अमेरिका की सरकार ने भारतीय मूल की ब्रिटिश शिक्षाविद निताशा कौल को खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश के लिए चल रहे ट्रायल में एक्सपर्ट विटनेस (विशेषज्ञ गवाह) के तौर पर शामिल किया है।
अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने अपने आधिकारिक अदालती दस्तावेज में कहा है कि प्रोफेसर कौल इस मामले में साक्ष्य देंगी। वह लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय में राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध और आलोचनात्मक बहु-विषयक अध्ययन की प्रोफेसर हैं और वहीं पर लोकतंत्र अध्ययन केंद्र की निदेशक भी हैं।
दस्तावेजों के अनुसार, कौल कई बिंदुओं पर गवाही देंगी। इसमें यह भी शामिल है कि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से पन्नू और हरदीप सिंह निज्जर की आतंकवादी गतिविधियों की निंदा की थी।
यह जानकारी स्वतंत्र खोजी पत्रकार ‘जर्नलिस्ट V’ ने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर साझा की है।
Lot of new filings in the Nikhil Gupta trial.
— Journalist V (@OnTheNewsBeat) September 24, 2025
I'll make a thread here :
The US Govt has enlisted @NitashaKaul, recently in the news for having had her OCI cancelled, as an expert witness. pic.twitter.com/WmbQCRh4dU
कौल को अमेरिका में एक्सपर्ट विटनेस के तौर पर बुलाने की बात से भारत में विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि निताशा ने कई भारत-विरोधी बयान दिए हैं और भारतीय संस्थानों के खिलाफ लंबे समय से सक्रिय रही हैं।
निताशा कौल कौन हैं?
निताशा कौल को उनके वर्षों पुराने बयानों और गतिविधियों के कारण अक्सर ‘भारत-विरोधी प्रचारक’ या ‘एंटी- इंडिया प्रोपेगैंडिस्ट’ कहा जाता है। मई 2024 में उन्होंने सोशल मीडिया पर शिकायत की थी कि भारत सरकार ने उनका ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड रद्द कर दिया है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में सरकार पर असहमति की आवाज को दबाने के लिए ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ और उनके ‘शोध कार्य’ के लिए सजा देने का आरोप लगाया था। उनके अनुसार ये शोध कार्य प्रधानमंत्री मोदी की सरकार की आलोचना करता है।
उन्होंने लिखा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और याद दिलाया कि इससे पहले भी उन्हें भारत में प्रवेश से रोका गया था, जब उन्हें कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था।
निताशा के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों को 20,000 शब्दों का विस्तृत जवाब भेजा था, फिर भी सरकार ने उनका OCI कार्ड रद्द कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह भारत की ‘संकीर्ण मानसिकता और असुरक्षा’ का संकेत है, जो असहमति को जगह नहीं देती।
हालाँकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि OCI कार्ड कोई अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है। यह विशेष शर्तों के तहत भारतीय मूल के लोगों को दिया जाता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति भारत की संप्रभुता, संवैधानिक मूल्यों या राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो इसे रद्द किया जा सकता है।
भारत की संप्रभुता-अखंडता को नुकसान पहुँचाने के प्रयास पर सरकार ने रद्द किया OCI कार्ड
निताशा के मामले में उनकी ओर से साझा किए गए दस्तावेजों में लिखा था- “भारत सरकार के संज्ञान में यह बात आई है कि आप भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल पाई गई हैं, जो दुर्भावना से प्रेरित हैं और तथ्यों या इतिहास की पूरी तरह अनदेखी करती हैं। आपने अपने लेखन, भाषणों और पत्रकारिता के माध्यम से भारत और उसकी संस्थाओं की संप्रभुता को बार-बार निशाना बनाया है।”
भारत सरकार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उनकी भारत-विरोधी गतिविधियों के कारण उनका OCI कार्ड रद्द किया गया। निताशा लंबे समय से भारत-विरोधी नैरेटिव का प्रचार करती रही हैं।
मई 2024 में उन्होंने एक काल्पनिक कहानी साझा की थी। इसमें उन्होंने भारत में EVM मशीनों में वोट न गिनने का सपना देखा था। उन्होंने इस कहानी को कॉन्ग्रेस पार्टी की ओर से EVM को लेकर फैलाई गए विवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा, “हाल ही में एक वर्कशॉप लंच में मैं एक ब्रिटिश सहयोगी को बता रही थी कि पिछली रात मैं ठीक से सो नहीं पाई क्योंकि मैंने सपना देखा कि लोग EVM पर वोट डाल रहे हैं लेकिन वोट गिने नहीं जा रहे। तुर्की के एक कलीग ने सुना और कहा कि उसे भी एर्दोगन के चुनावों के दौरान ऐसे सपने आते थे।”
फरवरी 2024 में उन्हें बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पहुँचते ही वापस भेज दिया गया था। यह कार्रवाई उनके खिलाफ जारी एक लुकआउट सर्कुलर नोटिस के आधार पर की गई थी, क्योंकि भारतीय एजेंसियों ने उन्हें ‘अलगाववादी’ बयानों और कश्मीर पर भारत-विरोधी रुख के लिए चिन्हित किया था।
कौल ने कहा कि उन्हें एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोका और बताया कि ‘दिल्ली से ऑर्डर्स’ हैं कि उन्हें देश में घुसने न दिया जाए। उन्होंने कहा कि उनके पास यात्रा के सभी कागज थे, लेकिन फिर भी उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि वह ‘लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता’ के लिए आवाज उठाना जारी रखेंगी, चाहे उन्हें कितनी ही परेशानियों का सामना क्यों न करना पड़े। बेंगलुरु एयरपोर्ट से डिपोर्टेशन के बाद उन्होंने एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी, ठीक उसी तरह जैसे अब उन्होंने OCI कार्ड रद्द होने के बाद दी है।
उन्होंने पहले भी RSS के बारे में झूठी बातें फैलाई थीं और ‘Stand With Kashmir’ (स्टैंड विथ कश्मीर), ‘Kashmir Solidarity Movement’ और ‘Indian American Muslim Council’ जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था।
कौल ने व्हार्टन स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण को रद्द कराने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CoDS) बिपिन रावत की मृत्यु का भी मजाक उड़ाया था। निताशा कौल ने उनके असमय निधन को सही ठहराते हुए उन्हें ‘कश्मीरियों का दुश्मन’ बताया था।
भारत-विरोधी आवाज का इस्तेमाल करती अमेरिकी सरकार
हैरानी की बात ये है कि अमेरिका सरकार ने एक भारत-विरोधी विचार रखने वाले इंसान को एक्सपर्ट विटनेस के तौर पर चुना है। ये भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसे वॉशिंगटन का जानबूझकर भारत-विरोधी आवाज को मंच देने की कोशिश माना जा रहा है।
कौल की गवाही का उपयोग यह साबित करने के लिए किया जा सकता है कि भारत ने विदेशों में खालिस्तानी आतंकवादियों को निशाना बनाया है, लेकिन उनके भारत-विरोधी बयानों का इतिहास उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
कई लोगों के लिए यह ऐसा लगता है जैसे ये भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किनारा करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो, खासकर तब जब भारत ने विदेशों में हत्या की साजिशों में शामिल होने के आरोपों को बार-बार खारिज किया है।
गुरपतवंत सिंह पन्नू कौन है?
गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका में रहने वाला खालिस्तानी आतंकवादी है। उसके पास अमेरिका और कनाडा दोनों देशों की नागरिकता है। वह अमेरिका में वकील होने की बात कहता है और सिखों के अधिकारों की लड़ाई में अग्रणी होने का दावा करता है।
असल में, वह लगातार खालिस्तानी विचारों का प्रचार करता है और भारत के खिलाफ धमकियाँ देता रहता है। वह कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों में भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा भड़काने का भी काम करता है।
भारत सरकार ने उसे गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। उसकी संस्था ‘Sikhs For Justice’ को भी भारत सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
क्या है पन्नू मामले की तह
पन्नू की हत्या की साजिश का खुलासा पिछले साल हुआ था जब अमेरिकी न्याय विभाग ने दो भारतीय नागरिकों के खिलाफ आरोप दर्ज किए थे। पहले आरोपी विकास यादव पर भारत में बैठकर साजिश रचने का आरोप है। पहले उसे ‘CC-1’ के नाम से पहचाना गया था, अब उसे आधिकारिक तौर पर आरोपित बनाया गया है।
दूसरा आरोपी निखिल गुप्ता चेक गणराज्य में गिरफ्तार हुआ था और फिलहाल ब्रुकलिन में डिटेंशन में है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यादव पहले भारत के कैबिनेट सचिवालय में कार्यरत था। उसने निखिल गुप्ता को अमेरिका में एक हिटमैन खोजने का काम सौंपा था ताकि पन्नू को खत्म किया जा सके।
मैनहैटन फेडरल कोर्ट में फाइल किए गए एक मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने दावा किया था कि एक अज्ञात भारतीय सरकारी कर्मचारी (CC-1) ने निखिल गुप्ता को पन्नू को मारने के लिए एक हत्यारे की खोज करने को कहा था। गुप्ता को जून 2023 में प्राग में हिरासत में लिया गया और जून 2024 में अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया।
अमेरिका की ओर से नवंबर 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी पन्नू की हत्या की असफल साजिश के आरोप ऐसे समय में सामने आए जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को बार-बार निराधार बताया है।
अब जब अमेरिका इस मामले को आगे बढ़ा रहा है और निताशा कौल जैसे व्यक्तियों को विशेषज्ञ गवाह बना रहा है तो यह मामला भारत और वाशिंगटन के बीच संबंधों में तनाव को एक और पायदान पर लेकर जा सकता है।
इस खबर को मूल रूप से अंग्रेजी में श्रीति सागर ने लिखा है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।


