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अखिलेश यादव ने लोकसभा में उठाया जिस मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट का मुद्दा, वो सपा की भ्रष्ट सरकार की देन: जानें- योगी सरकार कैसे लगा रही जख्मों पर मरहम

योगी आदित्यनाथ सरकार सुप्रीम कोर्ट में आम व्यापारियों की रोजी-रोटी और आशियाने बचाने के लिए लगातार लड़ रही है। अखिलेश यादव का संसद में रोना-धोना बेशर्मी का चरम है, जिसमें सौ बिल्लियाँ खाकर चूहा हज को निकला है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (नारी वंदन अधिनियम) की चर्चा के दौरान मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट का मुद्दा उठाया। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “महिलाओं का दर्द क्या होता है, ये मेरठ के दुकानदारों की महिलाओं से पूछो।” अखिलेश ने सुझाव दिया कि अगर यह बिल इतना सही है तो इसे मेरठ और नोएडा के परिवारों के बीच घोषित किया जाए।

अखिलेश यादव ने ये बयान लोकसभा में दिया, जोकि पूरी तरह से राजनीतिक स्टंट ही है। क्योंकि सच्चाई इससे कोसों दूर है। दरअसल, मेरठ शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में जो ध्वस्तीकरण और सीलिंग चल रही है, वह सपा सरकार (2012-2017) की भ्रष्टाचार, लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण की देन है। यह कोई अचानक संकट नहीं, बल्कि 2012-17 में बोए गए बीजों का वटवृक्ष है। जबकि योगी आदित्यनाथ सरकार सुप्रीम कोर्ट में आम व्यापारियों की रोजी-रोटी और आशियाने बचाने के लिए लगातार लड़ रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का संसद में रोना-धोना बेशर्मी का चरम है, जिसमें सौ बिल्लियाँ खाकर चूहा हज को निकला है।

क्या है मामला? कैसे सपा सरकार ने दिया भ्रष्ट लोगों को संरक्षण

मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में 859 आवासीय प्लॉट 1978 में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (AEVP) द्वारा आवंटित किए गए थे। मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार, ये प्लॉट स्पष्ट रूप से आवासीय उपयोग के लिए थे। मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार इन पर व्यावसायिक निर्माण या सेटबैक का अतिक्रमण अवैध था। दशकों तक इन प्लॉटों पर दुकानें, कॉम्प्लेक्स, स्कूल, अस्पताल और बैंक बनते गए। लेकिन असली समस्या 2012-2017 के सपा शासन में उभरी।

सपा सरकार के दौरान आवास विकास परिषद ने बार-बार शिकायतें कीं कि आवासीय प्लॉटों पर अवैध व्यावसायिक निर्माण हो रहे हैं। परिषद ने मास्टर प्लान उल्लंघन, बिना अनुमति के निर्माण और भ्रष्ट तरीके से कब्जे की रिपोर्ट भी दी। लेकिन सपा सरकार ने न केवल परिषद की नहीं सुनी, बल्कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के जरिए इन अतिक्रमणों को संरक्षण दिया। स्थानीय सपा नेताओं और अधिकारियों के बीच साँठ-गाँठ से पैसे लेकर अवैध निर्माणों को छूट मिली। जब परिषद ने कार्रवाई की कोशिश की तो धमकियाँ दी गईं और सरकार का दबाव डाला गया।

ये रहा 13-18 अगस्त 2013 का आधिकारिक दस्तावेजी सबूत

यह दस्तावेज उत्तर प्रदेश आवास एवँ विकास परिषद, निर्माण खंड-8, मेरठ का है (पत्रांक 1716/अधि0अभि0/नि0ख0-8/मेरठ/4-8, दिनांक 17-8-2013)। यह शास्त्री नगर, सो-661/6 (सेंट्रल मार्केट क्षेत्र) के आवासीय प्लॉट पर अवैध व्यावसायिक निर्माण की शिकायत है।

परिषद ने लिखा-

  • प्लॉट के फ्रंट भाग पर पूर्व से ही अवैध निर्माण हो रहा था।
  • 23.7.2013 को फील्ड स्टाफ को धमकी दी गई।
  • 29.7.2013 को नोटिस जारी किया गया।
  • 30.7.2013 को थाना नौचंदी में रिपोर्ट दर्ज की गई।
  • 6.8.2013 को निर्माणकर्ता विनोद अरोड़ा ने फिर अवैध निर्माण शुरू किया।
  • 7.8.2013 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और नगर मजिस्ट्रेट को लिखा गया।
  • 13.8.2013 को शाम 5 बजे 4-5 लड़के असिस्टेंट इंजीनियर के घर पहुँचे और उसे धमकाया। उन्होंने कहा कि हम देख लेंगे।
  • 17.8.2013 को फिर मोबाइल पर धमकी दी गई (नंबर 9997949798)।

इस मामले में परिषद ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से सख्त कार्रवाई की माँग की और निर्माणकर्ता विनोद अरोड़ा को जिम्मेदार ठहराया। दस्तावेज़ पर अरबिंद कुमार (अधिशासी अभियंता) के हस्ताक्षर हैं।

यह पत्र सपा शासन (अखिलेश यादव सरकार) के बीच का है। परिषद ने कानून के अनुसार कार्रवाई की माँग की गई, लेकिन सपा सरकार ने परिषद की नहीं सुनी। अवैध निर्माण नहीं रुके। जो कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रमाण है। एक तरफ परिषद के अधिकारियों को धमकियाँ मिलती रही, तो दूसरी तरफ सपा सरकार ने मौन साधे रखा और अपराधियों को खुला संरक्षण दिया जाता रहा।

बता दें कि साल 2013 में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन अवैध निर्माणों पर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था, लेकिन सपा सरकार ने उसे लागू नहीं किया। परिणामस्वरूप 2017 तक सैकड़ों अवैध कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए। सपा ने व्यापारियों को भ्रम में रखा कि सब ठीक है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, क्योंकि सरकार उनके साथ है।

योगी सरकार ने साल 2025 में की सुधार की कोशिश

इन घटनाक्रमों के बाद साल 2017 में योगी सरकार सत्ता में आई। इसके बाद मेरठ में आवास विकास परिषद ने फिर से शिकायतें बढ़ाईं। इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए साल साल 2025 में यूपी सरकार ने मास्टर प्लान में संशोधन (बाय-लॉ) लाकर इन क्षेत्रों को नियमित करने का प्रयास किया। उद्देश्य था पुरानी गलतियों को सुधारते हुए आम लोगों का आशियाना बचाना।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। दिसंबर 2024 और सितंबर 2025 के आदेशों में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आवासीय प्लॉटों पर व्यावसायिक उपयोग अवैध है। सुप्रीम कोर्ट ने AEVP को 859 संपत्तियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद अक्टूबर 2025 में 22 दुकानों का कॉम्प्लेक्स ध्वस्त कर दिया गया। इसके अगले चरण में अप्रैल 2026 में 44 संपत्तियों को सील किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद को ‘पब्लिक ह्यू एंड क्राई’ का हवाला देकर ध्वस्तीकरण रोकने पर फटकार लगाई और अवमानना की कार्यवाही चलाई। कोर्ट का रुख था कि कानून का राज सर्वोपरि है, दशकों की अनदेखी अब नहीं चलेगी।

लेकिन योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आम लोगों की लड़ाई लड़ी। सरकार ने कोर्ट से गुहार की कि सपा काल की लापरवाही से भ्रमित व्यापारियों को अचानक बर्बाद न किया जाए। वैकल्पिक व्यवस्था, मुआवजा और सीमित राहत की दलीलें दीं। कोर्ट ने स्कूलों को सामान निकालने का समय दिया। यूपी सरकार आज भी सुप्रीम कोर्ट में पीड़ितों की रोजी-रोटी बचाने के लिए लड़ रही है।

मेरठ में आज आज 1400+ दुकानें प्रभावित हैं, लेकिन जिम्मेदार सपा की 2012-17 की भ्रष्ट नीति है, न कि योगी सरकार। अखिलेश यादव संसद में BJP को दोषी ठहरा रहे हैं, जबकि उनकी सरकार ने ही बीज बोए।

योगी सरकार ने पीड़ितों की मदद के लिए किए मानवीय प्रयास

योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बार-बार कहा कि हम कानून का पालन करेंगे, लेकिन आम आदमी का आशियाना भी बचाना हमारा कर्तव्य है। इसके लिए व्यापारियों को वैकल्पिक बाजार, मुआवजा पैकेज और पुनर्वास की योजनाएँ शुरू की जा रही हैं। यह योगी सरकार का मानवीय चेहरा है। जो सपा की तरह दबाव या भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि कानून और जनहित का संतुलन बनाकर चल रही है।

मेरठ सेंट्रल मार्केट का मामला केस स्टडी है। यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार कैसे दशकों बाद आम आदमी को संकट में डालता है। भले ही लोकसभा में अखिलेश यादव इस मामले में राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए बयान दे रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मेरठ के व्यापारी सपा की देन से जूझ रहे हैं और योगी सरकार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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