Homeदेश-समाजमोदी सरकार में किसानों की औसत मासिक आय में 25 प्रतिशत का वृद्धि

मोदी सरकार में किसानों की औसत मासिक आय में 25 प्रतिशत का वृद्धि

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार ने फरवरी 2016 में 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था।

इनकम डबलिंग कमिटी के हवाले से कृषि मंत्रालय ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की है। कृषि मंत्रालय की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2012-13 की तुलना में वर्तमान समय में देश के किसानों की औसत आय बढ़ी है।

रिपोर्ट के मुताबिक 2012-13 में कृषि पर आधारित एक परिवार की औसत आय ₹6426 थी, जो अब बढ़कर ₹8058 हो गई है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की सरकार ने फरवरी 2016 में 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए सरकार ने 13 अप्रैल 2016 को डबलिंग फार्मर्स इनकम कमिटी का भी गठन किया गया।

दरअसल पिछले दिनों संसद में सरकार से किसानों की आय को लेकर सवाल पूछा गया था, जिसके जवाब में कृषि व किसान कल्याण राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने संसद में बताया कि नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गनाइजेशन ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में साल 2012-13 के दौरान सर्वे किया था।

इस सर्वे में प्रति कृषि परिवार की औसत मासिक आय ₹6426 थी। मंत्री ने आगे कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति संबंधी रिपोर्ट पेश करने वाली समिति ने बताया कि किसान की आय प्रति वर्ष 2015-16 में बढ़कर ₹96,703 हो गई थी।

इसका मतलब ये है कि किसानों की प्रति माह औसत आय ₹8058.58 है। इस तरह 2012-13 के मुकाबले 2015-16 में किसानों की प्रतिमाह आय ₹1632.58 बढ़ी है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?

मुस्लिमों को रिझाने में 2017 में औंधे मुँह गिरे थे अखिलेश, आरक्षण का वादा किया लेकिन घोषणापत्र खाली रहा: 2027 के चुनावी रण में...

मुस्लिम आरक्षण पर अखिलेश बयानों से लेकर मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम राजनीति अपने पुराने ढर्रे पर रही है। हालाँकि अब यूपी में वोटर्स अपनी प्रथमिकताएँ बदल रहे हैं।
- विज्ञापन -