Saturday, July 13, 2024
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गहलोत-कमलनाथ के राजनीतिक करियर का होगा The End? खुलने ही वाली है 5 राज्यों के वोटों की पेटियाँ, मिजोरम में इंदिरा के ‘बॉडीगार्ड’ तो तेलंगाना में ओवैसी पर नज़र

छत्तीसगढ़ में पहले के मुकाबले भाजपा ने अच्छा-खासा ग्राउंड कवर किया है। कॉन्ग्रेस को यहाँ बढ़त दिखाई जा रही है, लेकिन भाजपा के पक्ष में भी माहौल चुनाव नजदीक आते-आते बना।

पाँच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। रविवार (3 दिसंबर, 2023) को दोपहर तक साफ़ हो जाएगा कि 4 राज्यों में कौन कहाँ सरकार बना रहा है क्योंकि उसी दिन सुबह 8 बजे मतगणना शुरू हो जाएगी। जहाँ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की सरकारें हैं, वहीं मध्य प्रदेश में भाजपा सत्ता पर आसीन है। इसी तरह तेलंगाना और मिजोरम की बात करें तो वहाँ क्रमशः स्थानीय दल BRS और MNF का राज है। मिज़ोरम में मतगणना 1 दिन आगे बढ़ाई गई है, यानी चुनाव परिणाम 4 दिसंबर को आएँगे।

सबसे बड़ा मुकाबला राजस्थान और मध्य प्रदेश का माना जा रहा है, जहाँ एग्जिट पोल्स के हिसाब से भी काँटे की टक्कर है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रतिष्ठा दाँव पर है। कॉन्ग्रेस के कमलनाथ का तो राजनीतिक करियर ही डिसाइड हो जाएगा। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी राजनीतिक करियर का सवाल है, ऐसे में इस चुनाव में उन्होंने खूब मेहनत की है। भाजपा की जीत होने पर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनेंगी या कोई और, ये एक बड़ा सवाल है।

उधर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड भी खूब खेला और रामायण से जुड़े स्थलों के विकास के साथ भाजपा के हिंदुत्व की काट ढूँढने की कोशिश की। वहाँ भाजपा किसी एक चेहरे की बदौलत नहीं लड़ रही है, क्योंकि लगातार 15 साल राज्य के CM रहे रमन सिंह भी अब उतने प्रभावशाली नहीं रहे। फिर भी, पहले के मुकाबले भाजपा ने अच्छा-खासा ग्राउंड कवर किया है। कॉन्ग्रेस को यहाँ बढ़त दिखाई जा रही है, लेकिन भाजपा के पक्ष में भी माहौल चुनाव नजदीक आते-आते बना। भूपेश बघेल पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे।

मिजोरम में बड़ा ही रोचक परिदृश्य देखने को मिल रहा है जहाँ IPS अधिकारी से नेता बने लालदुहोमा की नई पार्टी ZPM की जीत के आसार नज़र आ रहे हैं और मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा का पत्ता कटने की भविष्यवाणी हो रही है। इंदिरा गाँधी के सिक्योरिटी इंचार्ज रहे लालदुहोमा पहले ऐसे सांसद हैं जिन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराया गया था। बतौर विधायक भी वो अयोग्य साबित हो चुके हैं, हालाँकि फिर उन्होंने वापस सेरछिप विधानसभा क्षेत्र को जीत लिया।

तेलंगाना की बात करें तो मुख्यमंत्री KCR ने अपनी पार्टी का नाम TRS (तेलंगाना राष्ट्र समिति) से बदल कर BRS (भारत राष्ट्र समिति) कर के अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा तो ज़ाहिर कर दी, लेकिन एग्जिट पोल्स का कहना है कि वहाँ उनके 10 वर्षों के राज का अंत होगा और कॉन्ग्रेस सरकार बनाएगी। भाजपा की भी वहाँ हवा है। हैदराबाद को असदुद्दीन ओवैसी के AIMIM का गढ़ माना जाता है, वहाँ मुकाबला दिलचस्प होगा। क्या BRS-AIMIM मिल कर सत्ता बचा पाएगी?

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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