Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयअमेरिका में रहने वाले भारतीयों को तोहफा, दिवाली मनाने के लिए घोषित हो सकता...

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को तोहफा, दिवाली मनाने के लिए घोषित हो सकता है अवकाश: 3 नवंबर को पेश होगा विधेयक 

अगर इस विधेयक को मंजूरी मिल जाती है, तो अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को दिवाली पर छुट्टी मनाने का मौका मिलेगा और भारतीय अमेरिकियों की सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान होगा। साथ ही अमेरिका के कई दफ्तरों में दिवाली वाले दिन अवकाश रहेगा।

अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को जल्द ही दिवाली उत्सव मनाने के लिए अवकाश मिल सकता है। खबर है कि अमेरिका में दिवाली को प्रशासनिक अवकाश घोषित किया जा सकता है, यह घोषणा भारतीयों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।

अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य कैरोलिन मैलोनी (Carolyn Maloney) की ओर से बुधवार (3 नवंबर 2021) को अमेरिकी कॉन्ग्रेस में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य संयुक्त राज्य अमेरिका में दिवाली को संघीय अवकाश के रूप में स्थापित करना है। बुधवार को पेश होने वाले इस विधेयक के समर्थन में डेमोक्रेट कॉन्ग्रेस के सदस्यों के साथ इंडिया कॉकस, कॉन्ग्रेस के सदस्य रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति व अन्य अधिवक्ता भी शामिल होंगे। 

भारतीय अमेरिकी समुदाय के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हुए इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा भी उन कॉन्ग्रेस सदस्य में शामिल होंगे, जो भारतीय प्रवासियों के लंबे समय से समर्थक रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अगर इस विधेयक को मंजूरी मिल जाती है, तो अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को दिवाली पर छुट्टी मनाने का मौका मिलेगा और भारतीय अमेरिकियों की सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान होगा। साथ ही अमेरिका के कई दफ्तरों में दिवाली वाले दिन अवकाश रहेगा।

 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -