चाहिए है कि ये लोग अपने एजेंडे को फैलाने के लिए ‘क्लासरूम’ जैसी जगहों को चुन रहे हैं। क्लासरूम वह जगह है जहाँ भविष्य के राष्ट्र निर्माता तैयार होते हैं। यदि शिक्षा के मंच से ही छात्रों के मन में अपनी सभ्यता, राष्ट्र और संस्कृति के प्रति जहर भरा जाएगा, तो ये ‘बौद्धिक नक्सली’ बंदूकधारी आतंकवादियों से भी अधिक घातक सिद्ध होंगे।
शिक्षण संस्थानों को ट्रांसजेंडर को मौका देने के नाम पर नियुक्ति करने से पहले ऐसे लोगों की मानसिकता और पिछले रिकॉर्ड की समीक्षा करनी चाहिए। यदि जिंदल यूनिवर्सिटी ने ऐसा नहीं किया है तो उन्हें भी इस पर गौर करना चाहिए। इनके साथ नरमी का मतलब है कैंपस में अर्बन नक्सलिज्म को संरक्षण देना।


