राणा अयूब ने विदेशी पत्रकार को J&K में अवैध रूप से घुसाया, भारत-विरोधी प्रचार किया: देश के साथ गद्दारी!

राणा अयूब को 99% विश्वास था कि वो पकड़े जाएँगे, इसके बावजूद उसने डेक्स्टर को अपना मुँह बंद रखने के लिए कहा कि शायद 1 प्रतिशत उम्मीद में भारत के खिलाफ जहर उगलने का काम बन जाए।

हमेशा विवादों में रहने वाली पत्रकार राणा अयूब के बारे में पता चला है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के बाद एक विदेशी पत्रकार को घाटी की स्थिति पर रिपोर्टिंग करने के लिए अवैध तरीके से प्रवेश कराने में मदद की। द न्यू यॉर्कर के पत्रकार डेक्स्टर फिकिंस (Dexter Filkins) ने खुद इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने अपने नवीनतम लेख में इस बात को स्वीकारा है कि उन्हें अयूब द्वारा अवैध रूप से कश्मीर में चोरी-छिपे तरीके से प्रवेश कराया गया था।


द न्यू यॉर्कर के लेख का स्क्रीनशॉट जिसमें डेक्स्टर ने दावा किया कि कैसे राणा अयूब ने उन्हें श्रीनगर हवाई अड्डे पर कश्मीर में प्रवेश कराया

डेक्स्टर लिखते हैं कि उन्हें राणा अयूब द्वारा मुंबई बुलाया गया था। यहाँ अयूब ने उनसे कश्मीर में विदेशी संवाददाताओं पर प्रतिबंध के बावजूद भारत सरकार के आदेश की अवहेलना कर घाटी की रिपोर्टिंग के लिए कहा। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि राणा अयूब ने उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट पर एक जोड़ी स्कार्फ़ दिए और उनसे कहा कि वह एक कुर्ता (एकदम भारतीय पहचान) ख़रीदे, जिससे वो भारतीय लगें। डेक्स्टर ने राणा अयूब का संदर्भ देते हुए अपने लेख में लिखा कि उन्हें 99 प्रतिशत विश्वास था कि वो पकड़े जाएँगे, इसके बावजूद राणा अयूब ने उन्हें अपना मुँह बंद रखने के लिए कहा कि शायद 1 प्रतिशत उम्मीद में देश के खिलाफ जहर उगलने का काम बन जाए।

इसके आगे डेक्स्टर ने लेख में लिखा कि जब वो श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे, तो राणा अयुब ने उन्हें ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क पर जाने से रोक दिया। हवाई अड्डे पर पुलिसकर्मियों और हंगामा का लाभ उठाते हुए, वे दोनों बिना किसी रोक-टोक के और बिना पंजीकरण करवाए आराम से बाहर निकल गए।

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राणा और डेक्स्टर के इस कृत्य ने भारत सरकार द्वारा अनिवार्य क़ानूनों का स्पष्ट तौर पर उल्लंघन किया। विदेशी आदेश 1958 के अनुसार, विदेशी नागरिकों, पर्यटकों के साथ-साथ पत्रकारों को भी “प्रतिबंधित क्षेत्रों” या “संरक्षित क्षेत्रों” में प्रवेश करने के लिए पूर्व सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है। इन क्षेत्रों में मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ हिस्से शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रतिबंधित या संरक्षित क्षेत्रों की यात्रा करने के इच्छुक विदेशी पत्रकारों को अनुमति के लिए सादे प्रारूप पर गृह मंत्रालय (MHA) और निर्धारित प्रारूप में XP डिवीजन में एक साथ आवेदन करना होता है। यह अनुमति XP डिवीजन के परामर्श से MHA द्वारा दी जाती है।

डेक्स्टर, जैसा कि उनके बयान से स्पष्ट है, उन्होंने परमिट के लिए आवेदन नहीं किया था और अवैध रूप से कश्मीर में प्रवेश करने के लिए वो राणा अयूब पर निर्भर थे।

ख़बर के अनुसार, अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के मद्देनज़र, अपने एजेंडे के साथ पत्रकारों द्वारा फैलाई गई ग़लत सूचना से निपटने के लिए एक एहतियाती उपाय के रूप में, भारत सरकार ने उन विदेशी पत्रकारों के प्रवेश की सुविधा के लिए श्रीनगर हवाई अड्डे पर डेस्क की स्थापना की थी। वहाँ से अनुमति मिलने के बाद ही कश्मीर में प्रवेश करना था। लेकिन, डेक्स्टर के पास अपेक्षित अनुमति नहीं होने के कारण, राणा ने हवाई अड्डे के टर्मिनल पर उन्हें अपनी बातों में उलझाया और उन्हें कश्मीर में अवैध तरीके से प्रवेश कराया। इससे साफ़ पता चलता है कि राणा अयूब ने अवैध रूप से एक विदेशी पत्रकार को कश्मीर में घुसने में मदद की।

डेक्स्टर ने राणा अयूब को समर्पित एक चापलूसीपूर्ण लेख लिखकर पत्रकारिता क्षेत्र में अपने कुटिल रिश्ते को उजागर किया है। इस लेख के माध्यम से, उन्होंने राणा आयूब के झूठे तथ्यों को सही करार देने की कोशिश की है। उन्होंने राणा अयूब की विवादास्पद पुस्तक ‘गुजरात फाइल्स’ के लिए उनकी ख़ूब प्रशंसा भी की। जबकि इस   पुस्तक को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुमान के आधार पर लिखी पुस्तक के रूप में सन्दर्भित कर बकवास करार दिया था।

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