Thursday, May 13, 2021
Home विचार मीडिया हलचल एक संघी की मृत्यु होती है, फिर उसकी फैक्ट-चेकिंग की जाती है... भारतीय मीडिया...

एक संघी की मृत्यु होती है, फिर उसकी फैक्ट-चेकिंग की जाती है… भारतीय मीडिया इससे नीचे नहीं गिर सकती

हिंदूफोबिया है, असल में है। और मीडिया में यह कितना है, इसे उन 2 अखबारों की रिपोर्ट से समझिए, जिन्हें 85 साल के RSS स्वयंसेवक के अंतिम बलिदान को बदनाम करने के उद्देश्य से लिखा गया।

लगातार बढ़ती हुई महामारी के बीच भी दो अखबारों ने अपने संसाधनों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक मृत 85 वर्षीय स्वयंसेवक के परिवार को झूठा साबित करने में लगा दिया। आगे बढ़ने से पहले भविष्य के प्रत्येक संदर्भ के लिए भारतीय मीडिया के ‘नैतिक दायित्व’ को ध्यान रखा जाए।

महाराष्ट्र में, जहाँ सरकार कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएँ दे पाने में असमर्थ दिख रही है, नागपुर के एक वरिष्ठ स्वयंसेवक नारायण दाभदकर ने 22 अप्रैल को अस्पताल में स्वेच्छा से अपना बेड उम्र में उनसे छोटे एक मरीज को दे दिया। नारायण काका ने कहा कि अब वह बहुत जी चुके हैं जबकि उस मरीज को अभी अपने बच्चों की देखभाल करनी है। इसके 3 दिन के बाद नारायण काका की मृत्यु हो गई।

RSS के स्वयंसेवक के इस त्याग को ‘फेक’ बताने के लिए पहले अखबार ने एक ‘एक्टिविस्ट’ के बयान को आधार मानते हुए खबर प्रकाशित की। इस एक्टिविस्ट ने किसी दूसरे अस्पताल से जानकारी जुटाई कि वहाँ ऐसा कोई मरीज था ही नहीं। ऐसे ही दूसरे अखबार ने उस अस्पताल के डॉक्टर के बयान को ही घुमा दिया, जहाँ नारायण काका भर्ती थे।

इस रिपोर्ट में कथित तौर पर डॉक्टर द्वारा कहा गया है कि वह अथवा उसका स्टाफ नारायण काका द्वारा अपना बेड किसी अन्य मरीज को दिए जाने के समय वहाँ मौजूद नहीं था। इससे अप्रत्यक्ष रूप से यही अर्थ निकलता है कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को मरीजों और उनके परिजनों की बातचीत पर पूरी नजर बनाए रखनी चाहिए और वहीं आसपास भटकते रहना चाहिए।

इन दोनों में से कोई भी रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि नारायण काका का परिवार झूठ बोल रहा है। लेकिन यह सही है कि लोकसत्ता द्वारा प्रकाशित फेक न्यूज और द इंडियन एक्स्प्रेस के प्रोपेगेंडा पर आधारित खबर के माध्यम से ‘सेक्युलर और लिबरल इकोसिस्टम’ RSS, उसके कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को बदनाम करने का कार्य करेगा।

इस घटना से दो बातें सामने आती हैं। पहली यह कि ‘फैक्ट-चेकिंग’ अब फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा फैलाने का एक नया माध्यम बन गया है और दूसरी यह कि मीडिया किसी भी ‘संघी’ अथवा एक प्रखर ‘हिन्दू पहचान’ वाले व्यक्ति द्वारा किए गए भले कामों को भी नकारने के लिए अत्यंत आतुर है।

इसके पीछे कारण है वह विचारधारा, जो हिन्दू धर्म को बुरा और अन्यायपूर्ण धर्म मानती है और यह विश्वास करती है कि हिन्दू धर्म ही भारत के अंदर सभी समस्याओं की जड़ है (इस चाइनीज महामारी के दौरान हिन्दू मंदिरों के प्रति उपजती हुई घृणा इसका द्योतक है)। अधिकतर पत्रकार इसी विचारधारा के सिपाही हैं। हालाँकि ये पत्रकार हिन्दू धर्म पर सीधा हमला नहीं कर सकते किन्तु वो ‘संघियों’ और ‘हिन्दू समूहों’ के अच्छे कार्यों को भी नजरअंदाज करके उन पर भी अपना प्रोपेगेंडा चलाते रहते हैं।

एजेंडा एक ही है, हिन्दू समाज को कमजोर बनाना क्योंकि एक कमजोर समुदाय पर आसानी से विजय प्राप्त की जा सकती है। इसी उद्देश्य के लिए ‘संघी’ और ‘हिन्दू समूह’ जैसे शब्दों का उपयोग किया जाता है। RSS और उसके स्वयंसेवकों को बदनाम करने के अलावा, जैसा कि उन्होंने नारायण काका के मामले में किया, मीडिया हमेशा से यही प्रयास करती है कि ‘हिन्दू समूह’ किसी मूर्खतापूर्ण अथवा अस्वीकार्य कारणों (सनसनीखेज बयान, असुविधा उत्पन्न करने वाली और गैर-तार्किक घटनाओं) से खबरों में आएँ।

जब भी RSS अथवा कोई हिन्दू समूह किसी प्रकार का अच्छा कार्य करता भी है तो उसे इस तरीके से खबरों में ढाला जाता है कि उनके इस तरह के कार्यों का कोई महत्व न रह जाए। उदाहरण के लिए यदि RSS द्वारा किसी प्राकृतिक आपदा अथवा दुर्घटना के समय कोई सहायता की जाती है तो उसे इस प्रकार बताया जाएगा, ‘RSS ने बढ़ाया मदद का हाथ’ अथवा ‘स्थानीय निवासियों ने की घायलों की सहायता’। बाकी रिपोर्ट में कहीं RSS के कार्यों के बारे में थोड़ा-बहुत बता दिया जाएगा। अब यदि कोई हिन्दू समूह RSS की सहायता के लिए आता भी है, समान्यतः ऐसा ही होता है, तो खबर से ‘हिन्दू समूह’ को गायब कर दिया जाएगा।

इसका परिणाम होता है कि एक सामान्य हिन्दू यही सोचने लगता है कि यदि हिन्दू समूह किसी गतिविधि में है तो वह निश्चित तौर पर गलत ही होगी, भले ही वह समाज के हित में ही क्यों न हो। ऐसा होने के बाद एक सामान्य हिन्दू की नजरों में ‘हिन्दू समूहों’ द्वारा किया गया उनके ही हित से संबंधित कोई भी कार्य एक राजनैतिक अथवा अवसरवादी तराजू पर तौल दिया जाता है।

मीडिया का यह इकोसिस्टम ऐसे ही काम करता है। सबसे पहले तो मीडिया रिपोर्ट्स में हिंदुओं के खिलाफ होने वाले किसी अपराध को कोई महत्व ही नहीं दिया जाएगा लेकिन जब हिंदुओं के दबाव के कारण ऐसा करना पड़ेगा तब कुछ इस प्रकार रिपोर्टिंग की जाएगी, ‘हिन्दू समूहों ने XYZ घटना पर प्रदर्शन किया’। अब यह XYZ घटना किसी हिन्दू मंदिर से जुड़ी हो सकती है अथवा लव जिहाद या हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी पर आधारित हो सकती है। यहाँ तक कि इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हत्या या नरसंहार की खबरें या धमकियों से जुड़ी खबर में ‘हिन्दू समूह’ जुड़ जाने के कारण यह महत्वहीन हो जाती हैं। एक सामान्य हिन्दू इन खबरों को भी संदेह की दृष्टि से देखने लगता है। ऐसा इसलिए कि ‘हिन्दू समूह’ कभी भी किसी अच्छे उद्देश्य से खबरों में रहे ही नहीं। यही है सॉफ्ट ‘जेनोसाइड डिनायल’ जहाँ पीड़ित या तो फ्रेम से गायब हो जाता है या उसे ही दोष दे दिया जाता है।  

और इस प्रकार हिंदुओं को अस्तित्ववादी खतरों के प्रति अंधा बनाने का अंतिम लक्ष्य तय होता है। हिन्दू मारे जाएँगे और उन्हें सम्मान से भी वंचित रखा जाएगा, जैसे नारायण काका। हिंदुओं की हत्याएँ होंगी और हिन्दू ही अपनी हत्या के लिए दोषी माना जाएगा जैसे कमलेश तिवारी और कश्मिरी पंडित। इसके बाद भी यदि हिन्दू बच गए तो उन्हें इतना शर्मिंदा किया जाएगा कि वो किसी भी ‘हिन्दू समूह’ का हिस्सा न बनें।    

वास्तविक लेख इंग्लिश में यहाँ पढ़ा जा सकता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Rahul Roushanhttp://www.rahulroushan.com
A well known expert on nothing. Opinions totally personal. RTs, sometimes even my own tweets, not endorsement. #Sarcasm. As unbiased as any popular journalist.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

12 ऐसे उदाहरण, जब वामपंथी मीडिया ने फैलाया कोविड वैक्सीन के खिलाफ प्रोपेगेंडा, लोगों में बनाया डर का माहौल

हमारे पास 12 ऐसे उदाहरण हैं, जब वामपंथी मीडिया ने कोरोना की दूसरी लहर से ठीक पहले अपने ऑनलाइन पोर्टल्स पर वैक्सीन को लेकर फैक न्यूज फैलाई और लोगों के बीच भय का माहौल पैदा किया।

इजरायल पर हमास के जिहादी हमले के बीच भारतीय ‘लिबरल’ फिलिस्तीन के समर्थन में कूदे, ट्विटर पर छिड़ा ‘युद्ध’

अब जब इजरायल राष्ट्रीय संकट का सामना कर रहा है तो जहाँ भारतीयों की तरफ से इजरायल के साथ खड़े होने के मैसेज सामने आ रहे हैं, वहीं कुछ विपक्ष और वामपंथी ने फिलिस्तीन के साथ एक अलग रास्ता चुना है।

‘सामना’ में रानी अहिल्या बाई की तुलना ममता बनर्जी से देख भड़के परिजन, CM उद्धव को पत्र लिख जताई नाराजगी

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तुलना 'महान महिला शासक' रानी अहिल्या बाई होलकर से किए जाने के बाद रानी के वंशजों में गुस्सा है।

चढ़ता प्रोपेगेंडा, ढलता राजनीतिक आचरण: दिल्ली के असल सवालों को मुँह चिढ़ाती केजरीवाल की पैंतरेबाजी

ऐसे दर्जनों पैंतरे हैं जिन पर केजरीवाल से प्रश्न नहीं किए गए हैं और यही बात उनसे बार-बार ऐसे पैंतरे करवाती है।

25 साल पहले ULFA ने कर दी थी पति की हत्या, अब असम की पहली महिला वित्त मंत्री

असम में पहली बार एक महिला वित्त मंत्री चुनी गई है। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी सरकार में वित्त विभाग 5 बार गोलाघाट से विधायक रह चुकी अजंता निओग को सौंपा।

UP: न्यूज एंकर समेत 4 पत्रकार ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में गिरफ्तार, ₹55 हजार में कर रहे थे सौदा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में चार पत्रकार ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजरी करते पकड़े गए हैं। इनमें से एक लोकल न्यूज चैनल का एमडी/एंकर है।

प्रचलित ख़बरें

इजरायल पर इस्लामी गुट हमास ने दागे 480 रॉकेट, केरल की सौम्या सहित 36 की मौत: 7 साल बाद ऐसा संघर्ष

फलस्तीनी इस्लामी गुट हमास ने इजरायल के कई शहरों पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे। गाजा पट्टी पर जवाबी हमले किए गए।

मुस्लिम वैज्ञानिक ‘मेजर जनरल पृथ्वीराज’ और PM वाजपेयी ने रचा था इतिहास, सोनिया ने दी थी संयम की सलाह

...उसके बाद कई देशों ने प्रतिबन्ध लगाए। लेकिन वाजपेयी झुके नहीं और यही कारण है कि देश आज सुपर-पावर बनने की ओर अग्रसर है।

इजरायल का आयरन डोम आसमान में ही नष्ट कर देता है आतंकी संगठन हमास का रॉकेट: देखें Video

इजरायल ने फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास द्वारा अपने शहरों को निशाना बनाकर दागे गए रॉकेट को आयरन डोम द्वारा किया नष्ट

‘#FreePalestine’ कैम्पेन पर ट्रोल हुई स्वरा भास्कर, मोसाद के पैरोडी अकाउंट के साथ लोगों ने लिए मजे

स्वरा के ट्वीट का हवाला देते हुए @TheMossadIL ने ट्वीट किया कि अगर इस ट्वीट को स्वरा भास्कर के ट्वीट से अधिक लाइक मिलते हैं, तो वे भारतीय अभिनेत्री को एक स्पेशल ‘पॉकेट रॉकेट’ भेजेंगे।

‘इस्लाम को रियायतों से आज खतरे में फ्रांस’: सैनिकों ने राष्ट्रपति को गृहयुद्ध के खतरे से किया आगाह

फ्रांसीसी सैनिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुला पत्र लिखा है। इस्लाम की वजह से फ्रांस में पैदा हुए खतरों को लेकर चेताया है।

बांग्लादेश: हिंदू एक्टर की माँ के माथे पर सिंदूर देख भड़के कट्टरपंथी, सोशल मीडिया में उगला जहर

बांग्लादेश में एक हिंदू अभिनेता की धार्मिक पहचान उजागर होने के बाद इस्लामिक लोगों ने अभिनेता के खिलाफ सोशल मीडिया में उगला जहर
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,378FansLike
92,887FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe