Homeदेश-समाजअब बिहार में काॅलगर्ल के लिए संपर्क का चला विज्ञापन, डिस्प्ले होते ही लगी...

अब बिहार में काॅलगर्ल के लिए संपर्क का चला विज्ञापन, डिस्प्ले होते ही लगी भीड़: पटना रेलवे स्टेशन पर चलने लगा था पॉर्न वीडियो

इसी साल मार्च में पटना रेलवे स्टेशन पर लगे डिस्प्ले में अश्लील वीडियो चलने लगी थी। 3 मिनट चलने के बाद रेलवे प्रशासन ने इसे बंद करवाया था।

कुछ दिनों पहले पटना रेलवे स्टेशन पर ब्लू फिल्म चलने के बाद बिहार को वैश्विक सुर्खियाँ मिली थी। अब प्रदेश बीच चैराहे काॅलगर्ल से संपर्क का विज्ञापन चलाने को लेकर चर्चा में है। यह घटना भागलपुर की है। रिपोर्टों के मुताबिक भागलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर आंबेडकर की प्रतिमा लगी हुई है। इस जगह को आंबेडकर चौक भी कहते हैं। यही लगे डिस्प्ले बोर्ड पर यह विज्ञापन कई मिनटों तक चलता रहा।

घटना सोमवार (17 अप्रैल 2023) की है। कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है। पुलिस ने मामले की जाँच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भागलपुर जंक्शन के बाहर आंबेडकर चौक पर एक LED डिस्प्ले लगा हुआ है। इस पर विज्ञापन चलते रहते हैं। सोमवार को इसी LED पर वेश्यावृत्ति का एक विज्ञापन प्रसारित होने लगा। स्क्रॉल हो रहे इस प्रचार में लिखा था, “र$डी का लिए यहाँ सम्पर्क करा।”

बताया जा रहा है कि इस बोर्ड को चलाने का जिम्मा जीवन जागृति सोसायटी नामक संस्था के पास था। यह मैसेज डिस्प्ले पर लगभग 10 मिनट तक चला। इस दौरान यहाँ लोगों को भीड़ लगा गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। बोर्ड को उतरवा दिया गया है। डिप्टी SP अजय चौधरी के मुताबिक इस घटना के पीछे तकनीकी कारण हैं। मामले की जाँच में पुलिस टेक्नीशियन की भी मदद ले रही है।

पटना जंक्शन पर चली थी अश्लील वीडियो

गौरतलब है कि इसी साल मार्च में पटना रेलवे स्टेशन पर लगे डिस्प्ले में अश्लील वीडियो चलने लगी थी। 3 मिनट चलने के बाद रेलवे प्रशासन ने इसे बंद करवाया था। मामले में FIR दर्ज की गई थी और इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी दत्ता कम्युनिकेशन को ब्लैक लिस्टेड करते हुए उस पर जुर्माना भी ठोंका गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -