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‘हिंदुओं की आबादी 50% से भी कम, अब बचाव के लिए मिले लाइसेंसी हथियार’ : मुर्शिदाबाद में BJP विधायक ने निकाली ‘हिंदू बचाओ’ रैली, गवर्नर भी बोले- ‘यहाँ हालात बर्बर’

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "मेरे ख्याल में ग्राम रक्षा समिति का गठन किया जाना चाहिए और उसके बाद आम लोगों को उनकी सुरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार मुहैया कराए जाने चाहिए, क्योंकि वहाँ बांग्लादेश की सीमा है।"

मुर्शिदाबाद हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बंगाली हिंदुओं के लिए एक ‘हिंदू बचाओ’ रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने ग्राम रक्षा कमेटी बनाने की माँग की और साथ ही ये भी कहा कि हिंदुओं को उनकी सुरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार दिए जाने चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “मेरे ख्याल में ग्राम रक्षा समिति का गठन किया जाना चाहिए और उसके बाद आम लोगों को उनकी सुरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार मुहैया कराए जाने चाहिए, क्योंकि वहाँ बांग्लादेश की सीमा है।”

भाजपा नेता ने जोर देकर कहा, “मेरी दूसरी माँग यह है कि चुनाव के दौरान वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए, क्योंकि मुर्शिदाबाद में हिंदुओं की आबादी अब 50 प्रतिशत से कम है।”

उन्होंने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में रोके जाने को लेकर कहा, “मैं जमीनी हकीकत जानता हूँ। वे केवल विपक्ष के नेता को मुर्शिदाबाद जाने से रोक रहे हैं, जबकि बाकी सभी को अनुमति है। मैंने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले की जल्द ही सुनवाई होगी।”

इस माँग के अलावा अपने ट्वीट में सुवेंदु अधिकारी ने मुर्शिदाबाद के पीड़ितों की व्यथा बताते हुए दो घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे समशेरगंज के धूलियान में गणेश घोष और छाया सिंह के परिवार को निशाना बनाया गया और उनकी जमापूँजी में आग लगा दी गई। किसी ने नया घर बनाने के लिए पैसा इकट्ठा किया था तो किसी ने बेटी की शादी के लिए

सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि उन्होंने दोनों परिवार की मदद कर दी है। एक को पाँच लाख और एक को डेढ़ लाख रुपए दे दिए हैं। लेकिन ये सोचने वाली बात है कि ये दोनों परिवार का वक्फ से संबंध नहीं था। इनका अपराध बस ये था कि ये हिंदू हैं।

बता दें कि बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी 18 अप्रैल को मुर्शिदाबाद में हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। हालात देखने के बाद उन्होंने मुर्शिदाबाद के हालातों को ‘अजीब और बर्बर’ बताया।

उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए उन्होंने अपनी माँगे रख दी हैं। जल्द ही रिपर्ट राज्य सरकार और केंद्र सरकार को दी जाएगी। अभी हाल ये है कि लोगों का भरोसा टीएमसी से उठ गया है। चुनाव से पहले हिंसा बंगाल में आम हो गई है। एक समुदाय अपनी ताकत दूसरे पर थोपने की कोशिश कर रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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