Wednesday, July 17, 2024
Homeदेश-समाजज़ुबैर की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यूपी में दर्ज...

ज़ुबैर की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यूपी में दर्ज 6 FIR रद्द कराने पहुँचा था: बोली वकील- एक में बेल मिलते दूसरे में हो जाता है गिरफ्तार

मोहम्मद ज़ुबैर मामले में एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि एक में जमानत मिलते ही उन्हें दूसरे में गिरफ्तार कर लिया जाता है।

ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश में में दायर 6 एफआईआर को रद्द करने की अपील की है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वह उस बेंच से तारीख माँगे जो पहले से ही इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, CJI एनवी रमना ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा दायर याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई 6 प्राथमिकी को रद्द करने के लिए निर्देश देने की माँग की गई है। वहीं एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि एक में जमानत मिलते ही उन्हें दूसरे में गिरफ्तार कर लिया जाता है।

पीठ ने वकील से कहा है कि वह मामले को उस पीठ के समक्ष रखें जहाँ इसी तरह के अन्य मामले सूचीबद्ध हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह के केस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई कर रही है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी थी। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की थी। इससे पहले जुबैर को यूपी के सीतापुर मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। कोर्ट ने कहा था, “यह जमानत सशर्त दी जा रही है, याचिकाकर्ता कोई भी ट्वीट नहीं करेगा और ना ही दिल्ली छोड़ेगा। बाकी की अन्य शर्तें सीतापुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तय करेगा।” हालाँकि इसके बाद भी मोहम्मद ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि उन पर यूपी में कई मामलों में केस दर्ज है।

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने एक पुराने ट्वीट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया था, उनपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप था। वहीं जुबैर के खिलाफ यूपी में 6 एफआईआर दर्ज हैं। दो केस हाथरस, एक-एक केस गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में दर्ज किया गया है।

वहीं लखीमपुर खीरी मामले में कोर्ट ने शनिवार (16 जुलाई, 2022) को जुबैर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उनके खिलाफ 18 सितंबर 2021 में केस दर्ज किया गया था। जुबैर के खिलाफ यह केस सुदर्शन न्यूज चैनल को लेकर फैक्ट चेक ट्वीट को लेकर किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जुबैर ने लोगों को सुदर्शन चैनल के वीडियो के जरिए गुमराह करने की कोशिश की है। इस मामले में जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

जबकि हाथरस पुलिस ने पिछले हफ्ते जुबैर की रिमांड के लिए चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर की थी। दिल्ली कोर्ट ने जुबैर से कहा है कि वह इस मामले में पूछताछ के लिए पेश हो, जब उनसे पेश होने के लिए कहा जाए, साथ ही वह बिना इजाजत दिल्ली छोड़कर बाहर ना जाए। कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपित से हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है, लिहाजा आरोपित को जमानत दी जाती है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 के तहत केस दर्ज किया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अमेरिकी राजनीति में नहीं थम रहा नस्लवाद और हिंदू घृणा: विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड के बाद अब ऊषा चिलुकुरी बनीं नई शिकार

अमेरिका में भारतीय मूल के हिंदू नेताओं को निशाना बनाया जाना कोई नई बात नहीं है। निक्की हेली, विवेक रामास्वामी, तुलसी गबार्ड जैसे मशहूर लोग हिंदूफोबिया झेल चुके हैं।

आज भी फैसले की प्रतीक्षा में कन्हैयालाल का परिवार, नूपुर शर्मा पर भी खतरा; पर ‘सर तन से जुदा’ की नारेबाजी वाले हो गए...

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि गौहर चिश्ती 17 जून 2022 को उदयपुर भी गया था। वहाँ उसने 'सर कलम करने' के नारे लगवाए थे।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -