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H1-B वीजा फीस और टैरिफ चुनौतियों के बीच एस जयशंकर और मार्को रूबियो की मुलाकात, अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- ‘भारत बेहद अहम’

डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और H1-B वीजा फीस बढ़ोतरी के बावजूद विदेश मंत्री मार्को रूबियो और एस जयशंकर की मुलाकात काफी अहम रहीं। मार्को ने अमेरिका के लिए भारत को काफी महत्वपूर्ण बताया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही H1-B वीजा की फीस ₹88 लाख कर दी थी। इसके बाद, न्यूयॉर्क में सोमवार (22 सितंबर 2025) को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच एक अहम मुलाकात हुई। मुलाकात में मार्को रूबियों ने ‘अमेरिका के लिए भारत को काफी अहम’ बताया है।

मुलाकात के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा

मार्को रूबियो ने कहा कि भारत अमेरिका के लिए ‘बेहद महत्वपूर्ण’ देश है। मार्को रूबियो ने भारत की व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों में भागीदारी की सराहना की। मार्को रूबियों ने यह भी कहा कि दोनों देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र और खुले वातावरण को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, विशेष रूप से क्वाड के माध्यम से।

रूबियो और जयशंकर पहले भी मिल चुके हैं। जुलाई 2025 में वे ‘क्वाड’ (QUAD) की बैठक में मिले थे। क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस समूह का मकसद हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि क्वाड के माध्यम से स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना जरूरी है।

एस जयशंकर ने भी इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कई द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्राथमिक मुद्दों पर प्रगति के लिए निरंतर सहयोग की आवश्यकता है।

वीजा फीस का भारत पर असर

बता दें, कि भारत H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाला देश है। पिछले साल, अमेरिका ने जितने भी H-1B वीजा दिए, उनमें से 71% भारतीयों को मिले थे। डोनाल्ड ट्रंप के वीजा फीस बढ़ोतरी के बाद नए शुल्क से भारतीय आईटी कंपनियों की लागत में तेजी से बढ़ोतरी होगी। इससे छोटे-छोटे बिजनेस और स्टार्टअप को भी मुश्किलें आ सकती हैं। भारत सरकार और तकनीकी कंपनियाँ इस फैसले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह भारतीय पेशेवरों के अमेरिका जाने के रास्ते को कठिन बना सकता है।

भारत और अमेरिका के रिश्ते पहले से अधिक जटिल हो चुके हैं, लेकिन इन व्यापारिक और वीजा विवादों के बावजूद दोनों देश सहयोग को बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं। दोनों पक्षों ने यह संदेश दिया है कि चाहे चुनौतियाँ बढ़ें, वे संवाद और सहयोग को जारी रखेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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