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दुनिया पर छाया भोजन का संकट, 140+ करोड़ भारतीयों का पेट भरने के लिए क्या कदम उठा रही मोदी सरकार: जानिए सब कुछ

खाद्य सुरक्षा को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए केवल गेहूँ और चावल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसीलिए भारत सरकार ने दलहन और तिलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।

वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन, गहराते भू-राजनीतिक युद्धों और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के टूटने के कारण दुनिया के सामने एक गंभीर खाद्यान्न संकट (Food Supply Crisis) का खतरा मंडरा रहा है। Chapter1Mag की इस स्पेशल सीरीज के पहले 2 पार्ट्स में हमने पढ़ा कि भारत ने किस तरह मजबूत ‘फर्टिलाइजर डिप्लोमेसी’ (उर्वरक कूटनीति) के जरिए अंतरराष्ट्रीय उर्वरक संकट का सामना किया और 2026 के रबी सीजन के लिए खाद, बीज और सिंचाई की त्रिस्तरीय तैयारी की है। अब इस सीरीज के तीसरे और अंतिम भाग में इस बात का बारीकी से मूल्यांकन किया गया है कि क्या दुनिया भर में गहरा रहे इस खाद्य संकट के बीच भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली (Food Security System) पर्याप्त रूप से मजबूत है और भारत इस झटके को सहने के लिए कितना तैयार है।

संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक खाद्य संगठनों की चेतावनियों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, लाल सागर (Bab-al-Mandeb) मार्ग में जहाजों पर हमले, रूस-यूक्रेन संघर्ष और अल-नीनो व जलवायु अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक कृषि व्यापार में भारी व्यवधान आ चुका है। दुनिया के कई देश खाद्यान्न की कमी और बेकाबू खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) का सामना कर रहे हैं। भारत जैसे 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले विशाल देश के लिए यह स्थिति न केवल कृषि सुरक्षा का बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता का भी विषय बन जाती है। ऐसे में भारत की वर्तमान तैयारी और बफर स्टॉक की स्थिति को समझना बेहद जरूरी है।

भारत की खाद्य सुरक्षा का सबसे मजबूत ढाँचा देश का राष्ट्रीय खाद्यान्न भंडार (Buffer Stock) और भारतीय खाद्य निगम (FCI) की प्रबंधन प्रणाली है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत में गेहूँ और चावल का कुल स्टॉक तय न्यूनतम बफर मापदंडों (Buffer Norms) से काफी ऊपर बना हुआ है। भारत के पास वर्तमान में लगभग 550 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद्यान्न का सुरक्षित भंडार मौजूद है। इसमें चावल का स्टॉक तय सीमा से लगभग दोगुना है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति या मानसूनी असफलता के समय देश की आबादी को भुखमरी से बचाने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

खाद्य सुरक्षा को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए केवल गेहूँ और चावल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसीलिए भारत सरकार ने दलहन (Pulses) और तिलहन (Oilseeds) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। भारत अपनी खाद्य तेलों (Edible Oils) की जरूरत का लगभग 50% से 55% हिस्सा आयात करता है, जो वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशील है। इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय खाद्य तेल-पाम ऑयल मिशन और पीली क्रांति (Yellow Revolution 2.0) के तहत घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही चना, अरहर और उड़द के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि करके किसानों को दलहन उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

तीसरा बड़ा पहलू है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत लगभग 80 करोड़ नागरिकों को मिलने वाला मुफ्त खाद्यान्न। वैश्विक बाजार में जब अनाज के दाम आसमान छू रहे हों, तब यह योजना देश के निम्न-आय वर्ग को महँगाई की मार से बचाती है। इसके अलावा भारत ने समय-समय पर घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए गैर-बासमती चावल और गेहूँ के निर्यात पर रणनीतिक प्रतिबंध (Export Restrictions) लगाए हैं। हालाँकि इन फैसलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई, लेकिन भारत सरकार का रुख साफ रहा है कि घरेलू नागरिकों की खाद्य सुरक्षा उसकी पहली प्राथमिकता है।

यह स्पेशल रिपोर्ट कुछ गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचती है। भारत में खाद्यान्नों के भंडारण (Storage Capacity) में आधुनिक साइलो (Modern Silos) और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण हर साल हजारों टन अनाज खराब हो जाता है। साथ ही भूजल के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक पड़ने वाली अत्यधिक गर्मी या बेमौसम बारिश से फसलों को होने वाला नुकसान एक सतत चिंता का विषय है। भारत को यदि वैश्विक संकटों के बीच पूरी तरह निश्चिंत रहना है, तो उसे आधुनिक भंडारण तकनीक और जलवायु-सहनशील कृषि प्रणाली को और तेजी से अपनाना होगा।

बहरहाल, Chapter1Mag का विश्लेषण यही दर्शाता है कि वैश्विक खाद्य संकट के काले बादलों के बावजूद भारत की स्थिति दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी मजबूत और सुरक्षित है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘फर्टिलाइजर डिप्लोमेसी‘, रबी सीजन की मजबूत जमीनी तैयारी और विशाल अन्न भंडार के संयोजन ने भारत को वैश्विक खाद्य संकट के मुहाने पर एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में खड़ा किया है।

Chapter1Mag की यह पूरी सीरीज पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें:

Part-I: How India’s ‘Fertiliser Diplomacy’ safeguarded food security amid global crisis

Part-II: Fertiliser, irrigation and seeds: India braces for the 2026 Rabi season amid critical challenges

Part-III: A food supply crisis looms over the world: How prepared is India?

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working.

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