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रवीश कुमार, हम जानते हैं भगवा बंगाल देख आपके अंग विशेष में हो रही जलन, पर बर्नोल नहीं हैं विजय; क्योंकि BJP बनाम TVK नहीं था तमिलनाडु का यह चुनाव

असम, बंगाल और पुडुचेरी समेत 3 राज्यों में BJP ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई तो रवीश कुमार को जलन होने लगी, इसीलिए वे तमिलनाडु में विजय की जीत को 'बर्नोल' की तरह इस्तेमाल कर प्रोपेगेंडा गढ़ने में लग गए।

तमिलनाडु में 50 साल से अधिक चला आ रहा द्रविड़ राजनीति (DMK/AIADMK) का वर्चस्व कमजोर पड़ गया है। क्योंकि इस बार विधानसभा चुनाव 2026 में एक्टर जोसेफ विजय चेंद्रशेखर की पार्टी तमिझागा वेट्री कजगम (TVK) यानी तमिलनाडु विजय पार्टी ने 35% (लगभग 1.7 करोड़ वोट) वोट शेयर से डेब्यू कर तमिलनाडु में नया अध्याय लिखा है। अब विजय और उनकी पार्टी TVK की इस जीत पर प्रोपेगेंडा पत्रकार और यूट्यूबर रवीश कुमार ने नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की है।

बंगाल में BJP की जीत के बाद रवीश कुमार तमिलनाडु के नतीजों में अपनी खुशी तलाश रहे हैं, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 3% वोट शेयर भी नहीं मिला, वहाँ भी ‘BJP को हराने’ वाला प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु में विजय की जीत पर पूरी वीडियो बनाई है और नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की कि कैसे तमिलनाडु में BJP का विरोध कर विजय चुनाव जीत गए। विजय की जीत को रवीश कुमार ने तमिलनाडु की जनता में BJP के खिलाफ रोष के रूप में पेश किया। यहाँ तक कि यह साबित करने में लगे रहे कि तमिलनाडु का अगला ‘ईसाई’ मुख्यमंत्री BJP से नफरत करता है।

विजय की जीत और उनकी पार्टी की BJP के खिलाफ नफरत बताते हुए रवीश कुमार कहते हैं, “पहली बार ईसाई मुख्यमंत्री बनेगा। धर्मनिर्पेक्ष छवि बनाने वाले विजय पर तमिलनाडु की जनता ने जाति और धर्म के आधार के बगैर साथ दिया।” वे बताते हैं कि कैसे विजय बार-बार कहते रहे कि वह BJP के साथ नहीं जाएँगे, क्योंकि उनकी विचारधारा BJP से मेल नहीं खाती है।

रवीश कुमार बताते हें कि विजय मानते हैं, “BJP द्रविड़ विरोधी राजनीति करने वाली पार्टी है। BJP तमिलनाडु की धर्मनिर्पेक्षता की राजनीति के मूल्यों के खिलाफ है। विभाजनकारी राजनीति करती है। फासीवादी पार्टी है, इसीलिए उसके साथ कभी गठबंधन नहीं करेंगे क्योंकि यह उनके आत्मसम्मान के खिलाफ है।” रवीश कुमार कहते हैं कि विजय ने BJP से दूरी बनाई है।” और रवीश का मानना है कि तमिलनाडु में BJP का विरोध करते हुए एक नई पाटी सत्ता तक पहुँच गई।”

दरअसल, विधानसभा चुनाव 2026 में विजय की पार्टी 234 सीटों पर अकेले चुनावी मैदान में उतरी और 108 सीटों पर जीत दर्ज की। लेकिन बहुमत के लिए आँकड़ा पूरा नहीं है। विजय की पार्टी को सरकार बनाने के लिए 10 सीटें और चाहिए होंगी। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि विजय के फादर और फिल्म निर्माता एसए चंद्रशेखर ने कॉन्ग्रेस को गठबंधन का खुला न्योता दिया है। उधर, BJP ने खुद द्रविड़ राजनीति करने वाली AIADMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा, जिसमें BJP केवल एक सीट पर जीती और AIADMK 47 सीटों पर।

