Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयघुसपैठियों के लिए बॉर्डर सील, WHO से अलग, थर्ड जेंडर खत्म: राष्ट्रपति बनते ही...

घुसपैठियों के लिए बॉर्डर सील, WHO से अलग, थर्ड जेंडर खत्म: राष्ट्रपति बनते ही एक्टिव हुए डोनाल्ड ट्रंप, भारत के लिए ‘प्रीमियम’ सीट, कई देशों के प्रमुख बैठे पीछे

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष दूत के रूप में इस समारोह में शामिल हुए।

अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह कैपिटल रोटुंडा के भव्य कक्ष में आयोजित हुआ। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष दूत के रूप में इस समारोह में शामिल हुए। अपने शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप एक्शन मोड में आ गए और ताबड़तोड़ फैसले लिए, जिसमें मैक्सिको की सीमा पर इमरजेंसी लागू करना और डब्ल्यूएचओ से अमेरिका को हटाना शामिल है।

शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री जयशंकर

भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से यह शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में महत्वपूर्ण है। शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री एस जयशंकर सबसे आगे की पंक्ति में बैठे नजर आए। ट्रंप जब मंच से संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने जयशंकर की ओर मुखातिब होकर संवाद किया। अमेरिका के लिए भारत की बढ़ती अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण मौके पर भारत को बेहद तवज्जो दी गई। उनके साथ इक्वाडोर के राष्ट्रपति भी बैठे। कई देशों के राष्ट्रध्यक्षों को पीछे बैठाया गया।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में अमेरिका को ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत का वादा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब किसी भी देश के सामने झुकेगा नहीं। ट्रंप ने कई कठोर फैसलों की घोषणा की, जैसे WHO से अलग होना, थर्ड जेंडर को मान्यता न देना और पेरिस जलवायु समझौते से बाहर होना। ये सभी फैसले उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को स्पष्ट करते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे फैसले लिए, जिससे अमेरिका और दुनिया पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। उनके 10 बड़े फैसलों को सरल तरीके से समझते हैं:

WHO को अलविदा: ट्रंप ने अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर कर लिया। उन्होंने इसे अमेरिका के हितों के खिलाफ बताते हुए फंडिंग रोक दी।

पेरिस समझौते से बाहर: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से हटने का ऐलान किया, जिसे उन्होंने ‘अमेरिका विरोधी’ बताया।

BRICS को चेतावनी: ब्रिक्स देशों (भारत, चीन, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका) को धमकी दी कि अगर वे अमेरिका विरोधी कदम उठाते हैं, तो परिणाम भुगतने होंगे।

टिकटॉक को मोहलत: चीन से जुड़े ऐप टिकटॉक को अमेरिकी कानूनों के पालन के लिए 75 दिन का समय दिया, हालाँकि ट्रंप की नजर टिकटॉक को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की तरफ है।

थर्ड जेंडर को खत्म किया: ट्रंप ने अमेरिका में सिर्फ ‘पुरुष और महिला’ को मान्यता दी और थर्ड जेंडर को खारिज कर दिया।

मेक्सिको बॉर्डर सील: दक्षिणी सीमा पर इमरजेंसी लगाकर सेना तैनात की, ताकि अवैध प्रवासियों को रोका जा सके।

ग्रीनलैंड पर नजर: ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए जरूरी बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया।

फ्री स्पीच की पैरवी: उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नया आदेश जारी किया, ताकि सरकारी सेंसरशिप रोकी जा सके।

कैपिटल हिल हिंसा से जुड़े लोगों को माफी: डोनाल्ड ट्रंप कैपिटल हिल हिंसा में शामिल 1500 रिपब्लिकन समर्थकों को माफी दे दी है और उनकी जेल से रिहाई बी शुरू हो गई है।

कनाडा-मेक्सिको पर टैक्स: इन देशों से आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे व्यापारिक तनाव बढ़ा।

अमेरिका के नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उद्घाटन भाषण में अमेरिकी नागरिकों को बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका अपने हितों को सबसे ऊपर रखेगा और दूसरे देशों के दबाव में नहीं आएगा। यह भाषण न केवल अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यह संदेश भी था कि ट्रंप प्रशासन नई विश्व व्यवस्था बनाने की ओर अग्रसर है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -