Monday, July 15, 2024
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‘जिस हाथ से इस्लाम का अपमान किया, वो अब किसी काम का नहीं रहेगा’: केरल के प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने वाले सवाद को NIA ने दबोचा, 13 साल से था फरार

इस्लाम के कथित अपमान के नाम पर केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ काटने के मास्टरमाइंड सवाद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने धर दबोचा है। जाँच एजेंसी ने 13 साल बाद मंगलवार (9 जनवरी 2024) की रात को आरोपित को हिरासत में लेने में कामयाबी मिली। सवाद के सिर पर 10 लाख रुपए का इनाम था।

इस्लाम के कथित अपमान के नाम पर केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ काटने के मास्टरमाइंड सवाद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने धर दबोचा है। जाँच एजेंसी ने 13 साल बाद मंगलवार (9 जनवरी 2024) की रात को आरोपित को हिरासत में लेने में कामयाबी मिली। सवाद के सिर पर 10 लाख रुपए का इनाम था।

सवाद को बुधवार (10 जनवरी 2024) की सुबह कोच्चि स्थित एनआईए के कार्यालय लाया गया। आज से 13 साल पहले 4 जुलाई 2010 को केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाकर उनका हाथ काट दिया गया था। इसके बाद से ही मुख्य आरोपित सवाद फरार चल रहा था।

एनआईए की भगोड़ा ट्रैकिंग विंग को एक गुप्त सूचना मिली कि 37 साल का सवाद कन्नूर के पास मट्टनूर में है। इसके बाद NIA ने बेराम के एक किराए के मकान में छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया।सवाद यहाँ पिछले पाँच महीने से अपनी बीवी और दो बच्चों के साथ रह रहा था और बढ़ई का काम कर रहा था।

सवाद ने बेराम में अपने आसपास के लोगों को अपना नाम शाहजहाँ बताया था। एर्नाकुलम के असमन्नूर के नूलेली में मुदस्सेरी हाउस का रहने वाला है। वहीं, उसकी बीवी कासरगोड़ की रहने वाली है। बेराम आने से पहले वह कन्नूर में कई जगहों पर छिपकर रहता था। कहा जाता है कि बीच में वह खाड़ी देशों में नौकरी के लिए भी गया था।

सवाद उन 7 लोगों के समूह में शामिल था, जिन्हें प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने प्रोफेसर जोसेफ पर हमले के लिए चुना था। प्रोफेसर टीजे जोसेफ थोडुपुझा में स्थित न्यूमैन कॉलेज में मलयालम भाषा के प्रोफेसर थे। सावद ने प्रोफेसर पर यह हमला एर्नाकुलम के मुवत्तुपुझा में उनके घर के पास किया था।

साल 2013 में दायर एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, सवाद ने प्रोफेसर के कार के शीशे तोड़ दिए और प्रोफेसर को जबरदस्ती बाहर खींच लिया और उन पर चाकू और एक छोटी कुल्हाड़ी से हमला किया। परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों को जोसेफ को बचाने से रोकने के लिए देशी बम फेंका था।

सवाद ने जोसेफ की दाहिनी हथेली काटते हुए कहा था, “जिस हाथ ने इस्लाम का अपमान किया है, वह भविष्य में किसी काम का नहीं रहेगा।” इस वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सवाद बेंगलुरु भाग गया और वहाँ लगभग 13 साल तक अंडरग्राउंड रहा था। उसके सिर पर NIA ने 10 लाख रुपए का इनाम रखा था।

इतना ही नहीं, सवाद के खिलाफ इंटरपोल रेड-कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। इस मामले में कम से कम 54 आरोपित थे। सवाद ही अकेला आरोपित था, जो फरार था। इस केस की सुनवाई एनआईए अदालत में दो चरणों में हुई थी। इसमें से 19 लोगों को दोषी ठहराया गया था। सुनवाई के पहले चरण में 31 आरोपितों के खिलाफ ट्रायल चला था।

इसमें 10 आरोपितों को अप्रैल 2015 में UAPA के साथ-साथ विस्फोटक अधिनियम के तहत भी दोषी पाया गया था। 3 अन्य आरोपितों को अपराधियों को शरण देने का दोषी पाया गया था। वहीं, 3 अन्य को अपराधियों को शरण देने का दोषी पाया गया था। वहीं, 18 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया था।

दूसरे चरण में 11 जुलाई 2023 को NIA की विशेष अदालत ने इस मामले में 6 आरोपितों को दोषी ठहराया था और 5 लोगों को दोषमुक्त कर दिया था। जिन्हें दोषी साबित किया गया है, उनके नाम हैं – नस्सर, साजिल, नजीब, नौशाद, कुंजू और अयूब। वहीं शफीक, अजीज, रफ़ी, ज़ुबैर और मंसूर को दोषमुक्त करार दिया गया। 

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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