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कभी ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर जला देते हैं जिंदा, कभी चोर बताकर ले लेते हैं जान: जानिए यूनुस राज में हिंदुओं को किन-किन बहाने निशाना बना रहे कट्टरपंथी, 35 दिनों में 14 को मारा

बांग्लादेश में लगातार हिन्दुओं की हत्याओं का दौर जा्री है। कहीं हिन्दुओं की मॉब लिंचिंग हो रही है तो कहीं 'मजाक' में गोली मार दी जा रही है। महिलाओं के साथ रेप और हिन्दुओं के साथ अत्याचार की खबर हर दिन अखबार की सुर्खियाँ बन रही है।

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों की वजह से एक और हिन्दू युवक की जान चली गई। मिथुन सरकार नाम के युवक को कट्टरपंथियों ने दौड़ाया। भीड़ को अपनी ओर आता देखकर मिथुन डर के मारे तालाब में कूद गया। डूबने से उसकी मौत हो गई। कट्टरपंथी चोर-चोर कह कर उसका पीछा कर रहे थे।

पुलिस ने उसकी बॉडी बरामद कर ली है। बांग्लादेश में पिछले 35 दिनों में 14 हिंदुओं की हत्या कर दी गई है जबकि 50 से ज्यादा हिंसक हमले हुए हैं। इन हत्याओं के बाद भी मोहम्मद यूनुस सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है।

अगस्त 2024 में शेख हसीना को हटाए जाने के बाद से देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति लगातार अस्थिर बनी हुई है। यूनुस की अंतरिम सरकार और फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों के बीच, अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, अत्याचार और हत्याओं का दौर जारी है। शेख हसीना ने हाल ही में कहा है कि इन उपद्रवियों पर लगाम लगाने के लिए मजबूत सरकार की दरकार है।

लेकिन हिन्दुओं की लगातार हो रही हत्या के बावजूद मुहम्मद यूनुस सरकार नींद से अब तक नहीं जगा पाई है। हिंसक इस्लामी भीड़ और कट्टरपंथी तत्वों को देश में अराजकता और अशांति फैलाने की खुली छूट मिली हुई है। दिसंबर 2025 से अब तक 11 हिन्दुओं की हत्या हो चुकी है।

स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आए मामलों पर गौर करें तो हालात की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

नरसिंदी में प्रांतोस कर्मकार की हत्या

2 दिसंबर को नरसिंदी जिले में 42 साल के हिंदू व्यवसायी प्रांतोस कर्मकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी ज्वेलरी की दुकान थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें घर से बाहर बुलाया, स्कूल के मैदान में ले जाकर सीने में गोली मार दी और फरार हो गए। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस अब तक न तो हत्यारों की पहचान कर पाई है और न ही हत्या के मकसद का खुलासा हुआ है।

उत्पल सरकार की चाकू मारकर हत्या

5 दिसंबर की सुबह फरीदपुर जिले में 35 वर्षीय हिंदू मछली व्यापारी उत्पल सरकार की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उनकी वैन रोकी, सीने में वार किया और नकदी लूटकर फरार हो गए।

दिलचस्प बात यह है कि हमलावरों ने वैन चालक फिरोज मोल्ला को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। उन्हें केवल आँखों पर पट्टी बाँधकर पुल से बाँध दिया गया था। बाद में स्थानीय लोगों ने मोल्ला को बचाया और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने हिंदू मछली व्यापारी की खून ले लथपथ शव को फरीदपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुँचाा। पुलिस के मुताबिक, उत्पल सरकार की हत्या में 2-3 लोग शामिल थे, जिनकी तलाश की जा रही है।

रंगपुर में जोगेश चंद्र रॉय और सुबर्णा रॉय की हत्या

7 दिसंबर की रात रंगपुर जिले में 75 वर्षीय जोगेश चंद्र रॉय और उनकी 60 वर्षीय पत्नी सुबर्णा रॉय की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जोगेश रॉय बांग्लादेश मुक्ति संग्राम 1971 के योद्धा थे। पड़ोसियों ने सुबह उनके शव बरामद किए। उनका गला कटा हुआ था। अवामी लीग ने इस हत्याकांड के पीछे जमात-ए-इस्लामी का हाथ बताया।

कोमिल्ला में शांतो दास की हत्या

12 दिसंबर को कोमिल्ला जिले के होमना उपजिला में शांतो दास नामक एक हिंदू युवक का शव मक्के के खेत से बरामद हुआ। वह ऑटो-रिक्शा चालक और ग्राम पुलिस बल के सदस्य थे। इस घटना के बारे में उनके पिता अरुण चंद्र दास ने कहा था, “मेरा बेटा शांतो ऑटो रिक्शा चलाता था। गुरुवार शाम के बाद से हम उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे।” पीड़ित का गला कटा हुआ था और गर्दन पर चाकू के कई घाव थे। पुलिस ने शांतो दास का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए कोमिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया।

मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की हत्या

18 दिसंबर को बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका गाँव में एक हिंसक मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी । मृतक की पहचान 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास के रूप में हुई है। पीड़ित को बुरी तरह पीटा गया, पेड़ से बाँध दिया गया और फिर आग लगा दी गई। इस घटना का दिल दहला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

दीपू चंद्र दास एक कपड़ा कारखाने में मजदूर के रूप में काम करते थे। विवाद के बाद, उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया। घटना के दिन उसे फैक्ट्री से निकाल दिया गया था और फ्लोर मैनेजर ने कट्टरपंथियों को बता दिया था। इसके बाद पुलिस की हिरासत में लेने के बाद उसे कट्टरपंथियों ने पीट-पीट कर मार डाला।

बोगुरा में पिंटू अकांडा की हत्या

23 दिसंबर को बांग्लादेश के बोगुरा जिले के आदमदिघी उपजिला में एक माइक्रोबस से पिंटू अकांडा नामक 35 वर्षीय हिंदू व्यक्ति का शव बरामद किया गया। उन्हें एक दिन पहले चार अज्ञात हमलावरों ने बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया था। पीड़ित एक व्यवसायी और लॉटरी शोरूम के मालिक थे।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, पिंटू अकांडा की गला घोंटकर हत्या की गई थी। एक बयान में, एएसपी आसिफ हुसैन ने कहा, “हमारा प्राथमिक संदेह है कि पिंटू को बंदूक की नोक पर अगवा करने के बाद गला घोंटकर मार डाला गया था। हम फिलहाल जाँच कर रहे हैं।”

पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अपहरण का सीसीटीवी फुटेज अब सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में चार नकाबपोश लोग पिंटू पर हथियार ताने हुए और उसे उसके शोरूम से बाहर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद पीड़ित को जबरन गाड़ी में बैठाया गया।

राजबाड़ी में अमृत मंडल की हत्या

24 दिसंबर को अमृत मंडल नामक एक अन्य हिंदू व्यक्ति को उन्मादी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। यह घटना बांग्लादेश के राजबारी जिले के पांग्शा उपजिला में घटी। पीड़ित की उम्र महज 29 वर्ष थी। वह होसेनडांगा गाँव का निवासी था। अमृत मंडल को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया लेकिन चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

बाद में उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए राजबारी सदर अस्पताल के मुर्दाघर भेजा गया। हिंदू व्यक्ति की हत्या के बाद, मोहम्मद यूनुस ने अमृत मंडल को ‘अपराधी’ बताकर उसकी पीट-पीटकर हत्या को उचित ठहराने की कोशिश की। इसके अलावा अंतरिम सरकार के मुखिया यूनुस ने भी इस मामले में सांप्रदायिक पहलू को कम करके आँका।

हबीगंज में कामदेव दास की हत्या

हबीगंज जिले में 18 वर्षीय हिंदू युवक कामदेव दास की हत्या ने इलाके में दहशत फैला दी। वह 25 दिसंबर से लापता था और 27 दिसंबर को उसका शव तालाब से मिला। उसके गले पर निशान भी मिले हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों ने इस हत्या के पीछे इस्लामी कट्टरपंथियों का आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कामदेव गुरुवार (25 दिसंबर 2025) से लापता था। उसके पिता ने थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

बजेन्द्र बिस्वास की मारी गोली

29 दिसंबर को बांग्लादेश के अर्धसैनिक सहायक बल अंसार वाहिनी के हिन्दू सदस्य बजेन्द्र बिस्वास को गोली मार दी गई। ये अर्धसैनिक सहायक बल देश में आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। बिस्वास को मैनन सिंह इलाके में मारा गया। उसकी हत्या उसके दोस्त ने ही की। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट RTV ऑनलाइन ने बताया कि घटना के समय फैक्ट्री में कुल 20 अंसार सदस्य काम कर रहे थे। घटना के समय अंसार सदस्य नोमान मियाँ और बजेंद्र एक साथ बैठे थे। अचानक नोमान ने बजेंद्र की जांघ पर बंदूक (शॉटगन) तानी और कहा, ‘क्या मैं गोली मार दूँ?’ और फिर गोली चला दी। उसके बाद नोमान भाग गया।

खोकन चंद्र दास की हत्या

31 दिसंबर को को हिन्दू व्यवसायी खोकन चंद्र दास को घर लौटते समय हमलावरों ने चाकू से वार किया। इसके बाद पेट्रोल छिड़कर जिंदा जला दिया। खोकन दास अपने गाँव में एक छोटा मेडिकल स्टोर चलाते थे और मोबाइल बैंकिंग से भी जुड़ा काम करते थे। बुधवार (31 दिसंबर 2025) की रात, जब वह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। पहले उन पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इसके बाद हमलावरों ने उन पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी।

अपनी जान बचाने के लिए खोकन दास किसी तरह पास के तालाब में कूद पड़े, जिससे आग तो बुझ गई लेकिन वह बुरी तरह झुलस चुके थे और अत्यधिक खून बह चुका था। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से हालत नाजुक होने पर ढाका रेफर किया गया। हालाँकि, गंभीर चोटों और जलने के कारण डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

राणा प्रताप बैरागी की हत्या

जेस्सोर जिले के केशबपुर उपजिला स्थित अरुआ गाँव निवासी 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की सोमवार (05 जनवरी 2026) शाम को अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। बैरागी की मोनिरामपुर के कोपलिया बाजार में बर्फ बनाने की फैक्ट्री थी। इसके अलावा ने ‘दैनिक बीडी खबर’ समाचार में नरैल क्षेत्र के कार्यवाहक संपादक भी थे।

पुलिस के अनुसार, सोमवार शाम लगभग 5.45 बजे बैरागी अपनी फैक्ट्री में थे। तभी तीन हमलावर मोटरसाइकिल पर आए और उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाया और अपने साथ ले गए। रास्ते में हमलावरों ने बैरागी के सिर में तीन गोली मारी और भाग गए। बैरागी की मौके पर ही मौत हो गई।

हिंदू दुकानदार मणि चक्रवर्ती की चाकू घोंपकर हत्या

वहीं नरसिंदी जिले के पोलाश उपजिला क्षेत्र में एक हिंदू दुकानदार की सोमवार (05 जनवरी 2026) को चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। वे चारसिंदुर बाजार में अपनी किराना दुकान चलाते थे। सोमवार शाम को भी वह अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। मणि चक्रवर्ती को इलाके में प्रतिष्ठित व्यापारी के रूप में जाना जाता था। घटना के बाद से इलाके में दहशत फैल गई है।

मिथुन सरकार की हत्या

6 जनवरी को नाओगाँव जिले के महादेवपुर में कट्टरपंथी भीड़ से बचने के लिए नहर में कूदे एक हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय लोगों की भीड़ ने मिथुन पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसका पीछा किया। जान बचाने के लिए वह चकगौरी बाजार इलाके में एक नहर में कूद गया लेकिन तैर न पाने के कारण डूब गया। मदद की गुहार के बावजूद उसे बचाया नहीं गया। पुलिस ने नहर से उसका शव बरामद किया। मिथुन भंडारपुर गाँव का रहने वाला था।

ये वे हिन्दू थे, जिनकी मौत को पुलिस ने दर्ज की और मीडिया के सामने आई। कई ऐसी हत्याएँ भी हुई जिन्हें न तो दर्ज किया गया और न ही मीडिया में इन्हें जगह मिली।

हत्याओं के अलावा हिन्दुओं के उत्पीड़न की कई खबरें सामने आई। 19 दिसंबर को सिलहट में एक हिंदू पत्रकार सुशांत दासगुप्ता के घर पर हमला किया गया, वहीं एक रिक्शा चालक को कलावा पहनने पर पीटा गया। उस पर RA&W एजेंट होने का आरोप लगाया गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

हिन्दू महिलाओं के साथ रेप की घटनाएँ काफी बढ़ गई है। जमीन हड़पने के लिए अकेली महिला को निशाना बनाया जा रहा है। कालीगंज में एक हिन्दू विधवा महिला को शाहीन और हसन ने गैंगरेप किया और उसके दो मंजिला घर को हड़पने की कोशिश की। महिला को पेड़ से बाँधकर उसके बाल भी काट डाले। वहीं एक हिन्दू सुमन को चोरी के आरोप में जमकर पीटा और खंभे से बाँध दिया। वह भिखारी था और उसका कोई आपराधिक मामला भी नहीं था।

ये यूनुस सरकार की हकीकत है जो चीख चीखकर कह रही है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथियों का राज है। सरकार सिर्फ मूकदर्शक है, उसे न तो कानून व्यवस्था की फिक्र है और न ही जनता की।

हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इसकी पुष्टि करता है। इसमें एक युवक बेखौफ थाने के अंदर बैठकर कह रहा है कि उसने हिन्दू पुलिस अधिकारी को जिंदा जला दिया। सत्ता का घमंड और सिस्टम का खस्ताहाल इससे ज्यादा क्या हो सकता है। इसे देखकर यही कहा जा सकता है कि बेशर्म मोहम्मद यूनुस, अब तो जाग जाओ, जनता त्राहि त्राहि कर रही है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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