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बहादुरी के बाद अब दुनिया ने देखी मयूर शेलके की दरियादिली: जिस बच्चे की जान बचाई अब उसे देंगे आधा इनाम

"मयूर शेलके के पास पोशाक या टोपी नहीं थी। लेकिन उन्होंने सुपरहीरो की तुलना में अधिक साहस दिखाया।"

इन दिनों सोशल मीडिया में मयूर शेलके  (Mayur Shelke) की खूब चर्चा हो रही है। वे सेंट्रल रेलवे के मुंबई डिवीजन में बतौर प्वाइंट्समैन कार्यरत हैं। मुंबई के करीब वन्गनी रेलवे स्टेशन पर उन्होंने एक बच्चे को बचाने के लिए जो हौसला दिखाया, उसका हर कोई कायल है। अब उन्होंने अपनी दरियादिली का एक और परिचय दिया है।

शेलके ने इनाम में मिली आधी राशि उसी बच्चे और उसकी माँ को देने का फैसला किया है, जिसकी जान उन्होंने बचाई थी। सेंट्रल रेलवे ने उनकी बहादुरी को देखते हुए 50 हजार रुपया देने का ऐलान किया था।

असल में वन्गनी स्टेशन पर एक बच्चा अपनी नेत्रहीन माँ के साथ जा रहा था। तभी वह प्लेटफॉर्म से नीचे पटरी पर गिर गया। बच्चा ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन चढ़ने में असफल रहा। उसकी माँ चिल्ला रही थी तभी शेलके ने सूझबूझ का परिचय दिया और दौड़कर बच्चे को ट्रेन की चपेट में आने से बचा लिया। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। इसे रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी शेयर किया। इसके बाद से ही शेलके की पूरे देश में चर्चा हो रही है।

शेलके के इस बहादुरी भरे कारनामे के बाद जावा मोटरसाइकल्स ने उन्हें पुरस्कार स्वरूप जावा बाइक देने की भी घोषणा की थी। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने शेलके की तारीफ करते हुए ट्वीट किया, “मयूर शेलके के पास पोशाक या टोपी नहीं थी। लेकिन उन्होंने सुपरहीरो की तुलना में अधिक साहस दिखाया। Jawa परिवार की तरफ से हम सभी उन्हें सलाम करते हैं। मुश्किल समय में, मयूर ने हमें दिखाया है कि हमें बस अपने आसपास के लोगों को देखना होगा, जो हमें एक बेहतर दुनिया की राह दिखाते हैं।”

शेलके ने इनाम की राशि का आधा हिस्सा बच्चे और उसकी माँ को देने का फैसला करते हुए कहा है कि कोविड-19 महामारी का यह समय अत्यंत कठिन है। ऐसे में जो भी उन्हें नकद राशि अथवा चेक देना चाहते हैं, उसे उस बच्चे तथा उसकी माँ को दें अथवा किसी भी अन्य जरुरतमन्द को दें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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