Monday, July 15, 2024
Homeदेश-समाजजिस टूथपेस्ट से आप मुँह धोते हैं, वो वेज है या नॉन वेज... इसके...

जिस टूथपेस्ट से आप मुँह धोते हैं, वो वेज है या नॉन वेज… इसके लेबल के लिए कंपनियाँ बाध्य नहीं: हाईकोर्ट में CDSCO

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने कोर्ट को कहा कि साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट (किसी भी तरह का कॉस्मेटिक बनाने वाली कंपनी) जैसे उत्पादों पर वेज या नॉन-वेज का लेबल लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन- सीडीएससीओ (Central Drugs Standard Control Organization- CDSCO) ने कहा है कि कॉस्मेटिक बनाने वाली कंपनियों को अपने उत्पादों पर वेज या नॉन-वेज का लेवल लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। सीडीएससीओ ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि कंपनियाँ इसे स्वेच्छा से लगा सकती हैं।

जस्टिस विपिन सांघी और जसमीत सिंह की पीठ के समक्ष CDSCO ने अपनी ऐफिडेविट में कहा कि पिछले साल 13 अप्रैल को इस संबंध में ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (Drugs Technical Advisory Board- DTAB) के साथ बैठक की गई थी, लेकिन इसके लिए वह तैयार नहीं हुआ। DTAB का कहना है कि वेज और नॉन-वेज को लेकर पैकेट पर डॉट लगाने से जटिलताएँ बढ़ेंगी और संबंधित पक्षों पर इसका बोझ बढ़ेगा।

दरअसल, कॉस्मेटिक कंपनियों को अपने उत्पादों पर वेज और नॉन-वेज का लेवल लगाने संबंधी एक एडवाइजरी 10 दिसंबर को जारी की गई थी, जिसमें कहा था कि साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट आदि पर वेज के लिए ग्रीन और नॉन-वेज के लिए रेड डॉट का इस्तेमाल स्वैच्छिक आधार पर करना चाहिए। इसके बाद मामले को लेकर दिल्ली के हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।

इस एडवाइजरी के खिलाफ गैर-सरकारी संस्था ‘राम गौ रक्षक दल’ ने याचिका दायर कर कॉस्मेटिक प्रोडक्ट पर वेज और नॉन-वेज आइटम के इस्तेमाल के लिए लेबल लगाने की माँग की थी। इसके साथ ही यह माँग की गई थी कि इन उत्पादों की निर्माण-प्रक्रिया में किन-किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है, इनके बारे में भी जानकारी दी जाए।

राम गौ रक्षा दल की ओर से वकील रजत अनेजा द्वारा हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि देश के नागरिकों को ये जाने का अधिकार है कि वे जो भोजन करते हैं, कॉस्मेटिक और इत्र का उपयोग करते हैं या कपड़े पहनते हैं, उनमें किन-किन चीजों का इस्तेमाल किया गया हैं। कॉस्मेटिक कंपनियों को बताना चाहिए कि उनके प्रोडक्ट में किसी जानवर के शरीर के अंगों का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। यह जानना एक नागरिक का मौलिक अधिकार है।

इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर को सभी फूड बिजनेस इकाइयों को फूड आइटम में प्रयोग होने वाली प्रत्येक वस्तु के बारे में जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि बिजनेस ऑपरेटर आपकी थाली में कुछ और तो नहीं डाल रहा है, यह प्रत्येक व्यक्ति को यह जानने का अधिकार है कि वह क्या खा रहा है।

कोर्ट ने कहा था कि खाद्य सामग्रियों में जिन-जिन चीजों का प्रयोग हुआ है, उनके बारे में लिखित कोड होना चाहिए और यह भी बताया जाना चाहिए कि उन चीजों का स्रोत क्या है। यानी फूड में इस्तेमाल चीजों को पौधों, लेबोरेटरी या जानवरों से प्राप्त किया गया है या कहीं और से, इसके बारे में बताना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 31 जनवरी की तारीख तय की है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

98 दिन ASI ने किया सर्वे, 2000 पन्नों की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश: भोजशाला में ब्रम्हा-गणेश-नरसिंह-भैरव सबकी प्रतिमाएँ मिलीं, हिन्दू पक्ष ने कहा-...

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जमा कर दिया गया है।

मात्र 2 किलोग्राम ही घटा अरविंद केजरीवाल का वजन, AAP कह रही – कोमा में चले जाएँगे, ब्रेन स्ट्रोक हो जाएगा: जेल प्रशासन ने...

10 मई को जब उन्हें जमानत पर रिहा किया गया, तब उनका वजन 64 किलो था। यानी, 1 महीने 10 दिन में अरविंद केजरीवाल का वजन मात्र 1 किलोग्राम घटा।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -