औद्योगिक शांति बनाए रखने के हेतु नोएडा प्राधिकरण में महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई,जिसमें प्रमुख सचिव(श्रम)एवं श्रम आयुक्त,उ0प्र0 ने वर्चुअल रूप से प्रतिभाग करते हुए श्रमिकों के हितों की सुरक्षा, ओवरटाइम का दोगुनाभुगतान,बोनस,साप्ताहिकअवकाश एवंकार्यस्थल सुरक्षा सहित विषयों पर चर्चाकी pic.twitter.com/Ui7XaDGHai
— DM NOIDA Gautam Buddha Nagar (@dmgbnagar) April 12, 2026
इसके बावजूद सोमवार (13 अप्रैल 2026) को प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े। बवाल की वजह से एनएच-9, दिल्ली- मेरठ एक्सप्रेस वे और चिल्ला बॉर्डर पर 5 किलोमीटर तक लंबा जाम लग गया। रूट डायवर्ट कर सेक्टर 62 और डीएनडी की ओर भेजा गया। इलाके को छाबनी में तब्दील कर दिया गया है।
मजदूरों का कहना है कि उनकी कंपनी में नए श्रम कानून के प्रावधान लागू नहीं हैं, इसलिए मजदूरों को कम वेतन मिलता है और सुविधाएँ भी न्यूनतम हैं। दिल्ली-हरियाणा समेत कई राज्यों में 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई गई है। दिल्ली में मजदूरों को अकुशल, कुशल, अर्ध कुशल वर्गों में विभाजित कर 18000 रुपए से 24000 रुपए हर महीना देने का प्रावधान है, जबकि हरियाणा में 15220 रुपए हर महीना मिलता है।
लेकिन, यूपी में मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 13000 रुपए महीना है, इसलिए मजदूर वेतन वृद्धि की माँग कर रहे हैं। 12 अप्रैल को कथित तौर पर एक महिला मजदूर के फायरिंग में घायल होने की खबर फैली। इसके बाद सोमवार को मजदूर उग्र हो गए और उन्होंने बवाल काटा। बताया जा रहा है कि आंदोलन में कई असामाजिक तत्व शामिल हो गए हैं, जो साजिश रच रहे हैं।
मजदूरों की माँगों को सरकार ने माना
- योगी सरकार मजदूरों की ज्यादातर माँगों को पहले ही मान चुकी है। इसके बावजूद मजदूरों का बवाल सवाल खड़े करता है। योगी सरकार ने जिन माँगों को माना है, उनमें
- दोगुना ओवरटाइम भुगतान
- समय पर सैलरी सीधे बैंक में
- 10 तारीख से पहले हर महीना वेतन मिलना चाहिए
- सैलरी स्लिप हर मजदूर को हर महीने मिलना चाहिए
- 30 नवंबर से पहले बोनस का भुगतान सीधा बैंक खाते में होना चाहिए
- साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित हो
- अवकाश के दिन काम करने पर दोगुनी मजदूरी मिले
- महिला सुरक्षा के लिए आंतरिक शिकायत समितियाँ और कंट्रोल रूम बनाना अनिवार्य
- समिति में एक महिला सदस्य जरूर हो
- कंट्रोल रूम में शिकायत पेटी लगाई जाए
- हेल्पलाइन नंबर जारी की जाए, ताकि उससे भी शिकायत दर्ज कराई जा सके
- शिकायतों का तुरंत निपटारा किया जाए
- सरकार के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए नियमित निगरानी की जाए।
- नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
शनिवार 11 अप्रैल 2026 को सीएम योगी ने मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को संज्ञान में लेते हुए उच्च स्तरीय बैठक की और निर्देश जारी करते हुए कहा कि मजदूरों के हितों की किसी भी हाल में अनदेखी नहीं की जाएगी। नोएडा प्रशासन ने इसकी जानकारी भी दी।
मजदूरों का डिरेल होता आंदोलन
नोएडा में हो रहा मजदूर आंदोलन डिरेल होता नजर आ रहा है। सरकार ने भी हर हाल में मजदूरों के हितों की रक्षा करने की बात कही और सीएम योगी ने खुद संज्ञान लिया। इसके लिए निर्देश जारी किए। लेकिन अब एक प्राइवेट कंपनी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कई कंपनियों के अस्थायी मजदूर शामिल हो गए हैं। इसमें ऐसे असामाजिक तत्व भी हैं, जो इसे हिंसक बना रहे हैं।
मजदूरों को उनका हक हर हाल में मिलना चाहिए, लेकिन इनके शांतिपूर्ण विरोध को हिंसक बनाने वाले तत्वों को जरूर सामने लाया जाना चाहिए। ऐसा करने वाले मजदूरों का भला नहीं कर रहे होते हैं, क्योंकि आंदोलन के हिंसक होते ही मजदूरों की माँगें कहीं खो जाती है और बातें उस हिंसा की होती है, जो असामाजिक तत्व फैलाते हैं। ऐसी ही हालत अब नोएडा में मजदूर आंदोलन की हो रही है।
इससे पहले पानीपत, मानेसर समेत कई जगहों पर मजदूरों को भड़काने की कोशिश की गई। पानीपत-मानेसर में रिफाइनरी में अस्थायी मजदूरों की कई माँगे हैं। उन्हें 12 घंटे काम कराकर 8 घंटे की ड्यूटी बताया जाता है। मजदूरों ने वेतन वृद्धि और फैक्ट्री में मजदूरों के लिए बेहतर सुविधाएँ देने की माँग की है।
यह आंदोलन भी हिंसक हो गया और मजदूरों की माँग पीछे रह गई और 2500 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैला कर मजदूर आंदोलन को डिरेल कर दिया। इस बीच फरीदाबाद में भी मजदूरों का मुद्दा गरमाने लगा है और विरोध प्रदर्शन की तैयारी चल रही है। मजदूर संगठनों ने पानीपत-मानेसर के मजदूरों को समर्थन देने के लिए आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
इसी तरह मध्यप्रदेश के सिंगरौली में अडानी ग्रुप की परियोजना का विरोध किया गया। यहाँ की सुलियारी और थिरौली कोयला खदानों को बंद करने की माँग करते हुए विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान संदिग्ध परिस्थिति में एक मजदूर की मौत के बाद बवाल मच गया।
यूपी समेत कई बीजेपी राज्यों में साजिश रची गई
यूपी को अशांत करने की कोशिशें काफी दिनों से हो रही है। किसान आंदोलन के दौरान पंजाब से यूपी खासकर पश्चिम यूपी में बवाल मचा। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा, राजस्थान, यूपी समेत कई राज्य इसकी जद में आए।
इन आंदोलनों के दौरान सड़कों को जाम कर सरकारी बसों और दूसरे वाहनों को आग के हवाले करना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना आम बात हो गई थी। सोशल मीडिया ने इस दौरान आग में घी का काम किया और आंदोलन को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गई। दरअसल इन आंदोलनों के पीछे सियासी साजिश थी, जिसका खुलासा बाद में सरकारी एजेंसियों ने किया।
2025 में ‘आई लव मोहम्मद’ बीजेपी शासित राज्यों उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों में विवाद का विषय रहा। यूपी में कानपुर में 4 सितंबर 2025 को शुरू हुआ यह विवाद बरेली, अलीगढ़, मेरठ तक फैला। इस दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनर-पोस्टर के साथ सड़कों को इस्लामी भीड़ ने जाम किया और भड़काऊ नारेबाजी की। कई जगहों पर पथराव हुए और पुलिस पर हमले किए गए।
इस्लामी कट्टरपंथियों पर काबू पाने के लिए कई जगहों पर पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। उत्तराखंड के काशीपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ को लेकर हुए बवाल और पुलिस पर पत्थरबाजी में समाजवादी पार्टी नेता नदीम अख्तर का नाम सामने आया। इस विवाद को भी सोशल मीडिया के माध्यम से हवा दी गई।
दरअसल किसानों, मजदूरों और इस्लामी कट्टरपंथियों के बवाल के पीछे साजिश का खुलासा बाद में होता है। भोले-भाले किसानों और मजदूरों की माँगों को आगे कर सियासी रोटी सेंकने की आदत पार्टियों की रही है। मजदूरों की माँग न्यूनतम मजदूरी की रही है, जिसे नाजायज नहीं कहा जा सकता। लेकिन, क्या इसके पीछे यूपी के विकास और औद्योगिक धंधों को डिरेल करने की कोशिश तो नहीं है?


