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पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान का शेयर बाजार धड़ाम, विकास दर भी लुढ़का: 1 दिन में ही भारत के एक्शन का दिखा असर, पड़ोसी मुल्क पर छाया भुखमरी का खतरा

वाघा, हुसैनीवाला सहित तीन बॉर्डर बंद करने के भारत के फैसले से भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान में रोजमर्रा के सामानों का भी अभाव हो जाएगा। इस बॉर्डर से छोटे व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर व्यापार किया जाता था। अटारी-वाघा क्रॉसिंग पर 2023-24 वित्तीय वर्ष में 38.86 अरब भारतीय रुपए का व्यापार हुआ था।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें से एक पाकिस्तान के साथ सन 1960 में हुई सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी शामिल है। इस कदम का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस कदम के बाद पाकिस्तान में महंगाई, खाद्य संकट, बिजली कटौती जैसी समस्याएँ और तेज़ हो जाएँगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन हालातों के चलते पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट लगातार इसकी झलक दे रहा है। वहाँ का बाजार भी क्रैश कर गया है।

वर्तमान स्थिति को देखकर अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक संगठनों ने भी पाकिस्तान की विकास दर को घटा दिया है। विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के एक करोड़ लोग अब भूखमरी के कगार पर खड़़े हो गए हैं। उसने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान के विकास दर को भी घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले विश्व बैंक ने 2.8 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया था।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के विकास दर को घटाकर 2.6 कर दिया। लगभग तीन महीने पहले IMF ने पाकिस्तान की विकास के लिए 3 प्रतिशत का पूर्वानुमान लगाया था। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने पाकिस्तान से संरचनात्मक सुधारों के लिए कहा था, जो वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान के असंभव दिख रहा है।

वाघा, हुसैनीवाला सहित तीन बॉर्डर बंद करने के भारत के फैसले से भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान में रोजमर्रा के सामानों का भी अभाव हो जाएगा। इस बॉर्डर से छोटे व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर व्यापार किया जाता था। अटारी-वाघा क्रॉसिंग पर 2023-24 वित्तीय वर्ष में 38.86 अरब भारतीय रुपए का व्यापार हुआ था।

जल संकट और आर्थिक मंदी के कारण पाकिस्तान में खाद्य आपूर्ति बाधित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंधु जल संधि को निलंबित करने के कारण पाकिस्तान की कृृषि पर व्यापक एवं गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर ही आधारित है। ऐसे में भारत की कड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान का विकास दर और गिरने की संभावना है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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