Homeराजनीति'राहुल गाँधी के परिवार के लिए अलग कानून होना चाहिए' : कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद...

‘राहुल गाँधी के परिवार के लिए अलग कानून होना चाहिए’ : कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी की माँग, BJP नेता ने पूछा- इतनी चाटुकारिता कौन करता है…

प्रमोद तिवारी ने कहा है, "यदि कोई शिक्षक है और वह किसी तरह से हत्या के मामले में फँस गया है। ऐसे में उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी क्योंकि वह आदतन अपराधी नहीं है। इसलिए राहुल गाँधी को सजा देने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, राहुल गाँधी की पृष्ठभूमि सबका आँकलन होना चाहिए था।"

राहुल गाँधी की संसद सदस्यता खत्म होने के बाद से कॉन्ग्रेस में बौखलाहट मची हुई है। इस बीच कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी के परिवार के लिए कानून अलग होना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर भाजपा हमलावर है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा है कि राहुल गाँधी के परिवार के लिए कानून अलग होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि दोषी ठहराने में कानून बराबर होना चाहिए लेकिन सजा देने के लिए कानून अलग होना चाहिए। जब किसी को दोषी ठहराया जाता है तो उसमें किसी का परिवार या किसी की पृष्ठभूमि नहीं देखी जाती बल्कि अपराध देखा जाता है। लेकिन जब सजा देने की बात आती है तो उसमें आदमी का चाल चलन, उसका स्तर, पारिवारिक पृष्ठभूमि देखी जानी चाहिए।

प्रमोद तिवारी ने उदाहरण देते हुए आगे कहा है, “यदि कोई शिक्षक है और वह किसी तरह से हत्या के मामले में फँस गया है। ऐसे में उसे मौत की सजा नहीं दी जाएगी क्योंकि वह आदतन अपराधी नहीं है। इसलिए राहुल गाँधी को सजा देने में उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, राहुल गाँधी की पृष्ठभूमि सबका आँकलन होना चाहिए था।”

यही नहीं, प्रमोद तिवारी ने ट्वीट कर कहा है कि वह अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने लिखा है, “बोलने के पहले पढ़ना चाहिए। मैं अपने बयान पर कायम हूँ। गाँधी परिवार को दोषी ठहराने के लिए नहीं परन्तु सजा देने के मामले में दो प्रधानमंत्री की शहादत, राहुल गाँधी का सांसद होना, पहली बार अपराध करना, कोई आपराधिक इतिहास न होने के कारण अलग कानूनी नजरिए से देखना चाहिए।”

हालाँकि उनके इस बयान को लेकर भाजपा हमलावर है। भाजपा के नवीन जिंदल ने कहा है कि इतनी बड़ी चाटुकारिता कौन करता है। वहीं भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है कि गाँधी परिवार के लिए अलग कानून की माँग करने वाले लोग कल अलग देश की माँग भी कर सकते हैं। उन्होंने लिखा है, ‘सजा पर गाँधी परिवार के लिए देश में अलग कानून होना चाहिए’ -प्रमोद तिवारी, कॉन्ग्रेस सांसद। गाँधी परिवार के लिए इन्हें आज अलग कानून चाहिए, कल अलग न्यायालय चाहिए, फिर अलग संसद चाहिए फिर कहीं ये अलग देश की माँग भी कर सकते हैं। यही कॉन्ग्रेस पार्टी का असली चाल, चरित्र और चेहरा है।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -