पश्चिम बंगाल में अब भाजपा की सरकार बन गई है। ममता बनर्जी की सत्ता को लोगों ने उखाड़ फेंका है और BJP को बंपर सीटें मिली हैं। BJP की इस जीत के पीछे जो सबसे बड़ा कारण माना जाता है वो TMC के कार्यकर्ताओं-नेताओं की गुंडागर्दी थी जिससे लोग डरे हुए थे। ये डर बेजा नहीं था और भाजपा महिला मोर्चा की सक्रिय कार्यकर्ता रहीं रंजीता प्रमाणिक इस डर की मिसाल हैं।
रंजीता को अपनी और परिवार की जान बचाने के लिए 2021 में रातों-रात कोलकाता छोड़ना पड़ा था। गुंडई का वो दौर कैसा रहा होगा उसका अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि रंजीता और उनका परिवार अब भी कोलकाता लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में रंजीता ने अपने साथ हुई प्रताड़ना की पूरी कहानी बताई है। रंजीता बताती हैं कि 2015-16 के आसपास वह भाजपा महिला मोर्चा से जुड़ी जबकि भाई रंजन हिंदूवादी संगठनों के साथ सक्रिय होने लगे। वह बताती हैं कि शुरुआत में सब सामान्य था लेकिन जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल की राजनीति गर्माने लगी, वैसे-वैसे उनके लिए हालात बदलते गए।
तेजाब अटैक से लेकर रेप की धमकियों तक
रंजीता बताती हैं कि BJP के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के बाद उन्हें रास्ते में रोकना, गंदे कमेंट करना, छेड़खानी और घर पर पत्थर फेंकने जैसी घटनाएँ शुरू हो गईं। शुरुआत में परिवार ने इन घटनाओं को नजरअंदाज कर दिया लेकिन जैस 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान हालात और तनावपूर्ण हो गए।
रंजीता का कहना है कि चुनाव के बाद उन्हें लगातार धमकियाँ मिलने लगीं। एकादशी के दिन जब वह गो-माता को खाना खिलाने बाहर गईं, तभी उन पर तेजाब से हमला हुआ। झुक जाने की वजह से उनका चेहरा बच गया लेकिन शरीर का निचला हिस्सा बुरी तरह जल गया। समय के साथ हालत और बिगड़ती गई, शरीर सिकुड़ने लगा और चलना-फिरना मुश्किल हो गया। वह अब भी व्हील चेयर पर ही रहती हैं।
परिवार का आरोप है कि कोर्ट तक मामला पहुँचने के बाद भी हमलावर उन्हें केस वापस लेने की धमकी देते रहे। रंजीता कहती हैं, “हमला करने वाले बोले- केस वापस लो, नहीं तो तुम्हारी माँ का रेप कर देंगे। पूरे परिवार को जिंदा जला देंगे।” डर के कारण परिवार ने मामला वापस ले लिया। रंजीता के पिता रबिन प्रमाणिक का कहना है कि चुनाव के बाद धमकियाँ इतनी बढ़ गईं कि उन्हें पीढ़ियों पुराना घर और काम छोड़कर रातों-रात कोलकाता से भागना पड़ा।
कोलकाता छोड़ने के बाद परिवार सबसे पहले जयपुर पहुँचा और वहाँ रंजीता का इलाज हुआ। उनके पैर तक टेढ़े हो गए थे जिन्हें डॉक्टरों ने रॉड डालकर सीधा किया। इसके बाद परिवार की जमा पूँजी खत्म होने लगी तो परिवार अपनी जिंदगी बिताने के लिए काशी पहुँच गया। वहाँ जाकर रामकृष्ण मिशन और कई आयुर्वेदिक संस्थानों में इलाज कराया। वे बताती हैं कि कई संतों और धार्मिक संस्थाओं ने भी कठिन समय में उनका साथ दिया।
वाराणसी में जिला अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी उनकी स्थानीय लोगों ने खूब मदद की थी। समाजसेवियों ने इलाज के लिए पैसे इकट्ठा किए और इलाज में जो मदद संभव थी वो सब की गई। वहाँ भर्ती रहने के दौरान रंजीता ने बताया था कि कोरोना काल में जॉब चले जाने के बाद हम लोग मदद माँगने के लिए पहुँचे तो कहा गया कि तुम लोग BJP कार्यकर्ता हो बीजेपी वालों से जाकर मदद माँग और इसके बाद हम लोगों को प्रताड़ित किया जाने लगा।
भोपाल में रह रहा परिवार, कोलकाता लौटने का डर बरकरार
कई शहरों में भटकने के बाद परिवार भोपाल पहुँचा जहाँ कुछ स्थानीय लोगों और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने उनकी मदद की। परिवार को आधार-वोटर कार्ड, राशन और रहने की जरूरी चीजें मिलीं। मध्य प्रदेश में आने पर मंत्री विश्वास सारंग ने भी रंजीता प्रमाणिक से मुलाकात की थी और उन्हें सारी मदद का भरोसा दिया था।
विश्वास सारंग ने X पर एक पोस्ट में लिखा था, “अपना घर-आँगन और अपनी मिट्टी छोड़कर पश्चिम बंगाल से पलायन होकर भोपाल पहुँची हिंदू बेटी रंजीता प्रमाणिक की व्यथा सुनकर हृदय व्यथित हो उठता है। हिंदू बेटी रंजीता की आँखों में छिपा भय, उसके टूटे सपनों की कसक और असुरक्षा की छाया हमारी अंतरात्मा को झकझोर देती है।”
उन्होंने लिखा था, “आज वह नरेला विधानसभा में अपने परिवार सहित सुरक्षित है। अब बेटी और उसके परिवार का भविष्य, सुरक्षा और मुस्कान हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। बेटी के आँखों के आँसू मिटाना, उसके सपनों को नई उड़ान देना और उसे सम्मान व सुरक्षा का वातावरण देना ही हमारा संकल्प है।”
इस पोस्ट के साथ सारंग ने एक वीडियो भी पोस्ट किया था जिसमें रंजीता अपनी प्रताड़ना की कहानी बता रही थीं। उन्होंने बताया था, “ममता बनर्जी के, TMC के गुंडों ने हमारे ऊपर अत्याचार किया। जिहादियों ने मेरे ऊपर तेजाब डाल दिया था।”
अपना घर-आँगन और अपनी मिट्टी छोड़कर पश्चिम बंगाल से पलायन होकर भोपाल पहुँची हिंदू बेटी रंजीता प्रमाणिक की व्यथा सुनकर हृदय व्यथित हो उठता है।
— विश्वास कैलाश सारंग (@VishvasSarang) September 12, 2025
हिंदू बेटी रंजीता की आँखों में छिपा भय, उसके टूटे सपनों की कसक और असुरक्षा की छाया हमारी अंतरात्मा को झकझोर देती है।
आज वह नरेला… pic.twitter.com/k7In6n2cuM
आज वे एक छोटे किराए के कमरे में रहते हैं लेकिन आर्थिक हालत इतनी खराब है कि दवाइयों का खर्च उठाना भी मुश्किल हो जाता है। रंजीता के पिता रबिन प्रमाणिक कहते हैं कि कोलकाता में उनका घर और काम था लेकिन अब बेटी के इलाज के लिए मदद माँगनी पड़ती है। वहीं, रंजीता के भाई रंजन का आरोप है कि हिंदूवादी संगठनों से जुड़े होने के कारण कोविड काल में उन्हें खंभे से बाँधकर पीटा गया और धमकियाँ दी गईं।
परिवार का कहना है कि लगातार डर और प्रताड़ना के कारण उन्हें अपना शहर छोड़ना पड़ा। अब भोपाल में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश हो रही है लेकिन पुराने डर अब भी बने हुए हैं। रंजीता कहती हैं कि उन्हें पश्चिम बंगाल लौटने से डर लगता है और अब वापस जाने की हिम्मत नहीं है।
रंजीता की माँ बताती हैं कि उनकी बेटी आज भी रात में डरकर उठ जाती है और कई बार पुरानी बातें याद कर रोने लगती है। वहीं, रंजीता कहती हैं कि अब वहाँ जाने से डर लगता है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है मार देंगे। परिवार अब पश्चिम बंगाल लौटना नहीं चाहता। BJP की सरकार बनने के बाद भी उनमें वापस लौटने की हिम्मत नहीं है।”


