ख़ून-ख़राबे से बने मंदिर में भगवान भले आ जाएँ, पूजा करने कौन जाएगा: कॉन्ग्रेसी मुखपत्र का प्रोपगेंडा

सुजाता ने अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाले पाँचों जजों (जिनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और भावी मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं) के लिए लिखा है कि उन्होंने बुद्धिमत्ता के परिचय नहीं दिया। साथ ही दावा किया है कि ठाकरे मंदिर-मस्जिद की जगह अयोध्या में हॉस्पिटल या स्कूल चाहते थे।

कॉन्ग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ में एक अजीबोगरीब लेख प्रकाशित कर राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का विरोध किया है। सुजाता आनंदन ने इस लेख में लिखा है कि उन्होंने जब 1992 में बाबरी विध्वंस की ख़बर सुनी, तभी उन्होंने यह फ़ैसला किया था कि यदि यहाँ मंदिर बनता भी है तो वे कभी पूजा करने नहीं जाएँगी। सुजाता ने लिखा कि वो किसी ऐसी जगह पर मंदिर को देखना ही नहीं चाहती हैं, जहाँ पहले मस्जिद रहा हो। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में ख़ूब ख़ून-ख़राबा हुआ है और भगवान कभी ऐसा नहीं चाहेंगे कि ख़ून की इन बूँदों से मंदिर की शुद्धता भंग हो।

सुजाता ने दावा किया कि अगर वहाँ मंदिर बन भी जाता है और हिन्दू देवी-देवता वहाँ आकर रहने भी लगते हैं, तब भी मंदिर की दीवारों के बीच निर्दोष लोगों की चीखें गूँजती रहेंगी। उन्होंने हिन्दुओं की ठेकेदारी का ढोंग करते हुए लिखा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ऐसी परिस्थितियों में उनकी प्रार्थनाएँ शायद ही सुनी जाएँगी। सुजाता ने कॉन्ग्रेस के मुखपत्र में लिखा कि ये सारी चीजें क़ानूनी फ़ैसलों और व्यक्तिगत विचारधारा से परे है। पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी पर आरोप लगाते हुए सुजाता ने लिखा कि उन्होंने देवी-देवताओं की चाँदी की मूर्तियों को पिघला कर उससे हथियार बनाए।

सुजाता ने पूछा कि क्या भगवान बल-प्रयोग, हिंसा और ख़ून-ख़राबे के प्रयोग से बने मंदिर में कभी भी रहना चाहेंगे? उन्होंने पूछा कि अगर भवन वहाँ रहने का निर्णय ले भी लेते हैं, तो भी क्या लोगों की प्रार्थनाएँ सफल हो पाएँगी? सुजाता ने इस लेख में हिन्दुओं के प्रति घृणा दिखाते हुए ख़ुद को हिन्दुओं का ठेकेदार बताने की कोशिश है और कई अन्य आपत्तिजनक चीजें लिखी हैं।

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सुजाता ने लिखा है कि आडवाणी ने प्रधानमंत्री का पद पाने के लिए राम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लिया, जो न तो उन्हें कभी मिला और न ही आगे मिलेगा। अडवाणी की आलोचना करते हुए सुजाता ने आगे लिखा कि उनका पीएम न बनना ‘कर्म के फल’ की विचारधारा में उनका विश्वास पक्का करता है। आडवाणी पर उन्होंने निर्दोषों का ख़ून बहाने का आरोप भी लगाया। सुजाता ने ‘नेशनल हेराल्ड’ में लिखा कि आडवाणी के साथ जब भी कुछ बुरा होता है तो उन्हें ख़ूब ख़ुशी होती है। साथ ही वो नरेंद्र मोदी पर आडवाणी के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाना भी नहीं भूलीं।

सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए सुजाता आनंदन ने लिखा है कि राम मंदिर पर शीर्ष अदालत का फ़ैसला केंद्र सरकार से डर कर लिया गया है। साथ ही भविष्य में किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए सुजाता ने लिखा है कि अल्पसंख्यक शांत नहीं बैठेंगे। इसके बाद सुजाता ने शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का भी जिक्र किया है। सुजाता ने लिखा है कि अगर मान भी लिया जाए कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था, तब भी वहाँ मंदिर बनाना अल्पसंख्यकों के साथ क्रूरता होगी। सुजाता ने दावा किया कि ठाकरे मंदिर-मस्जिद की जगह अयोध्या में हॉस्पिटल या स्कूल चाहते थे।

सुजाता ने अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाले पाँचों जजों (जिनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और भावी मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं) के लिए लिखा है कि उन्होंने बुद्धिमत्ता के परिचय नहीं दिया। महाराष्ट्र संकट पर टिप्पणी करते हुए सुजाता ने लिखा है कि उद्धव ठाकरे मंदिर निर्माण के लिए क्रेडिट लेना चाहते हैं और इसीलिए पार्टी नखरे कर रही है। उन्होएँ आरोप लगाया कि उद्धव अपने पिता बाल ठाकरे के उलट सोच रहे हैं। वहीं इस लेख में शरद पवार को सम्मान दिया गया है, क्योंकि उन्होंने ‘शांति रखने की अपील’ की है। साथ ही ‘मॉब लिंचिंग’ नैरेटिव को आगे बढ़ाते हुए सुजाता ने भविष्य में बड़ी अनहोनी की आशंका के साथ अपने लेख को समाप्त किया।

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