Wednesday, July 17, 2024
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आरक्षण OBC के लिए, लेकिन 91% फायदा मुस्लिमों को… बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण का ऐसा है हाल, 71 नई जातियों में से 66 मुस्लिमों की जोड़ दी

NCBC के इस दौरे में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने ओबीसी की लिस्ट में कुल 179 जातियों को शामिल किया है। इनमें से 118 जातियाँ मुस्लिम हैं।

‘राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC)’ ओबीसी समाज को मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों को लेकर सक्रियता दिखा रहा है। आयोग ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को OBC आरक्षण में सुधार करने का निर्देश दिया है। दरअसल, पिछड़ा वर्ग आयोग ने पाया है कि बंगाल सरकार ओबीसी कोटे की A कैटेगरी में 91% से अधिक आरक्षण मुस्लिमों को दे रही है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने गत 25 फरवरी को पश्चिम बंगाल का दौरा किया था। इस दौरे में बंगाल सरकार की संस्था कल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRI) की रिपोर्ट में सामने आया है कि बंगाल सरकार ने हिंदू धर्म से धर्मांतरित होकर मुस्लिम बने लोगों को भी ओबीसी की लिस्ट में शामिल किया है। हालाँकि जब पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने बंगाल सरकार से हिंदुओं के धर्मांतरण की समय सीमा व आँकड़ों को लेकर रिपोर्ट माँगी तो सरकार ने इसके स्पष्ट आँकड़े होने से इनकार कर दिया।

NCBC के इस दौरे में यह भी सामने आया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने ओबीसी की लिस्ट में कुल 179 जातियों को शामिल किया है। इनमें से 118 जातियाँ मुस्लिम हैं। वहीं, हिंदुओं की सिर्फ 61 जातियों को ही OBC की लिस्ट में शामिल किया गया है। इसको लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर का कहना है कि पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में से 70% हिंदू हैं। वहीं, 27% मुस्लिम हैं। इसके बाद भी बड़ी संख्या में मुस्लिम जातियों को ओबीसी की लिस्ट में शामिल किया गया है। नीचे लगे वीडियो में आप 1 मिनट के बाद से अहीर के इस बयान को सुन सकते हैं।

हंसराज अहीर ने यह भी कहा है कि इस दौरे में आयोग ने पाया है कि 2011 से पहले बंगाल में ओबीसी की 108 जातियाँ थीं। लेकिन इसके बाद इसमें 71 जातियों को जोड़ दिया गया। इसमें से 66 जातियाँ मुस्लिमों की जोड़ी गई। वहीं, हिंदुओं की 5 जातियों को ही ओबीसी की लिस्ट में जगह मिल पाई। आयोग को लगता है कि बंगाल सरकार की संस्था CRI की गलत रिपोर्ट के चलते मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल किया गया है। 

मुस्लिमों को 91% आरक्षण

पिछड़ा वर्ग आयोग के जाँच के दौरान पाया है कि पश्चिम बंगाल में ओबीसी को 2 कैटेगरी में बाँटा गया है। इसमें A कैटेगरी में अति पिछड़ा वर्ग व B कैटेगरी में पिछड़ा वर्ग की जातियों को शामिल किया गया है। A कैटेगरी में कुल 81 जातियों में से बंगाल सरकार ने मुस्लिमों की 73 जातियों को जगह दी है। वहीं, इस कैटेगरी में हिंदुओं की मात्र 8 जातियॉं ही शामिल हैं। वहीं, B कैटेगरी की 98 जातियों में हिंदुओं की 53 जातियॉं और मुस्लिमों की 45 जातियॉं शामिल हैं। 

इस दौरान राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने जाँच में पाया है कि बंगाल सरकार की सरकारी नौकरियों में बड़े पैमाने पर मुस्लिमों को आरक्षण दिया गया है। दरअसल, OBC की A कैटेगरी में मुस्लिमों को सरकारी नौकरी में 91.5% आरक्षण मिल रहा है। वहीं, हिंदू OBC को सिर्फ 8.5 प्रतिशत ही आरक्षण दिया जा रहा है। वहीं, B कैटेगरी में हिंदुओं को 54% और मुस्लिमों को 45.9% आरक्षण का फायदा दिया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ममता बनर्जी सरकार ने तुष्टिकरण की राजनीतिक चाल चलते हुए मुस्लिमों को खुले तौर आरक्षण में बड़ा हिस्सा देते हुए सीधा लाभ पहुँचाया है।

एनसीबीसी के दौरे में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को भी ओबीसी की सूची में शामिल किया गया है। यही नहीं, आयोग ने पाया है कि बंगाल के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले 90% छात्र मुस्लिम OBC कैटेगरी के हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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