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दीपक यू और डिजिटल लिंचिंग का खौफनाक सच, एक वायरल रील ने छीन ली जिंदगी

दीपक कोई अपराधी नहीं था। वह एक मेहनती सेल्स मैनेजर था। अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा और परिवार का ब्रेड-अर्नर था। लेकिन एक वायरल रील ने उसकी पूरी ज़िंदगी छीन ली।

केरल के कोझिकोड से सामने आया यू दीपक का मामला आज के भारत में फैलती डिजिटल लिंचिंग की सबसे भयावह मिसाल बन चुका है। दीपक कोई अपराधी नहीं था। वह एक मेहनती सेल्स मैनेजर था। अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा और परिवार का ब्रेड-अर्नर था। लेकिन एक वायरल रील ने उसकी पूरी ज़िंदगी छीन ली।

केरल का पूरा मामले आखिर था क्या?

शिमजिथा मुस्तफ़ा नाम की महिला ने दीपक का वीडियो रिकॉर्ड किया और उस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर डाल दिया। देखते ही देखते वह वीडियो रील बनकर वायरल हो गया। 20 लाख से ज़्यादा लोग उसे देख चुके थे। बिना किसी पुलिस जाँच के, बिना कंप्लेंट/ एफआईआर के, बिना अदालत के फैसले के, सोशल मीडिया की भीड़ ने दीपक को दोषी घोषित कर दिया।

गालियाँ, धमकियाँ, चरित्र हनन और लगातार मानसिक दबाव। इस दबाव को दीपक सह नहीं सका और उसने आत्महत्या कर ली। सवाल सीधा है… क्या अब सोशल मीडिया ही न्यायपालिका है? अगर किसी व्यक्ति को सिर्फ एक वायरल वीडियो के आधार पर अपराधी बना दिया जाए, तो फिर कानून, पुलिस और अदालतों की भूमिका क्या रह जाती है?

दीपक यू को किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया था लेकिन समाज ने उसे सज़ा दे दी और वह सजा मौत साबित हुई। यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह उस सिस्टम का आईना है जहाँ डिजिटल ट्रायल पहले होता है, न्याय बाद में।

यह पहली बार नहीं है, करीब 8 साल पहले ‘दंगल’ फिल्म के समय भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था। अभिनेत्री ज़ायरा वसीम ने एक युवक विकास पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया। मीडिया और सोशल मीडिया ने युवक को तुरंत दोषी मान लिया। मामला अदालत तक पहुँचा और आज भी न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है।

मतलब साफ़ है: अंतिम फैसला आज तक नहीं आया, लेकिन आरोपित को वर्षों तक सामाजिक बदनामी और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। यही डिजिटल ट्रायल की सबसे खतरनाक सच्चाई है, सज़ा पहले, फैसला बाद में।

एक खतरनाक ट्रेंड

आज देश में एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आ रहा है-
आरोप लगते ही वीडियो या रील वायरल कर दी जाती है
बिना जाँच, बिना सुनवाई युवक को अपराधी बना दिया जाता है
कई मामलों में इसके बाद ब्लैकमेल और वसूली भी होती है

यह किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ बयान नहीं है, लेकिन यह सच है कि कई मामलों में हिंदू लड़कों को टारगेट किया गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उनकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी जाती है।

मेरे पास ऐसे कई मामले हैं जहाँ हिंदू लड़कों को झूठे आरोपों में फँसाया गया, उन्हें सामाजिक रूप से तोड़ा गया और इतना मानसिक दबाव डाला गया कि वे आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गए।

हर महिला झूठी नहीं होती, लेकिन हर आरोप को सच मान लेना खतरनाक है। यह मान लेना कि हर आरोप अपने-आप में सच है, समाज को बेहद खतरनाक दिशा में ले जा रहा है। आज मोबाइल कैमरा हथियार बन चुका है और सोशल मीडिया की भीड़ जज। कानून चुप है, और भीड़ फैसला सुना रही है।

एक ज़रूरी अपील- दीपक यू अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उसके बूढ़े माता-पिता आज भी ज़िंदा हैं- अकेले, टूटे हुए और आर्थिक संकट में।

हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि-

  • दीपक यू के परिवार को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ी जाए।
  • डिजिटल लिंचिंग के दोषियों पर सख़्त कानूनी कार्रवाई हो।
  • समाज मिलकर उसके माता-पिता को आर्थिक सहायता दे।

आज अगर हम चुप रहे, तो कल कोई और दीपक होगा। यह लड़ाई सिर्फ दीपक की नहीं, यह लड़ाई हम सबकी है।

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Barkha Trehan
Barkha Trehan
Activist | Voice Of Men | President, Purush Aayog | TEDx Speaker | Hindu Entrepreneur | Director of Documentary #TheCURSEOfManhood http://youtu.be/tOBrjL1VI6A

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