Thursday, July 18, 2024
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विवेक बिंद्रा ने SC-ST विरोधी बातें नहीं की, दोहराया ‘राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा’ वाला ही सिद्धांत: जन्म आधारित जाति नहीं, गुण-कर्म आधारित ‘क्लास’ की कर रहे थे बात

नका मतलब था कि जो लोग अपने विचारों एवं बुद्धिमत्ता से समाज को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं वही ब्राह्मण हैं। पूर्व में वेद लिखने वाले ब्राह्मण थे, अब अख़बारों में संपादकीय लिखने वाले ब्राह्मण हो सकते हैं। जो विद्वान हैं और बुद्धिजीवी हैं, वो ब्राह्मण हैं। ये जाति नहीं, वर्ग है, क्लास है।

मोटिवेशनल स्पीकर विवेक बिंद्रा विवादों में हैं। विवेक बिंद्रा मार्केटिंग और बिजनेस सिखाने का काम करते हैं, अपन वीडियो के जरिए लोगों को मोटीवेट करते हैं और अक्सर विवादों में भी रहते हैं। इसी तरह उनका एक नया मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी के साथ भी विवाद चल रहा है। उन पर अपनी पत्नी को पीटने का भी मामला दर्ज है। ऊपर से आरक्षण को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद उनके खिलाफ खूब हो-हंगामा मचाया जा रहा है। मीम-भीम वाले कह रहे हैं कि उन्होंने दलितों के खिलाफ बयान दिया है।

आइए, पहले जानते हैं कि विवेक बिंद्रा ने कहा क्या था। लगभग 1 वर्ष पहले उन्होंने ‘द लल्लनटॉप’ को एक इंटरव्यू दिया था और उस वीडियो में उन्होंने आरक्षण व जाति व्यवस्था पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक लोगों ने दलित-महादलित का विभाजन कर दिया है और वो कहते हैं कि इसका वोट बैंक हमारा है, उसका वोट बैंक हमारा है। उन्होंने कहा था कि नेता महादलित की एक अलग कैटेगरी बना देते हैं, फिर कहते हैं कि वो ही महादलितों के नायक है, वही उनका उद्धार करेंगे।

गुण एवं कर्म के आधार पर समाज का विभाजन: विवेक बिंद्रा

विवेक बिंद्रा का कहना था कि आप महादलितों के अधिकार के लिए लड़िए, लेकिन उन्हें सक्षम बनाने पर काम कीजिए। उन्होंने जो सक्षम बनता जा रहा है उसे आगे बढ़ाने की बात करते हुए इसे मेरिट करार दिया था। उन्होंने कहा था कि सब कुछ फ्री में देकर किसी को बदहाल नहीं बनाना है, बल्कि उसे खुशहाल करना है। बकौल विवेक बिंद्रा, सभी को हिस्सेदारी नहीं मिले बल्कि उसे मिले जो सक्षम है भले ही वो किसी भी जाति, धर्म, तबके या वित्तीय समूह से आता हो।

विवेक बिंद्रा ने ये भी कहा था कि कई बार लोग भगवद्गीता में हिंदूवाद या जातिवाद सिखाया गया है, लोग अज्ञानतावश ऐसी बातें करते हैं। उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने चतुर्वर्ण को स्वयं से उत्पन्न हुई व्यवस्था बताते हुए कहा था कि गुण-धर्म के हिसाब से इसका विभाजन होता है। उन्होंने समझाया था कि जन्म के हिसाब से विभाजन श्रीकृष्ण ने नहीं दिया, आज के नेताओं ने जन्म के आधार पर विभाजन किया – तुम ब्राह्मण के बेटे हो तो ब्राह्मण, तुम शूद्र के बेटे हो तो शूद्र।

विवेक बिंद्रा ने कहा था, “गुण का मतलब हुआ साइकोलॉजी और कर्म मतलब फिजियोलॉजी। साइको-फिजिकल नेचर के हिसाब से डिसाइड किया जाएगा कि कौन क्या करेगा। क्या जज का बेटा बिना पढ़ाई किए जज बन जाता है? वकील का बेटा वकील बन जाता है? उसे जज का गुण-कर्म चाहिए, उसे वकील का गुण-कर्म चाहिए। क्षमता और रुचि के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए, इसे ही मेरिटोक्रेसी कहते हैं। समाज तभी सही बनेगा जब आप काबिल को आगे बढ़ाओगे, सबको नहीं।”

उन्होंने आगे समझाया था कि जो काबिल बन जाएगा वो खुद सबको आगे बढ़ाएगा। मोटिवेशनल स्पीकर ने कहा था कि हर एक को ब्राह्मण नहीं बनाना है। इसके बाद उन्होंने ब्राह्मण का अर्थ ‘इंटेलेक्चुअल क्लास ऑफ सोसाइटी’, क्षत्रिय मतलब ‘एडमिनिस्ट्रेटिव क्लास’, वैश्य मतलब ‘मर्चेंट क्लास’ और शूद्र मतलब ‘असिस्टिंग क्लास’ बताया था। उन्होंने कहा था कि ये लोग माइंस वन हैं, जो कभी नंबर वन नहीं हो सकते, उन्हें लीडर मत बनाइए। उन्होंने कहा था कि ‘शूद्र’ निर्णय नहीं ले सकते, लेकिन निर्णय को लागू बहुत अच्छे से करवा सकते हैं।

विवेक बिंद्रा ने SC-ST समाज के खिलाफ कुछ नहीं कहा

विवेक बिंद्रा के बारे में लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है, उनकी बातें लोगों को बेवकूफाना लग सकती हैं। लेकिन, यहाँ उन्होंने जो बातें की हैं उसमें उन्होंने किसी जाति विशेष को निशाना नहीं बनाया है। उन्होंने अनुसूचित जाति या जनजाति के संबंध में कोई बुरी बात नहीं कही है। उन्होंने यहाँ जाति नहीं बल्कि क्लास की बात की है। क्लास, अर्थात गुण-कर्म के हिसाब से विभाजित किए गए वर्ग जिनके बारे में उन्होंने समझाया भी कि जज का बेटा बिना पढ़ाई किए जज नहीं बन सकता।

उनके उदाहरण को और समझने की कोशिश करते हैं। उनका मतलब था कि जो लोग अपने विचारों एवं बुद्धिमत्ता से समाज को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं वही ब्राह्मण हैं। पूर्व में वेद लिखने वाले ब्राह्मण थे, अब अख़बारों में संपादकीय लिखने वाले ब्राह्मण हो सकते हैं। जो विद्वान हैं और बुद्धिजीवी हैं, वो ब्राह्मण हैं। ये जाति नहीं, वर्ग है, क्लास है। जो लोग किताबें लिख रहे हैं और किताबों को पढ़ कर लोग प्रभावित हो रहे हैं, तो वो लेखक भी ब्राह्मण हो गए।

इसी तरह, सत्ताधीशों को उन्होंने ‘क्षत्रिय’ कहा। उनका अर्थ था कि जैसे पहले राजा ‘क्षत्रिय’ कहलाता था, अब मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक ‘क्षत्रिय’ हो गए। जिनका शासन चल रहा है, वो क्षत्रिय। इसी तरह उन्होंने व्यापारियों को ‘वैश्य’ कहा। जो कारोबार करते हैं, वो वैश्य। इसका तात्पर्य भी जाति नहीं बल्कि उस समूह से है। ‘शूद्र’ वर्ग में उन्होंने उन्हें रखा जो काम में मदद करते हैं। किसान को खेती में मदद करने वाला ‘शूद्र’ हुआ। उनका मतलब ऐसे वर्ग से था जो पढ़ा-लिखा नहीं है।

ध्यान दीजिए, विवेक बिंद्रा ने ऐसा बिलकुल नहीं कहा कि शूद्र का बेटा शूद्र ही होगा। जबकि जाति व्यवस्था में तो ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण और निषाद का बेटा निषाद होता है। जाति प्रमाण-पत्र भी इसी हिसाब से बनते हैं। सरकार भी इसी हिसाब से सुविधाएँ देती हैं। जबकि विवेक बिंद्रा ने विभिन्न वर्गों की बात की है। उन्होंने ये नहीं कहा कि अनुसूचित जातियों या जनजातियों के लोगों को आगे मत बढ़ाओ, उनका मतलब था कि जो पढ़ा-लिखा नहीं है और जिसे समझ नहीं है वो सत्ता नहीं चला सकता, उसका बेटा पढ़-लिख लेगा तो वो फिर सत्ता चला सकता है।

विवेक बिंद्रा बेवकूफ हो सकते हैं लेकिन दलित विरोधी नहीं। क्योंकि, एक तरह से वो खुद एक कारोबारी हैं और उन्हें एक बड़े दर्शक वर्ग का समर्थन चाहिए होता है यूट्यूब पर। वो कभी नहीं चाहेंगे कि SC-ST समाज को वो भला-बुरा कहें, जिससे दर्शकों का एक बड़ा वर्ग उनसे दूर हो जाए। उलटा उन्होंने ‘राजा का बेटा राजा’ वाले सिद्धांत के खिलाफ बात की है। यही तो पटना के ‘सुपर 30’ कोचिंग संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार की बायोपिक में हृतिक रोशन का डायलॉग है।

इस पर तो खूब तालियाँ बजी थीं। वामपंथी विचारक भी अक्सर खुद को दलितों का ठेकेदार बनाने के लिए ‘राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा’ वाले भाषण देते हैं। विवेक बिंद्रा ने भी तो यही कहा – बिना पढ़े जज का बेटा जज नहीं बनेगा। ‘क्लास’ के वर्गीकरण की मानें तो जज के कोर्ट का गार्ड ‘शूद्र’ है, स्पष्ट है उसे जज की कुर्सी पर नहीं बिठाया जा सकता। हाँ, उसका बेटा ज़रूर पढ़-लिख कर जज बन सकता है। यही तो विवेक बिंद्रा की थ्योरी थी।

पत्नी को पीटने और संदीप माहेश्वरी से विवाद को लेकर चर्चा में

हमने विवेक बिंद्रा के उस बयान का अर्थ समझाने की कोशिश की है तो इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि वो जो भी करें उनका किसी को समर्थन करना चाहिए। वो कई कारणों से आजकल विवादों में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी को कमरे में बंद कर के इतना पीटा कि उसके कान के पर्दे फट गए। सह ही गाली-गलौज किया, मोबाइल फोन छीन लिया। पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। नोएडा सेक्टर-16 थाने में इस मामले में FIR दर्ज हुई है।

पीड़िता ने अपने हाथ-पाँव में पड़े नीला निशान को दिखाते हुए बताया है कि उसकी कितनी बेरहमी से पिटाई की गई है। बाएँ हाथ में कट का निशान है। सिर के पिछले हिस्से में 30-40 चाँटे मारे जाने की बात उन्होंने बताई है। यानिका से विवेक बिंद्रा की शादी 6 दिसंबर, 2023 को ही हुई थी। इसके 2 दिन बाद ही ये सब हो गया। ‘बड़ा बिजनेस’ के CEO विवेक बिंद्रा के यूट्यूब चैनल पर 2 करोड़ से भी अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।

पहली पत्नी गीतिका सबरवाल के साथ भी विवेक बिंद्रा का अदालत में विवाद चल रहा है। फरवरी 2023 में मोरबी के टाइल्स को घटिया बताने को लेकर कंपनी ने उनकी आलोचना की थी, जिसके बाद उन्हें वीडियो हटाना पड़ा था। संदीप माहेश्वरी के साथ भी उनका वीडियो के जरिए आरोप-प्रत्यारोप चला था। एक वीडियो में सिखों के 10वें गुरु गोविन्द सिंह का कार्टून दिखाने के मामले में भी विवाद हुआ था। सिखों के विरोध के बाद उन्हें वो वीडियो हटाना पड़ा था।

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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