पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुन लिया है।
इसके साथ ही अब उनका पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। बीजेपी ने इस चुनाव में राज्य में बड़ी जीत हासिल की है और लंबे समय से बंगाल में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा रहे शुभेंदु अधिकारी को इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।
बीजेपी की जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर बंगाल की कमान किसके हाथ में जाएगी। कई नाम चर्चा में थे, लेकिन अंत में पार्टी नेतृत्व ने शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विधायक दल की बैठक में उनके नाम का ऐलान किया।
कौन हैं शुभेंदु अधिकारी?
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी इलाके में हुआ था। वे एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं और कई बार सांसद भी चुने जा चुके हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कांथी हाई स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने प्रभात कुमार कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। बाद में उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की।
राजनीति में आने से पहले ही उनके परिवार का बंगाल की राजनीति में बड़ा प्रभाव था। खासकर पूर्वी मेदिनीपुर इलाके में अधिकारी परिवार का दबदबा लंबे समय से माना जाता रहा है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में कॉन्ग्रेस की छात्र राजनीति से की थी। उस समय बंगाल में वामपंथी दलों का दबदबा था और विपक्षी छात्र नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था।
1995 में वे कांथी नगर पालिका में पार्षद चुने गए और यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत हुई। बाद में वे अपने पिता के साथ TMC में शामिल हो गए।
ममता बनर्जी के करीबी से सबसे बड़े विरोधी तक
एक समय ऐसा था जब शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता था। उन्होंने TMC को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2006-07 में सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन के दौरान शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे रहे।
इन्हीं आंदोलनों ने बंगाल में 34 साल पुरानी वामपंथी सरकार के खिलाफ माहौल बनाया। इसके बाद 2011 में TMC सत्ता में आई और ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री बनीं।
लेकिन समय के साथ शुभेंदु और TMC नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने लगी। आखिरकार 2020 में उन्होंने TMC छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। उनके बीजेपी में आने को पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा माना गया।
लगातार दो बार ममता बनर्जी को हराया
शुभेंदु अधिकारी का नाम पूरे देश में तब चर्चा में आया जब उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराया। यह मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल था।
इसके बाद 2026 के चुनाव में उन्होंने फिर ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस बार भवानीपुर सीट पर भी उन्होंने ममता बनर्जी को शिकस्त दी। यही वजह रही कि बीजेपी की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा था।
कितनी है शुभेंदु अधिकारी की संपत्ति?
चुनावी हलफनामे के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी करोड़पति नेताओं में शामिल नहीं हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 85.87 लाख रुपए बताई गई है। खास बात यह है कि उनके ऊपर किसी तरह का कोई कर्ज नहीं है।
उनके पास करीब 12 हजार रुपए नकद हैं। वहीं PNB, SBI और IDIB बैंक समेत कई खातों में लगभग 7 लाख रुपए जमा हैं। इसके अलावा उन्होंने पोस्टल सेविंग, किसान विकास पत्र और NSC में भी निवेश किया हुआ है। उनके पास शेयर और बॉन्ड्स में भी थोड़ा निवेश है।
आमतौर पर बड़े नेताओं के पास लग्जरी गाड़ियाँ और भारी संपत्ति होती है, लेकिन शुभेंदु अधिकारी का हलफनामा इससे अलग तस्वीर दिखाता है। उनके नाम पर कोई कार या बाइक नहीं है। यहाँ तक कि उनके पास सोना-चाँदी के गहने भी नहीं बताए गए हैं।
हालाँकि उनके पास कृषि भूमि और कुछ प्लॉट जरूर हैं। इसके अलावा उनके नाम पर तीन घर और फ्लैट दर्ज हैं, जिनकी कीमत करीब 24 लाख रुपए बताई गई थी।
शुभेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है। उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भी बीजेपी में सक्रिय हैं। वहीं उनके दूसरे भाई दिव्येंदु अधिकारी पहले TMC सांसद रह चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी ने अब तक शादी नहीं की है।
बीजेपी ने क्यों जताया भरोसा?
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि बंगाल में पार्टी को मजबूत करने में शुभेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी भूमिका रही है। वे राज्य की जमीनी राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विधायक दल की बैठक में कहा कि सभी विधायकों ने एकमत से शुभेंदु अधिकारी के नाम का समर्थन किया। किसी दूसरे नाम का प्रस्ताव तक नहीं आया। यही वजह रही कि उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया।
अब शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बंगाल में बीजेपी सरकार को मजबूत तरीके से चलाने और राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रखने की होगी। बंगाल की राजनीति में उनकी एंट्री छात्र नेता के तौर पर हुई थी, लेकिन आज वे राज्य के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जा रहे हैं।


