Wednesday, September 22, 2021
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‘जो पूर्वजों के न हुए, वे देश के क्या होंगे’: फिर गुपचुप गुजर गए फिरोज गाँधी, कॉन्ग्रेस तो छोड़िए पोता-पोती ने भी नहीं किया याद

यह पहली बार नहीं है जब राहुल-प्रियंका अपने दादा फिरोज गाँधी को भूल गए हों। लंबे समय से ऐसा चला आ रहा है।

एक और 8 सितंबर बीत गया और बीत गई फिरोज गाँधी की एक और पुण्यतिथि। इस बार भी वही हुआ जो हर साल देखने को मिलता है। कॉन्ग्रेस तो छोड़िए उन्हें पोते राहुल गाँधी और पोती प्रियंका गाँधी वाड्रा तक ने याद नहीं किया।

राहुल-प्रियंका ने फिरोज गाँधी की समाधि पर जाना तो दूर अपने ट्विटर हैंडल पर भी इस विषय पर कुछ नहीं लिखा। राहुल ने जहाँ 8 सितंबर को पूरे दिन ट्विटर से दूरी बनाए रखी। वहीं प्रियंका ने ट्विटर पर संगीत सम्राट भूपेन हजारिका को उनकी जयंती पर याद किया, लेकिन अपने दादा को याद करना उन्हें सही नहीं लगा। ऐसे ही राहुल ने भी फेसबुक पर भूपेन हजारिका को याद किया है मगर फिरोज गाँधी के लिए कोई पोस्ट नहीं है।

प्रियंका गाँधी के ट्वीट

इस बीच तमाम सोशल मीडिया यूजर्स दोनों भाई-बहन को याद दिलाते रहे कि उनके दादा की पुण्यतिथि है, वो लोग उन्हें भी याद कर लें। लोगों ने फिरोज गाँधी का यह तिरस्कार देख कहा कि जो लोग अपने पूर्वजों के नहीं हुए वो देश के क्या होंगे।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव इरशाद उल्लाह बताते हैं कि तकरीबन साल 2007 और उसके बाद 2009 में राहुल और सोनिया गाँधी समाधि पर आए थे, लेकिन कई दशक बीत जाने के बाद भी अब फिरोज गाँधी के समाधि स्थल पर उनके परिवार के कोई लोग नहीं आए। इसी तरह कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबा अवस्थी कहते हैं कि यह बहुत दुख की बात है जो आदमी कॉन्ग्रेस को ऊँचाइयों पर ले गए उनकी समाधि पर कुछ ही कार्यकर्ता आते हैं।

हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब राहुल-प्रियंका अपने दादा फिरोज गाँधी को भूल गए हों। लंबे समय से ऐसा चला आ रहा है। राहुल, प्रियंका और सोनिया अक्सर इंदिरा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और राजीव गाँधी को याद करते रहते हैं, उनके जन्मदिवस और पुण्यतिथि पर उनकी समाधि पर जाते रहे हैं। मगर, फिरोज गाँधी की समाधि पर कोई नहीं जाता। साल 2019 में प्रियंका फिरोज गाँधी की समाधि से कुछ दूर ही थीं, लेकिन तब भी उन्होंने वहाँ जाना मुनासिब नहीं समझा।

फिरोज गाँधी की समाधि न तो इंदिरा के ‘शक्ति स्थल’ जितनी हाई प्रोफाइल है और न ही राजीव गाँधी की ‘वीर भूमि’ की तरह भव्य। कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार के भाषणों में भी फ़िरोज़ गाँधी का नाम कहीं नहीं आता। उनका समाधि-स्थल लखनऊ-इलाहबाद हाइवे पर एक कोने में धूल फाँक रहा है। सोनिया गाँधी 2001 के बाद से वहाँ नहीं गईं। राहुल अंतिम बार 2011 में वहाँ गए थे। प्रियंका 2009 में वहाँ गई थीं। कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार का ऐसा हाल तब है जब उनके नाम के पीछे लगने वाला ‘गाँधी’ फिरोज गाँधी की ही देन है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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