प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार ने विजय की जीत को BJP विरोध का रंग देकर अपनी पुरानी आदत दोहराई है, लेकिन हकीकत में यह चुनाव BJP बनाम TVK कभी था ही नहीं। विजय ने BJP को ‘विभाजनकारी‘ और ‘फासीवादी’ कहकर दूरी बनाई तो सही, पर द्रविड़ियन राजनीति को खत्म करने के लिए। विजय ने DMK-AIADMK से अलग होकर एक स्वतंत्र पार्टी बनाई।

विजय अपनी राजनीतिक विचारधारा सेकुलर सोशल जस्टिस, सामाजिक न्याय, समानता और राज्य स्वायत्ता जैसे मूल्यों को बताते चुनाव लड़े। विजय BJP को अपना वैचारिक विरोधी बताते रहे और DMK को अपना राजनीतिक प्रतिद्वंदी कहते रहे, लेकिन यह भी देखा गया कि TVK की मूल विचारधारा, जो द्रविड़ियन को बचाने का दावा करती है, वह खिसकते नजर आई। क्योंकि विजय पेरियार जैसे द्रविड़ विचारकों को वैचारिक स्तंभ मानते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि विजय की पार्टी TVK द्रविड़ विचारधारा और तमिल राष्ट्रवाद का मिश्रण है।

उधर, एक ओर रवीश कुमार अपनी वीडियो में विजय की धर्मनिर्पेक्ष छवि पर बात करते हैं, तो दूसरी ओर विजय को अगला ‘ईसाई’ मुख्यमंत्री बताकर अपना नैरेटिव ध्वस्त करते हैं। यह सच है कि विजय ईसाई हैं, लेकिन उन्होंने अब तक राजनीति में धर्म को आगे नहीं रखा, जो कि BJP की हिंदुत्व पॉलिटिक्स से टकराता भी है और तमिलनाडु की सेकुलर ग्राउंड रियलिटी से मेल खाता है। पर BJP को राज्य में 2.9% से वोट शेयर मिला है, तो यहाँ भी विजय की BJP से ‘लड़ाई’ जैसी कोई बात है ही नहीं।

असल में विजय और उनकी पार्टी की जीत को तमिलनाडु में 50 से ज्यादा साल से स्थापित द्रविड़ राजनीति को चुनौती देते हुए नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो पेरियार के मूल्यों पर चलती है लेकिन स्वीकार नहीं करती। विजय की यह जीत असल में भ्रष्टाचार से तंग जनता, युवाओं और उनके कट्टर फैन क्लब्स की है, जिसने एक ‘नॉन-पॉलिटिकल’ चेहरे को मंदिर, मस्जिद और गिरजाघरों में जाते देखकर सीधे सत्ता के करीब पहुँचा दिया। आखिरकार विजय ने द्रविड़ राजनीति को कमजोर तो किया, पर अपनी मूल विचारधारा को छिपा नहीं सके।

रवीश कुमार जैसे प्रोपेगेंडाबाज पत्रकार यह जानने में असमर्थ होंगे, क्योंकि उनके नैरेटिव में सबसे पहला शब्द BJP आता है। जहाँ 5 राज्यों में से असम, बंगाल और पुडुचेरी समेत 3 राज्यों में BJP ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई, तब रवीश कुमार ‘निष्पक्ष’ पत्रकारिता के लिए BJP की जीत या विरोधियों की हार पर एक भी विश्लेषण करना जरूरी नहीं समझते। इन राज्यों में BJP की जीत से जलन होने लगी, इसीलिए वे तमिलनाडु में विजय की जीत को ‘बर्नोल’ की तरह इस्तेमाल कर प्रोपेगेंडा गढ़ने में लग गए।

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