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‘गौरक्षकों’ को लात मारकर जेल में डालो: बकरीद से पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मंत्री बेटे का कर्नाटक पुलिस को आदेश

प्रियांक खड़गे ने आगे कहा है, "जानवरों को लाने और ले जाने को लेकर कानून बहुत स्पष्ट है। अगर किसी के पास पर्याप्त दस्तावेज हैं तो उसे परेशान नहीं किया जाए। चाहे फिर वह ग्रामीण क्षेत्रों में हो या शहर की सीमा के भीतर।"

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने बकरीद से पहले गौरक्षकों और बजरंग दल के सदस्यों को जेल में डालने की बात कही है। प्रियांक खड़गे ने कहा है कि जो लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं और कहते हैं कि वे इस दल से हैं, उन्हें लात मारकर जेल में डाल देना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रियांक खड़गे ने कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक के दौरान उन्होंने बजरंग दल का नाम लिए बिना धमकी देते हुए कहा है, “जो लोग शॉल ओढ़कर कानून अपने हाथ में लेते हैं और कहते हैं कि वे इन दलों से हैं उन्हें लात मारकर सलाखों के पीछे डाल दीजिए। अगर कोई स्वघोषित नेता है और सांप्रदायिक मुद्दों के नाम पर जहर उगलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मैं अनावश्यक सांप्रदायिक दंगे नहीं चाहता।”

प्रियांक खड़गे ने आगे कहा है, “जानवरों को लाने और ले जाने को लेकर कानून बहुत स्पष्ट है। अगर किसी के पास पर्याप्त दस्तावेज हैं तो उसे परेशान नहीं किया जाए। चाहे फिर वह ग्रामीण क्षेत्रों में हो या शहर की सीमा के भीतर।”

पशुपालन मंत्री कर चुके हैं गाय काटने की वकालत..

बता दें कि कर्नाटक के पशुपालन मंत्री के वेंकटेश ने इसी महीने 4 जून को कहा था कि भाजपा सरकार एक विधेयक लाई थी, जिसमें उसने भैंस और भैंसा का वध करने की अनुमति दी थी, लेकिन कहा था कि गोहत्या नहीं होनी चाहिए। भाजपा ने सरकार ने इसकी सजा को भी कड़ा कर दिया था।

उन्होंने आगे कहा था “जब भैंस और भैंसा का वध किया जा सकता है तो गायों का क्यों नहीं? यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है। हम चर्चा करेंगे और फैसला लेंगे। इस सिलसिले में अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है।”

वेंकटेश ने कहा कि बूढ़ी गायों की देखभाल करने और उनकी मौत होने पर उन्हें दफनाने में किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि हाल में उनके फार्म हाउस में एक गाय की मौत हो गई। उस मृत गाय को दफनाने के लिए उन्हें जेसीबी की मदद लेनी पड़ी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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