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भारत ने US नेतृत्व वाले Pax Silica ग्रुप में ली एंट्री, सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में घटेगी चीनी निर्भरता: समझिए- कैसे खुद को भविष्य के लिए तैयार कर रहा हिंदुस्तान

भारत में डिजिटल क्रांति, 5G नेटवर्क, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI आधारित सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भरोसेमंद और सस्ती सप्लाई चेन तक पहुँच भारत की विकास गति को और तेज कर सकती है।

वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के इस दौर में तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स किसी भी देश की ताकत का आधार बन चुके हैं। 21वीं सदी में जिस देश के पास मजबूत और सुरक्षित तकनीकी सप्लाई चेन होगी, वही आर्थिक, सामरिक और रणनीतिक रूप से आगे रहेगा।

इसी सोच के तहत अमेरिका के नेतृत्व में एक नया रणनीतिक गठबंधन खड़ा किया गया है, जिसका नाम है ‘पैक्स सिलिका (Pax Silica)’। इस पहल का मकसद है दुनिया भर में सिलिकॉन आधारित तकनीकों, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जरूरी खनिजों की एक सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना।

अब भारत भी इस महत्वपूर्ण वैश्विक पहल का हिस्सा बन गया है। भारत शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका अलायंस में शामिल हुआ। दिल्ली में चल रही AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत और अमेरिका ने घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत के प्रवेश को एक रणनीतिक घटनाक्रम बताया।

वहीं माइक्रोन टेक्नोलॉजी के CEO संजय मेहरोत्रा ​​ने कहा, “पैक्स सिलिका पहल US और भारत के बीच टेक्नोलॉजी कोलेबोरेशन को और करीब लाएगी।”

यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में नई मजबूती लाएगा और भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में एक अहम खिलाड़ी बना देगा। इस फैसले का असर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास, सेमीकंडक्टर उद्योग और AI मिशन को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

क्या है ‘पैक्स सिलिका’ और इसकी पृष्ठभूमि?

‘पैक्स सिलिका’ शब्द दो लैटिन और वैज्ञानिक अवधारणाओं से मिलकर बना है। ‘Pax’ का अर्थ होता है शांति, स्थिरता और दीर्घकालिक समृद्धि, जबकि ‘Silica’ सिलिकॉन से जुड़ा है, जो कंप्यूटर चिप्स, सेमीकंडक्टर और AI तकनीक का मूल तत्व है। यानी यह पहल तकनीकी सप्लाई चेन के जरिए वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने की सोच पर आधारित है।

इस रणनीतिक गठबंधन की शुरुआत दिसंबर 2025 में अमेरिका ने की थी। 12 दिसंबर को वॉशिंगटन में आयोजित ‘पैक्स सिलिका समिट’ में कई देशों ने इस घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य था, क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और उससे जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित, भरोसेमंद और नवाचार आधारित बनाना।

(फोटो साभार: ईटीवी भारत)

शुरुआत में इस पहल में अमेरिका के साथ ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हुए। भारत को पहले चरण में इसमें शामिल नहीं किया गया था, जिससे कई तरह की अटकलें भी लगाई गईं।

हालाँकि पिछले महीने भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने औपचारिक रूप से नई दिल्ली को इस रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने का न्योता दिया।

‘पैक्स सिलिका’ का उद्देश्य और वैश्विक महत्व

‘पैक्स सिलिका’ का मुख्य उद्देश्य दुनिया की तकनीकी सप्लाई चेन को किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से मुक्त करना है। खासकर चीन पर निर्भरता कम करना इस पहल का एक अहम लेकिन अप्रत्यक्ष लक्ष्य माना जा रहा है। वर्तमान में दुनिया के करीब 70 प्रतिशत दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ मिनरल्स) का खनन अकेले चीन करता है।

यही खनिज सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैटरी, AI सर्वर और अत्याधुनिक तकनीकों के निर्माण में जरूरी होते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मानना है कि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में आर्थिक दबाव, आपूर्ति संकट और राजनीतिक ब्लैकमेल जैसी स्थितियाँ पैदा कर सकती है।

इसलिए ‘पैक्स सिलिका’ के जरिए एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिसमें ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, AI मॉडल, डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित किया जा सके। इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू है भरोसेमंद तकनीक का विकास।

AI को एक परिवर्तनकारी शक्ति माना गया है, जो आने वाले दशकों में पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आकार देगी। ऐसे में यह जरूरी है कि AI सिस्टम सुरक्षित हों, उनके दुरुपयोग की संभावना कम हो और वे किसी शत्रुतापूर्ण ताकत के नियंत्रण में न जाएँ। पैक्स सिलिका इसी सोच के तहत देशों को एक साझा मंच पर लाकर काम करने का अवसर देता है।

भारत की एंट्री का समय और रणनीतिक पृष्ठभूमि

भारत का इस गठबंधन में शामिल होना ऐसे समय पर हो रहा है, जब भारत और अमेरिका के रिश्ते एक बार फिर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक टैरिफ, बाजार पहुँच और तकनीकी सहयोग को लेकर तनाव देखने को मिला था।

खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के चलते दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई थी। हालाँकि हाल के हफ्तों में दोनों पक्षों ने अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है और कई अन्य रणनीतिक पहलों पर सहमति बनाई है।

इसी क्रम में भारत को ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल किया जाना दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊँचाई पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान इस साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जाएगा। इस मौके पर अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इकोनॉमिक अफेयर्स जैकब हेलबर्ग भी मौजूद हैं।

उनका साफ कहना है कि 20वीं सदी में दुनिया तेल और स्टील से चलती थी, जबकि 21वीं सदी में दुनिया कंप्यूटर, AI और सेमीकंडक्टर से चलेगी। ऐसे में भारत को इस रणनीतिक ढाँचे में शामिल करना अमेरिका की बड़ी प्राथमिकता है।

चीन फैक्टर और वैश्विक भू-राजनीति में ‘पैक्स सिलिका’ की भूमिका

हालाँकि अमेरिका यह कहता है कि ‘पैक्स सिलिका’ किसी देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल मुख्य रूप से चीन की तकनीकी और खनिज प्रभुत्व को संतुलित करने के लिए लाई गई है।

चीन न सिर्फ दुर्लभ खनिजों के खनन में अग्रणी है, बल्कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी उत्पादन में भी उसकी पकड़ बेहद मजबूत है। इसके अलावा AI हार्डवेयर और सप्लाई चेन में भी चीन की बड़ी हिस्सेदारी है।

अमेरिका और उसके सहयोगी देश इसे ‘कोएर्सिव डिपेंडेंसी’ यानी जबरन निर्भरता मानते हैं। उनका तर्क है कि यदि किसी संकट के समय चीन सप्लाई रोक दे या कीमतें बढ़ा दे, तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल सकती है। इसी कारण पैक्स सिलिका के जरिए वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार की जा रही है।

चीन ने इस पहल पर संयमित प्रतिक्रिया दी है, लेकिन उसके सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने इसे चीन को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन से अलग करने की कोशिश बताया है और चेतावनी दी है कि इससे लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार अस्थिर हो सकता है।

भारत को क्या-क्या फायदे होंगे: तकनीक, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा

भारत के लिए ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होना कई स्तरों पर फायदेमंद साबित हो सकता है। सबसे बड़ा लाभ भारत के तेजी से बढ़ते तकनीकी बाजार को मिलेगा। भारत में डिजिटल क्रांति, 5G नेटवर्क, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI आधारित सेवाओं की माँग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भरोसेमंद और सस्ती सप्लाई चेन तक पहुँच भारत की विकास गति को और तेज कर सकती है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत अभी शुरुआती दौर में है। सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। पैक्स सिलिका के जरिए भारत को अत्याधुनिक तकनीक, निवेश और विशेषज्ञता तक पहुँच मिलेगी, जिससे देश में सेमीकंडक्टर फैब्स, पैकेजिंग यूनिट्स और AI हार्डवेयर निर्माण को गति मिलेगी।

AI के क्षेत्र में भी यह साझेदारी भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। अमेरिकी कंपनियाँ पहले ही भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई और अन्य दिग्गज कंपनियों की दिलचस्पी भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में बढ़ रही है।

पैक्स सिलिका के तहत भारत को एडवांस्ड AI चिप्स, डेटा सेंटर टेक्नोलॉजी और अनुसंधान सहयोग मिल सकता है, जिससे भारत वैश्विक AI रेस में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।

इसके अलावा चीन पर निर्भरता कम होना भी भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक लाभ है। खासकर टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और बैटरी जैसे क्षेत्रों में भारत चीन से आयात पर काफी निर्भर है। पैक्स सिलिका के तहत वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित होने से भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

सुरक्षा के लिहाज से भी यह पहल बेहद अहम है। संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा, साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और डिजिटल नेटवर्क की विश्वसनीयता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी है। इस गठबंधन से भारत को सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।

भविष्य की दिशा और भारत की भूमिका

पैक्स सिलिका केवल एक तकनीकी गठबंधन नहीं है, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की नींव रखने की कोशिश है। जिस तरह 20वीं सदी में तेल आधारित गठबंधन वैश्विक राजनीति को प्रभावित करते थे, उसी तरह 21वीं सदी में सिलिकॉन, AI और सेमीकंडक्टर आधारित गठबंधन नई भू-राजनीति को आकार देंगे।

भारत की इसमें भागीदारी उसे सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्माता और इनोवेशन हब बनने का अवसर देगी। भारत के पास विशाल मानव संसाधन, मजबूत आईटी सेक्टर, बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और तेजी से विकसित होता डिजिटल बाजार है।

यदि इन सभी ताकतों का सही उपयोग किया गया, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक AI और सेमीकंडक्टर हब बन सकता है।

हालाँकि इसके साथ चुनौतियाँ भी हैं। अन्य देशों की तुलना में भारत के पास अभी सीमित खनिज संसाधन और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है। ऐसे में भारत को अपने हितों की रक्षा करते हुए इस गठबंधन में संतुलित भूमिका निभानी होगी, ताकि वह केवल बाजार न बनकर एक मजबूत उत्पादन और तकनीकी शक्ति के रूप में उभर सके।

भारत का ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होना केवल एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि देश के तकनीकी और आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला है। यह पहल भारत को वैश्विक तकनीकी मंच पर मजबूत स्थान दिला सकती है, सेमीकंडक्टर और AI क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकती है और चीन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकती है।

आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि भारत इस रणनीतिक साझेदारी का किस तरह उपयोग करता है। यदि नीतिगत स्पष्टता, निवेश प्रोत्साहन और तकनीकी नवाचार पर सही तरीके से काम किया गया, तो पैक्स सिलिका भारत के लिए विकास, सुरक्षा और समृद्धि का एक नया अध्याय खोल सकता है।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
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